#विविध
February 3, 2026
हिमाचल की नाराजगी पर केंद्र का तोहफा : 27 गुणा बढ़ा दिया बजट- रेल मंत्री का ऐलान
कई परियोजनाएं राज्य सरकार की हिस्सेदारी और अन्य प्रक्रियाओं के कारण रफ्तार नहीं पकड़ पा रही हैं
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शिमला। केंद्रीय बजट 2026 को लेकर हिमाचल प्रदेश की सियासत गरमा गई है। एक ओर जहां कांग्रेस सरकार केंद्र पर हिमाचल की अनदेखी का गंभीर आरोप लगा रही है, वहीं दूसरी ओर केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इन आरोपों पर बड़ा पलटवार करते हुए चौंकाने वाला खुलासा किया है।
रेल मंत्री ने दावा किया कि केंद्र सरकार ने हिमाचल के रेल प्रोजेक्टों के लिए बजट में 27 गुना बढ़ोतरी की है। इतना ही नहीं, वैष्णव ने प्रदेश सरकार पर भी सवाल खड़े करते हुए कहा कि राज्य की ओर से समय पर हिस्सेदारी न मिलने के कारण कई केंद्रीय परियोजनाएं रफ्तार पकड़ने में पिछड़ रही हैं।
बता दें कि हिमाचल प्रदेश का कालका-शिमला विश्व धरोहर रेल मार्ग न केवल हिमाचल प्रदेश बल्कि पूरे देश की पहचान बन चुका है। इस ऐतिहासिक रेल सेक्शन पर हर साल देश ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी हजारों पर्यटक सैर-सपाटे के लिए पहुंचते हैं। इसी वजह से भारतीय रेलवे का हिमाचल प्रदेश पर विशेष फोकस बना हुआ है।
बावजूद इसके, राज्य में प्रस्तावित और स्वीकृत कई अहम रेल परियोजनाएं धीमी रफ्तार से चल रही हैं या पूरी तरह अटकी हुई हैं। वहीं, अब कालका-शिमला विश्व धरोहर रेल मार्ग से लेकर औद्योगिक बद्दी बेल्ट तक हिमाचल प्रदेश की नाराजगी के बीच केंद्र सरकार ने राज्य को बड़ा रेल तोहफा दिया है।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने ऐलान किया है कि 2009-14 की तुलना में हिमाचल के लिए रेल बजट में 27 गुना बढ़ोतरी की गई है। पहले जहां राज्य को औसतन 108 करोड़ रुपये मिलते थे, वहीं अब यह राशि बढ़कर करीब 2,911 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष हो गई है। इसके बावजूद कई अहम रेल परियोजनाओं के अटके रहने पर केंद्र ने राज्य सरकार के सहयोग पर सवाल भी खड़े किए हैं।
रेल मंत्री के अनुसार, हिमाचल प्रदेश का कुछ हिस्सा अंबाला रेल मंडल के अंतर्गत आता है। इसी मंडल के अधीन शिमला रेलवे स्टेशन भी आता है- जिसे अमृत भारत स्टेशन योजना में शामिल किया गया है। इसके तहत स्टेशन के आधुनिकीकरण, यात्री सुविधाओं और पर्यटन को बढ़ावा देने पर काम किया जा रहा है।
रेलवे की ओर से बताया गया कि हिमाचल प्रदेश में इस समय करीब 17,711 करोड़ रुपये की लागत वाले रेल प्रोजेक्टों पर काम चल रहा है। इनमें नई रेल लाइनें, ब्राडगेज परिवर्तन, सुरंगें और पुल शामिल हैं। हालांकि, इनमें से कई परियोजनाएं राज्य सरकार की हिस्सेदारी, भूमि अधिग्रहण और अन्य प्रक्रियाओं के कारण अपेक्षित गति नहीं पकड़ पा रही हैं।
चंडीगढ़ से बद्दी को जोड़ने वाली रेल लाइन को औद्योगिक और आर्थिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है। इस रेल लाइन के शुरू होने से बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ औद्योगिक क्षेत्र को सीधा रेल संपर्क मिलेगा, जिससे कारोबार, निवेश और रोजगार के नए अवसर खुल सकते हैं। बावजूद इसके, यह प्रोजेक्ट लंबे समय से धीमी चाल से चल रहा है।
रेल मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि राज्य सरकार समय पर सहयोग करे, तो यह परियोजना न केवल उद्योगों बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए भी फायदेमंद साबित हो सकती है। हिमाचल में सिर्फ चंडीगढ़-बद्दी ही नहीं, बल्कि तीन अन्य अहम रेल परियोजनाएं भी अटकी हुई हैं।
भानुपल्ली-बिलासपुर-बेरी रेल लाइन को वर्ष 2008-09 में मंजूरी मिली थी। यह 63.10 किलोमीटर लंबी परियोजना है। इसके लिए कुल 124 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता है, लेकिन अब तक केवल 82 हेक्टेयर भूमि का ही अधिग्रहण हो पाया है। राज्य सरकार की हिस्सेदारी न मिलने के कारण यह प्रोजेक्ट धीमी गति से आगे बढ़ रहा है।
बिलासपुर-मनाली-लेह रेल लाइन को सामरिक दृष्टि से बेहद खास माना जा रहा है। यह लगभग 489 किलोमीटर लंबी रणनीतिक रेल लाइन है- जो सीमावर्ती क्षेत्रों तक बेहतर संपर्क सुनिश्चित कर सकती है। हालांकि, इस परियोजना पर भी अभी अपेक्षित प्रगति नहीं हो सकी है।
वहीं, पठानकोट-जोगिंद्र नगर कांगड़ा घाटी रेलवे को ब्राडगेज में बदलने की 195 किलोमीटर लंबी योजना पर काम शुरू किया गया है। इस परियोजना पर करीब 30 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं, जिसके तहत सात सुरंगों और कई नए पुलों का निर्माण प्रस्तावित है।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि केंद्र सरकार का लक्ष्य भारतीय रेलवे को तेज, सुरक्षित, आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल परिवहन प्रणाली के रूप में विकसित करना है। रिकॉर्ड बजट, नई तकनीक और मेगा परियोजनाओं के जरिए रेलवे विकसित भारत के विजन को साकार करने में अहम भूमिका निभा रहा है। इस अवसर पर उत्तर रेलवे मंडल कार्यालय में आयोजित वर्चुअल कांफ्रेंस में मंडल रेल प्रबंधक विनोद भाटिया और सीनियर DSM नवीन कुमार झा भी उपस्थित रहे।
रेल मंत्री के तेवर साफ संकेत दे रहे हैं कि अगर राज्य सरकार समय रहते सहयोग नहीं करती, तो हिमाचल को रेल विकास के बड़े अवसर गंवाने पड़ सकते हैं। पर्यटन, उद्योग और सामरिक सुरक्षा के लिहाज से ये परियोजनाएं राज्य के भविष्य के लिए बेहद अहम मानी जा रही हैं।