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November 1, 2026

हिमाचल में बेसहारा बच्चों की दिवाली भी होगी हैप्पी, सुक्खू सरकार ने जारी किया उत्सव भत्ता

दिवाली और भैयादूज पर मिलेंगे 500-500 रुपए

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CM Sukhu Diwali gift

मंडी। दिवाली का त्योहार हर घर में खुशियों के दीप जलाता है। बाजारों में रौनक होती है, घरों में मिठाइयां बनती हैं और परिवार एक-दूसरे के साथ त्योहार की खुशियां बांटते हैं। लेकिन जिन बच्चों के सिर पर माता-पिता का साया नहीं है और जिनके पास परिवार का सहारा नहीं है, उनके लिए त्योहारों की खुशियां कई बार अधूरी रह जाती हैं। ऐसे बच्चों के चेहरों पर भी मुस्कान लाने की पहल हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार ने की है। मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना के तहत प्रदेश सरकार ने बेसहारा बच्चों के लिए उत्सव भत्ता जारी किया है, ताकि वे भी दिवाली और अन्य त्योहारों को पूरे उत्साह और सम्मान के साथ मना सकें।

सुक्खू सरकार ने जारी किया उत्सव भत्ता

मंडी जिले में इस योजना के तहत 791 बच्चों के लिए करीब 33 लाख रुपये का उत्सव भत्ता जारी किया गया है। प्रत्येक बच्चे को त्योहार के अवसर पर 500 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। दिवाली के मौके पर बच्चों को 500 रुपये दिए गए हैं, जबकि भैया दूज पर भी उन्हें 500 रुपये की राशि मिलेगी। यह सहायता उन बच्चों के लिए खास मायने रखती है, जिनके पास त्योहार के समय अपनी छोटी-छोटी जरूरतों और खुशियों को पूरा करने के लिए कोई पारिवारिक सहारा नहीं होता। सरकार की इस पहल से बेसहारा बच्चे भी मिठाई, नए कपड़े और त्योहार से जुड़ी दूसरी जरूरतों के लिए अपनी पसंद के अनुसार खर्च कर सकेंगे।

 

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बेसहारा बच्चों का भविष्य संवार रही सुक्खू सरकार

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश सरकार मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना को केवल आर्थिक मदद तक सीमित नहीं रख रही है, बल्कि इसके जरिए बेसहारा बच्चों के भविष्य को सुरक्षित बनाने का प्रयास किया जा रहा है। योजना के तहत बच्चों को शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण, स्वरोजगार, आवास और विवाह के लिए भी आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाई जा रही है। सरकार की सोच है कि जिन बच्चों ने जीवन में कम उम्र में ही अपनों का साथ खो दिया है, उन्हें आगे बढ़ने के लिए अवसर और सम्मानजनक जीवन जीने का मजबूत आधार मिलना चाहिए।

 

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मंडी में सुख-आश्रय योजना पर अब तक खर्च हुए करीब 13 करोड़ रुपये

मंडी जिले में इस योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2023-24, 2024-25, 2025-26 और 30 सितंबर 2026 तक कुल 12 करोड़ 94 लाख 74 हजार 392 रुपये खर्च किए जा चुके हैं। पूर्ण बेसहारा बच्चों को हर महीने 4,000 रुपये की सामाजिक सुरक्षा राशि दी जा रही है। इसके अलावा बाल एवं बालिका देखभाल संस्थानों में रहने वाले बच्चों को उनकी श्रेणी के अनुसार आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाई गई है। इस मद में मंडी जिले में 6.53 करोड़ रुपये से अधिक की राशि दी गई है, जबकि बच्चों के पोषण के लिए करीब 51 लाख रुपये का अनुदान जारी किया गया है।

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72 अनाथ बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए मदद

योजना के तहत बच्चों की पढ़ाई और भविष्य को भी प्राथमिकता दी जा रही है। उच्च शिक्षा हासिल करने वाले 72 पूर्ण अनाथ बच्चों को करीब 36 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई है। वहीं, व्यावसायिक प्रशिक्षण के लिए 50 बच्चों को 26 लाख रुपये से अधिक की मदद मिली है। इसका उद्देश्य बच्चों को केवल पढ़ाई तक सीमित न रखकर उन्हें रोजगार और आत्मनिर्भरता के योग्य बनाना है। स्वरोजगार शुरू करने के इच्छुक 23 बच्चों को भी 42.46 लाख रुपये की सहायता दी गई है, ताकि वे अपने पैरों पर खड़े होकर सम्मान के साथ जीवन आगे बढ़ा सकें।

 

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घर बसाने, आशियाना बनाने में मिली मदद

सुख-आश्रय योजना के तहत जरूरतमंद लाभार्थियों को घर बनाने और परिवार बसाने में भी मदद दी जा रही है। मंडी जिले में 65 लाभार्थियों को विवाह अनुदान के रूप में 1.29 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। वहीं, 108 पात्र लोगों को मकान निर्माण के लिए 2.10 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाई गई है। इसके अतिरिक्त तीन भूमिहीन लाभार्थियों को दो-दो बिस्वा भूमि आवंटित की गई है। कनैड क्षेत्र के गौरव ने घर निर्माण और विवाह के लिए मिली सहायता पर मुख्यमंत्री का आभार जताया है। सरकाघाट क्षेत्र के साहिल ने भी मकान बनाने के लिए अनुदान मिलने पर सरकार का धन्यवाद किया है।

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बेसहारा बच्चों को अवसर देना है योजना का उद्देश्य

उपायुक्त मंडी अपूर्व देवगन के अनुसार मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना का उद्देश्य अनाथ और बेसहारा बच्चों को शिक्षा, कौशल विकास, आवास तथा आजीविका के अवसरों से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि योजना के माध्यम से ऐसे बच्चों को समाज की मुख्यधारा में आगे बढ़ने और सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अवसर मिल रहा है।

बच्चों के चेहरों पर बड़ी मुस्कान

कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना उन बच्चों के लिए उम्मीद की किरण बन रही है, जिन्हें जीवन की शुरुआत में ही कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा है। दिवाली पर जारी उत्सव भत्ता भले ही राशि के लिहाज से छोटा हो, लेकिन इन बच्चों के लिए इसका भावनात्मक महत्व कहीं बड़ा है। त्योहारों की रौनक और खुशियों में उन्हें भी बराबर का हिस्सा देने की यह पहल बताती है कि सरकार की योजनाओं का उद्देश्य केवल आर्थिक आंकड़े बढ़ाना नहीं, बल्कि जरूरतमंदों के जीवन में खुशियां और आत्मविश्वास लाना भी है।

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