#विविध
April 24, 2026
"यू टर्न" की मास्टर बनी सुक्खू सरकार, एक और फैसले पर मारी पलटी; अब तक 13 बदले
किराया बढ़ोतरी से शिक्षा नीति तक बदले फैसले, अफसरशाही और जनविरोध बना वजह
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में सुक्खू सरकार के फैसलों को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। हालात ऐसे बनते जा रहे हैं कि सरकार को आए दिन अपने ही निर्णयों से पीछे हटना पड़ रहा है। कभी जनता के विरोध के चलते तो कभी अफसरशाही की कार्यशैली के कारण फैसले पलटने की नौबत आ रही है। ताजा घटनाक्रम में जहां एक दिन पहले ही हिमाचल भवन में आम लोगों के लिए बढ़ाए गए किराए को वापस लेना पड़ा, वहीं अब सरकार ने स्कूलों के मर्जर से जुड़ा अपना बड़ा फैसला भी बदल दिया है।
शिक्षा विभाग द्वारा जारी नई अधिसूचना के अनुसार प्रदेश के कई जिलों में पहले किए गए स्कूलों के विलय को रद्द कर दिया गया है। अब इन स्कूलों को दोबारा अलग-अलग संचालित किया जाएगा। यह फैसला कांगड़ा, मंडी और धर्मशाला सहित कई क्षेत्रों में लागू होगा] जहां पहले संसाधनों के बेहतर उपयोग के नाम पर स्कूलों को एकल सह-शिक्षा संस्थानों में बदला गया था।
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सरकार के नए निर्णय के तहत अब प्रत्येक स्थान पर दो अलग-अलग स्कूल चलेंगे। इनमें एक केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से संबद्ध सीनियर सेकेंडरी स्कूल होगा] जबकि दूसरा हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के अंतर्गत हाई स्कूल के रूप में संचालित किया जाएगा। दोनों ही संस्थान सह-शिक्षा प्रणाली के तहत काम करेंगे। स्कूलों के भवन और अन्य संसाधनों का निर्धारण शिक्षा विभाग द्वारा उपलब्ध आधारभूत ढांचे के अनुसार किया जाएगा।
इस फैसले के बाद छात्रों] अभिभावकों और शिक्षकों के बीच चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। कई क्षेत्रों में इसे राहत के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि मर्जर के बाद विद्यार्थियों को दूरी और प्रबंधन से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था।
हालांकि यह पहला मौका नहीं है जब सरकार को अपने ही फैसले से पीछे हटना पड़ा हो। हाल ही में सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा दिल्ली और चंडीगढ़ स्थित हिमाचल भवन-सदनों में आम लोगों के लिए किराया 1200 रुपये से बढ़ाकर 4000 रुपये करने का निर्णय लिया गया था, लेकिन सोशल मीडिया और जनविरोध के चलते सरकार को कुछ ही घंटों में यह फैसला वापस लेना पड़ा।
इसी तरह बिजली सब्सिडी, अधिकारियों की सैलरी डिफर करने, बाहरी राज्यों के वाहनों पर एंट्री टैक्स बढ़ाने और कर्मचारियों के ग्रेड-पे जैसे कई फैसलों में भी सरकार को यू-टर्न लेना पड़ा है। बार-बार हो रहे इन बदलावों ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इन फैसलों के पीछे कहीं न कहीं अफसरशाही की भूमिका भी अहम है। कई वरिष्ठ नेता भी इस मुद्दे पर खुलकर अपनी राय रख चुके हैं। विपक्ष ने तो सरकार को “पलटूराम” तक कहना शुरू कर दिया है, जबकि सत्तारूढ़ दल के भीतर भी असंतोष के स्वर सुनाई देने लगे हैं।