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November 30, 2025
हिमाचल में तंबाकू पर अब ‘टोटल लॉकडाउन’: सिगरेट-बीड़ी बेची तो सीधा चालान, जानें पूरी खबर
युवाओं को नशे से बचाने के लिए बड़ा अभियान शुरू
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शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में युवाओं के बीच बढ़ रही नशे की लत को देखते हुए जिला प्रशासन ने अब सख्त और व्यापक कदम उठाए हैं। जिला भर में ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं जहां युवा नशे की गिरफ्त में आने के बाद खुद को उससे बाहर नहीं निकाल पा रहे।
बतौर रिपोर्टर्स, इस गंभीर परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए शिमला के उपायुक्त अनुपम कश्यप ने नशामुक्ति और तंबाकू नियंत्रण के लिए एक बड़ा अभियान शुरू करने का ऐलान किया है।
इस अभियान के तहत दो महीनों तक स्कूलों, कॉलेजों, पंचायतों और शहरी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर जागरूकता गतिविधियां चलेंगी। लक्ष्य साफ है कि युवाओं में तंबाकू सेवन को रोकना और समाज में तंबाकू-मुक्त वातावरण तैयार करना है।
उपायुक्त ने बैठक के दौरान कहा कि तंबाकू केवल स्वास्थ्य को नुकसान नहीं पहुंचाता, बल्कि एक सामाजिक समस्या भी है। इसलिए इसे नियंत्रित करने के लिए सभी विभागों का एकजुट होकर काम करना अनिवार्य है। सभी तंबाकू नियंत्रण गतिविधियों का रिकॉर्ड राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम के पोर्टल पर डाला जाएगा, जिसकी मॉनिटरिंग सीधे भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा की जाएगी। बैठक में कोटपा अधिनियम 2003 के पालन की समीक्षा भी की गई और सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान निषेध नियमों को कड़ाई से लागू करने पर जोर दिया गया।
हिमाचल प्रदेश सरकार ने पूरे राज्य में तंबाकू उत्पादों की अनियमित बिक्री पर सख्ती दिखाने के लिए नई अधिसूचना जारी की है। इसके अनुसार, अब खुली सिगरेट, बीड़ी या अन्य तंबाकू उत्पाद बिना अनुमति बेचना अपराध माना जाएगा।
ग्रामीण क्षेत्रों में इसकी निगरानी का अधिकार पंचायत सचिव, जबकि शहरी क्षेत्रों में नगर निकायों के सचिव या कार्यकारी अधिकारी को दिया गया है। उपायुक्त अनुपम कश्यप ने साफ कहा कि अधिकारी अपने क्षेत्र में तंबाकू उत्पादों की बिक्री को नियंत्रित करने के लिए जिम्मेदार होंगे और नियमों के उल्लंघन पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।
हिमाचल सरकार ने इसे लागू करने के लिए “हिमाचल प्रदेश लूज सिगरेट एवं बीड़ी की बिक्री प्रतिबंध अधिनियम, 2016” को और प्रभावी बनाया है। अब कोई भी दुकान, ठेला या खोखा यदि तंबाकू बेचना चाहता है तो उसे पहले पंचायत या नगर निकाय से अनुमति पत्र लेना होगा। बिना अनुमति बिक्री करते पकड़े गए दुकानदारों पर सख्त दंड लगाया जाएगा।
अनुमति प्राप्त करने के लिए दुकानदार को लिखित में यह देना होगा कि, वह खुली सिगरेट या बीड़ी नहीं बेचेगा, किसी भी स्कूल, कॉलेज सहित शैक्षणिक संस्था से 100 मीटर के दायरे में तंबाकू उत्पादों की बिक्री नहीं करेगा और 18 वर्ष से कम आयु के किसी भी व्यक्ति को तंबाकू नहीं देगा। इसके साथ ही दुकान में अनिवार्य रूप से बोर्ड लगाना होगा- 18 वर्ष से कम आयु के व्यक्ति को तंबाकू बेचना दंडनीय अपराध है।
जिले में 30 गांवों को पूर्णत: तंबाकू-मुक्त बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए ग्रामीण स्तर पर एक कोऑर्डिनेशन कमेटी बनाई जाएगी जिसमें ग्रामीण प्रतिनिधि, स्थानीय जनप्रतिनिधि और विभिन्न विभागों के अधिकारी शामिल होंगे। हर गांव में एक तंबाकू एंबेसडर नियुक्त किया जाएगा, वह व्यक्ति जिसे गांव में सम्मान मिलता हो और लोग जिसकी बात मानते हों। यही टीम गांव में जागरूकता फैलाकर तंबाकू-मुक्त वातावरण तैयार करेगी। सभी मानक पूरे होने पर गांव को आधिकारिक रूप से “तंबाकू मुक्त” घोषित किया जाएगा।
अभियान शुरू होने के बाद जिले में कई गतिविधियां आयोजित की गई हैं जिसके तहत 2458 जागरूकता गतिविधियां पूरी की जा चुकी हैं। 639 शिक्षण संस्थानों को तंबाकू-मुक्त घोषित कर दिया गया है। 16 फ्लाइंग स्क्वाड बनाई गई हैं, जो लगातार निरीक्षण कर रही हैं। जिले के आधिकारिक सोशल मीडिया पर रोजाना औसतन 28 पोस्ट जागरूकता के लिए साझा की जा रही हैं। 14 ट्रेनिंग सेशन वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से आयोजित किए गए हैं।