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January 21, 2026

सुक्खू सरकार का प्रदेश कर्मचारियों के लिए बड़ा झटका, अब पेंशन में नहीं जुड़ेगी अनुबंध सेवा

कर्मचारी संगठनों में इस फैसले को लेकर नाराजगी

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Contract Employees

शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने कर्मचारियों की पेंशन से जुड़े एक अहम मुद्दे पर अंतिम स्थिति स्पष्ट कर दी है। राज्य सरकार ने साफ कर दिया है कि अब पेंशन की गणना में कॉन्ट्रैक्ट यानी अनुबंध काल की सेवा को शामिल नहीं किया जाएगा। कर्मचारियों को पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभ केवल उसी अवधि के आधार पर मिलेंगे, जब उनकी नियुक्ति नियमित रूप से हुई हो। इस फैसले से हजारों कर्मचारियों को बड़ा झटका लगा है।

वित्त विभाग ने जारी किए लिखित निर्देश

इस संबंध में वित्त विभाग ने सभी जिला कोषाधिकारियों को लिखित निर्देश जारी कर दिए हैं। विशेष सचिव वित्त विजय वर्धन की ओर से जारी अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि हिमाचल प्रदेश भर्ती एवं सरकारी सेवाओं की शर्तें अधिनियम, 2024 लागू होने के बाद इस विषय पर कोई भ्रम की स्थिति नहीं रह गई है।

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विधि विभाग से ली गई थी विस्तृत कानूनी राय

वित्त विभाग ने बताया कि इस मामले में विधि विभाग से विस्तृत कानूनी राय ली गई थी। विधि विभाग ने अपनी राय में स्पष्ट किया कि केंद्रीय सिविल सेवा नियमों और हिमाचल प्रदेश सिविल सेवा नियमों के अनुसार पेंशन एक सेवा लाभ है, जो केवल नियमित रूप से नियुक्त कर्मचारियों को ही दिया जा सकता है। अनुबंध, आउटसोर्स या अस्थायी सेवा को पेंशन योग्य सेवा नहीं माना जा सकता।

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पुनः परीक्षण के लिए लौटाने के आदेश

सरकार ने सभी जिला कोषाधिकारियों को यह भी निर्देश दिए हैं कि जिन मामलों में कॉन्ट्रैक्ट अवधि को पेंशन में जोड़ने से संबंधित दावे लंबित हैं, उनकी नए अधिनियम के प्रावधानों के तहत दोबारा जांच की जाए। ऐसे सभी मामलों को संबंधित विभागों को पुनः परीक्षण के लिए लौटाने के आदेश दिए गए हैं।

अधिनियम की धारा-6 का हवाला

आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि अधिनियम की धारा-6 के तहत केवल नियमित सेवा अवधि ही पेंशन के लिए मान्य होगी। इससे पहले कई कर्मचारी वर्षों तक कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने के बाद नियमित हुए थे और उन्हें उम्मीद थी कि उनकी पूरी सेवा अवधि को पेंशन में जोड़ा जाएगा। अब सरकार के इस फैसले से उनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया है।

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कर्मचारी संगठनों में इस फैसले को लेकर नाराजगी

सरकारी सूत्रों के अनुसार इस निर्णय का सीधा असर हजारों कर्मचारियों पर पड़ेगा। कर्मचारी संगठनों में इस फैसले को लेकर नाराजगी भी देखी जा रही है और आने वाले समय में इस मुद्दे पर विरोध या मांगें तेज होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।

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