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February 16, 2026
हिमाचल में नशा तस्करों की राजनीति पर ब्रेक- पंचायती चुनाव नहीं लड़ पाएंगे, नए नियम बना रही सरकार
बजट सत्र में आएगा नया कानून
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शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार अब उन लोगों के लिए सख्ती करने जा रही है, जो चिट्टा तस्करी में पकड़े गए हैं। इन लोगों को अब पंचायत चुनाव लड़ने से रोका जा सकता है। इसके लिए सरकार ने विधि विभाग के साथ विचार-विमर्श किया और इस संबंध में एक नया ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। जिसमें कुछ विशेष नियम बताए गए है।
सुप्रीम कोर्ट ने 31 मई से पूर्व स्थानीय निकाय चुनावों को करवाने के निर्देश दिए हैं। ऐसे में इन चुनाव से पूर्व इस तरह का प्रविधान करने जा रहे हैं। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, पहले इस प्रस्ताव को मंत्रिमंडल की मंजूरी दी जाएगी। उसके बाद इसे विधानसभा के बजट सत्र में कानून के रूप में पेश किया जाएगा।
सरकार का कहना है कि जो लोग नशे के कारोबार में शामिल हैं, उन्हें राजनीति और जनप्रतिनिधि बनने का मौका नहीं मिलना चाहिए। अगर ऐसे लोग चुनाव लड़ते हैं, तो समाज में गलत संदेश जाता है। इसलिए सरकार चाहती है कि साफ छवि वाले लोग ही जनता का प्रतिनिधित्व करें।
पिछले कुछ सालों में हिमाचल में चिट्टे के मामले काफी बढ़ गए हैं, जिससे लोगों की चिंता भी बढ़ी है। सरकार पहले से ही नशा बेचने वालों के खिलाफ सख्त अभियान चला रही है। पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है, गिरफ्तारियां हो रही हैं और उनकी अवैध संपत्ति भी जब्त की जा रही है।
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अब सरकार चुनाव लड़ने पर रोक लगाने की तैयारी कर रही है। माना जा रहा है कि इससे नशे के पूरे नेटवर्क पर बड़ा असर पड़ेगा और इस कारोबार में लगे लोगों को कड़ा संदेश जाएगा। साथ सरकार का कहना है कि इस फैसले से युवाओं को नशे की लत से बचाने में मदद मिलेगी। साथ ही राजनीति भी साफ-सुथरी बनेगी, क्योंकि गलत कामों में शामिल लोगों को चुनाव लड़ने का मौका नहीं मिलेगा।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि सरकार प्रदेश से नशे को जड़ से खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि बजट सत्र के दौरान संशोधन विधेयक लाया जाएगा, ताकि चिट्टा तस्कर स्थानीय निकाय चुनाव न लड़ सकें। मंत्री ने कहा कि राजनीति को स्वच्छ और पारदर्शी बनाए रखने के लिए यह जरूरी है कि आपराधिक गतिविधियों में शामिल लोग जनप्रतिनिधि न बनें।