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December 23, 2025
बर्फबारी की आस में हिमाचल पहुंच रहे पर्यटक हुए मायूस, जानें कब बरसेगी सफेद चांदी
न्यूनतम तापमान से सामान्य हो रहा मौसम
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में इस समय मौसम का मिजाज पूरी तरह बदला हुआ नजर आ रहा है। कड़ाके की ठंड के लिए पहचाने जाने वाले प्रदेश में दिसंबर के अंतिम सप्ताह में असामान्य गर्माहट दर्ज की जा रही है। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश के अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में 28 दिसंबर को एक बार फिर बर्फबारी के आसार बन रहे हैं, साथ ही घने कोहरे का अलर्ट जारी किया है। हिमाचल में नए साल की बर्फबारी की उम्मीद लेकर शिमला पहुंचे सैलानी मायूस लौट रहे हैं, और उनके साथ ही टूट रही है उन लोगों की उम्मीद, जिनकी रोज़ी-रोटी पर्यटन से जुड़ी है।
बता दें कि मौसम विभाग ने अगले पांच दिनों तक आसान पूरी तरह साफ रहने की संभावना जताई गई है। इस दौरान प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में तापमान सामान्य से काफी अधिक बना रहेगा। खास बात यह है कि नाहन शहर को छोड़कर प्रदेश के लगभग सभी इलाकों में न्यूनतम तापमान सामान्य से ऊपर दर्ज किया गया है। इससे न केवल ठंड का असर कम हुआ है, बल्कि लोगों को दिन और रात दोनों समय अपेक्षाकृत गर्म मौसम का सामना करना पड़ रहा है।
मौसम विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश का औसत न्यूनतम तापमान सामान्य से 3.5 डिग्री सेल्सियस अधिक हो गया है। कई शहरों में यह बढ़ोतरी और भी ज्यादा दर्ज की गई है। कुछ स्थानों पर तो तापमान सामान्य से 7 डिग्री तक अधिक रिकॉर्ड किया गया है, जो इस मौसम में असामान्य माना जा रहा है।
प्रदेश में केवल न्यूनतम ही नहीं, बल्कि औसत अधिकतम तापमान भी सामान्य से 4.4 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया है। दिन में तेज धूप के कारण तापमान तेजी से बढ़ रहा है। वहीं, कई शहरों में रात का तापमान भी बढ़ गया है, जिससे ठंड का असर पहले जैसा महसूस नहीं हो रहा है।
दिसंबर महीने में अब तक दो से तीन बार पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हुए, लेकिन वे कमजोर रहे। इसी वजह से उनका असर सीमित रहा और हिमाचल प्रदेश के ऊंचाई वाले इलाकों लाहौल-स्पीति, चंबा, कांगड़ा और कुल्लू में ही कुछ स्थानों पर हल्की बर्फबारी देखने को मिली।
उधर, शिमला और आसपास के इलाकों में समय पर बर्फबारी न होने से पर्यटन और बागवानी से जुड़े लोगों को नुकसान हो रहा है। पर्यटक कम आ रहे हैं, जिससे होटल और टैक्सी कारोबार प्रभावित है। टैक्सी यूनियन का कहना है कि बर्फ न पड़ने से कुफरी, चायल और नारकंडा जैसे इलाकों के लिए काम लगभग बंद हो गया है और सर्दियों का सीजन पहले जैसा नहीं रहा।
मौसम में आई इस असामान्य गर्माहट ने किसानों और बागवानों की चिंता बढ़ा दी है। सेब सहित अन्य फसलों को पर्याप्त ठंड और चिलिंग आवर्स की जरूरत होती है, जो इस तरह के मौसम में प्रभावित हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लंबे समय तक यही स्थिति बनी रही तो इसका असर आगामी फसल पर पड़ सकता है।
हालांकि मौसम विभाग का कहना है कि 28 दिसंबर के बाद पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी और निचले इलाकों में बारिश हो सकती है। इससे तापमान में गिरावट आने की संभावना है और ठंड एक बार फिर जोर पकड़ सकती है। फिलहाल प्रदेश में साफ मौसम और बढ़ते तापमान ने लोगों को राहत तो दी है, लेकिन बदलते मौसम के इस रुख को लेकर विशेषज्ञ सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं।