कांगड़ा। देवभूमि कहलाए जाने वाला हिमाचल प्रदेश में बहुत सारे प्राचीन और महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल हैं। कई बार आपने मंदिर में एक गर्भगृह में अगल-बगल में भगवान शिव के दो लिंगस्वरूपों को स्थापित किए हुए देखा होगा। मगर क्या आपको पता है एक मंदिर ऐसा भी हैं, जहां शिवलिंग अर्धनारीश्वर रूप में स्थापित है।
दो भागों में बंटा है शिवलिंग
यह अनोखा शिवलिंग हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिला में काठगढ़ महादेव मंदिर में स्थापित है। मंदिर में शिव-पार्वती के रूप में बंटे दो शिवलिंग स्थापित हैं। जिनके बीच की दूरी समय-समय पर घटती-बढ़ती रहती है।
यह भी पढ़ें: अंकू, विनय, अंकित, अतुल और विशाल ने ली थी सचिन की जान! पांचो हुए अरेस्ट
ऐसे हुआ मंदिर का निर्माण
मान्यताओं के अनुसार, काठगढ़ महादेव मंदिर का निर्माण सबसे पहले सिकंदर ने करवाया था। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब सिकंदर अपने साम्राज्य का विस्तार कर रहा था तो वह उस समय हिमाचल के अर्धनारीश्वर महादेव मंदिर के पास पहुंचा। इस दौरान उसने एक फकीर को शिवलिंग की पूजा करते हुए देखा।
हैरान रह गया सिकंदर
महादेव के दो लिंग स्वरूपों के बीच घटती-बढ़ती दूरी को देखकर वह हैरान रह गया। इस अनोखे शिवलिंग से को देखकर सिकंदर काफी प्रभावित हो गया और उसने मंदिर बनाने का निर्णय लिया। सिकंदर ने टीले पर मंदिर बनाने के लिए यहां की भूमि को समतल करवाया।
यह भी पढ़ें: कच्चे मकान में रहती थी महिला तस्कर: पास से मिली 1 किलो 2 ग्राम अफीम
घटती-बढ़ती है शिवलिंग की दूरी
इस मंदिर को दुनिया का एकमात्र ऐसा मंदिर माना जाता है। जहां शिवलिंग दो भागों में बंटा हुआ है। कहा जाता है कि ग्रहों और नक्षत्रों के परिवर्तन के अनुसार, शिवलिंग के दोनों भागों के बीच का अंतर कम-ज्यादा होता रहता है। मगर शिवरात्रि पर दोनों भाग मिल जाते हैं।
काले-बूरे रंग का है शिवलिंग
गर्मियों के मौसम में यह स्वरूप दो भागों में बंट जाता है और सर्दियों में फिर से एक रूप धारण कर लेता है। यह शिवलिंग काले-भूरे रंग का है। शिव रूप से पूजे जाने वाले शिवलिंग की ऊंचाई लगभग 7-8 फीट और पार्वती रूप में पूजे जाने वाले शिवलिंग की ऊंचाई लगभग 5-6 फीट है।
यह भी पढ़ें: शांता कुमार बोले- BJP में अहंकार आ गया था, लोकसभा में टूट गया: देहरा पर भी दिया बयान
उमड़ती हैं सैकड़ों भक्तों की भीड़
बता दें कि हर साल शिवरात्रि के त्योहार पर यहां तीन दिन मेला लगता है। शिवलिंग के दर्शन करने के लिए लोगों की काफी भीड़ उमड़ती है। सावन महीने में भी मंदिर में भक्तों का तांता लगा रहता है।