#राजनीति
August 18, 2026
BJP की नई टीम में हिमाचल के हाथ खाली- क्या मोदी कैबिनेट विस्तार में मिलेगी जगह? जानें
विधानसभा चुनाव से पहले बढ़ी सियासी चर्चा
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शिमला। हिमाचल प्रदेश की सियासत में भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने सोमवार को राष्ट्रीय पदाधिकारियों, मोर्चों और विभिन्न प्रकोष्ठों की नई टीम का ऐलान कर दिया, लेकिन इस सूची में हिमाचल प्रदेश के किसी भी बड़े नेता को प्रमुख जिम्मेदारी नहीं मिली।
खास बात यह है कि भाजपा के सबसे बड़े राष्ट्रीय चेहरों में शामिल जेपी नड्डा हिमाचल से आते हैं और लंबे समय तक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रह चुके हैं। इसके बावजूद नई टीम में प्रदेश को प्रमुख प्रतिनिधित्व न मिलना राजनीतिक रूप से चर्चा का विषय बन गया है।
राष्ट्रीय टीम के गठन से पहले हिमाचल से कई नामों को लेकर अटकलें लगाई जा रही थीं। सबसे ज्यादा चर्चा हमीरपुर से सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर की थी। माना जा रहा था कि संगठन में उनके लंबे अनुभव को देखते हुए उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जा सकती है। वहीं, पूर्व राज्यसभा सांसद इंदु गोस्वामी का नाम भी संभावित चेहरों में शामिल माना जा रहा था। लेकिन घोषित सूची में दोनों में से किसी को जगह नहीं मिली।

अनुराग सिंह ठाकुर भाजपा के उन नेताओं में शामिल हैं, जिनके पास संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर काम करने का लंबा अनुभव है। वह केंद्रीय मंत्री रहने के साथ भाजपा युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। ऐसे में राष्ट्रीय टीम में उन्हें महत्वपूर्ण भूमिका मिलने की चर्चा काफी समय से चल रही थी।
खासकर हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव करीब डेढ़ साल बाद होने हैं। ऐसे समय में अगर प्रदेश के किसी बड़े नेता को राष्ट्रीय संगठन में जिम्मेदारी मिलती तो उसका असर हिमाचल की चुनावी रणनीति पर भी पड़ सकता था। लेकिन फिलहाल नई टीम में अनुराग ठाकुर को कोई पद नहीं मिला है।

पूर्व राज्यसभा सांसद इंदु गोस्वामी को लेकर भी भाजपा के भीतर चर्चाएं थीं। महिला मोर्चा और संगठन में सक्रिय भूमिका निभा चुकी इंदु गोस्वामी को राष्ट्रीय संगठन में जिम्मेदारी मिलने की संभावना जताई जा रही थी। हालांकि नई सूची में उनका नाम भी नहीं है। इससे हिमाचल भाजपा के उन नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच सवाल उठने लगे हैं, जो राष्ट्रीय संगठन में प्रदेश की मजबूत मौजूदगी की उम्मीद कर रहे थे।
हिमाचल प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव लगभग डेढ़ वर्ष बाद होने हैं। प्रदेश भाजपा इस समय संगठन को मजबूत करने के साथ कांग्रेस सरकार के खिलाफ राजनीतिक मुद्दों को धार देने में जुटी है। ऐसे में राष्ट्रीय संगठन में हिमाचल के किसी बड़े नेता को जिम्मेदारी नहीं मिलना निश्चित तौर पर राजनीतिक चर्चा का विषय है।

हालांकि इसे सीधे तौर पर हिमाचल भाजपा के लिए झटका मानना जल्दबाजी होगी। भाजपा में राष्ट्रीय जिम्मेदारियां संगठन की जरूरत और केंद्रीय नेतृत्व की रणनीति के आधार पर तय होती हैं। संभव है कि आने वाले समय में संगठनात्मक फेरबदल के दौरान हिमाचल के नेताओं को कोई भूमिका दी जाए।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या राष्ट्रीय टीम में हिमाचल को जगह न मिलना महज संयोग है या आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा केंद्रीय नेतृत्व की कोई अलग रणनीति तैयार कर रहा है? आगामी महीनों में पार्टी की गतिविधियों और प्रदेश के नेताओं को मिलने वाली जिम्मेदारियों से इस तस्वीर के और साफ होने की उम्मीद है।