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October 31, 2026
कबड्डी खिलाड़ी भावना ठाकुर इनामी राशि से अपने किसान माता-पिता के लिए बनाएगी नया घर, मिले एक करोड़
हिमाचल के 419 खिलाड़ियों पर सुक्खू सरकार ने बरसाया करोड़ों का इनाम
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शिमला। कहते हैं कि जब सपने बड़े हों और हौसले बुलंद हों तो मुश्किल से मुश्किल हालात भी रास्ता नहीं रोक सकते। हिमाचल प्रदेश की एक ऐसी ही बेटी ने अपने संघर्ष, मेहनत और खेल प्रतिभा के दम पर न केवल देश का नाम रोशन किया, बल्कि अपने माता-पिता के उस संघर्ष को भी सम्मान दिलाया है, जिन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद बेटी के सपनों को कभी टूटने नहीं दिया। हम बात कर रहे हैं भारतीय महिला कबड्डी टीम की खिलाड़ी भावना ठाकुर की, जिन्हें एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने पर एक करोड़ चार लाख रुपए की पुरस्कार राशि मिली है। अब भावना इस इनामी राशि से अपने माता-पिता के लिए एक नया घर बनाना चाहती हैं।
हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में देवभूमि का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ियों को करोड़ों रुपये की पुरस्कार राशि देकर सम्मानित किया है। राजधानी शिमला के ऐतिहासिक होटल पीटरहॉफ में आयोजित 'हिमरत्न' राज्यस्तरीय खेल सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कुल 419 खिलाड़ियों को 17 करोड़ 85 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि वितरित की। प्रदेश में खिलाड़ियों को सम्मानित करने के लिए आयोजित यह एक बड़ा समारोह रहा, जिसमें खिलाड़ियों की मेहनत और उपलब्धियों को आर्थिक सम्मान दिया गया।
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करोड़ों रुपये की पुरस्कार राशि पाने वाली भावना ठाकुर की सफलता की कहानी जितनी शानदार है, उनका पारिवारिक संघर्ष उतना ही भावुक कर देने वाला है। भावना चार भाई-बहनों में सबसे छोटी हैं और उनका संबंध एक साधारण किसान परिवार से है। उनके पिता खेतीबाड़ी करके परिवार का पालन-पोषण करते हैं, लेकिन घर की जरूरतों को पूरा करने के लिए उन्हें दिहाड़ी मजदूरी भी करनी पड़ती रही है। परिवार की आर्थिक स्थिति हमेशा मजबूत नहीं रही, लेकिन इन मुश्किलों के बीच भी भावना ने खेल के मैदान में आगे बढ़ने का सपना देखना नहीं छोड़ा।
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भावना के लिए खेल में आगे बढ़ने का सफर आसान नहीं था। परिवार में आर्थिक तंगी के कारण कई बार जरूरी संसाधनों और खर्चों का इंतजाम करना मुश्किल होता था। इसके बावजूद जब भी भावना को खेल के लिए किसी चीज की जरूरत पड़ी, उनके माता-पिता ने अपनी सामर्थ्य के अनुसार किसी न किसी तरह उसका इंतजाम किया। पिता ने खेतों में मेहनत करने के साथ दिहाड़ी मजदूरी की, लेकिन बेटी के हौसलों को कभी कमजोर नहीं पड़ने दिया। माता-पिता के इसी भरोसे और सहयोग ने भावना को आज इस मुकाम तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है।
अब जब भावना ठाकुर ने अपनी मेहनत के दम पर एक करोड़ चार लाख रुपए की पुरस्कार राशि हासिल की है तो उनके मन में सबसे पहला ख्याल अपने माता-पिता का आया है। भावना इस पैसे से अपने माता-पिता के लिए एक नया घर बनाना चाहती हैं। जिन माता-पिता ने अपनी जरूरतों को पीछे रखकर बेटी के खेल और उसके सपनों को पूरा करने के लिए हर संभव प्रयास किया, अब भावना उनके लिए एक सुरक्षित और खूबसूरत आशियाना तैयार करना चाहती हैं। उनके लिए यह एक करोड़ रुपये केवल खेल में मिली सफलता का इनाम नहीं, बल्कि माता-पिता के वर्षों के त्याग और मेहनत का सम्मान भी है।
भावना की यह इच्छा बताती है कि बड़ी सफलता हासिल करने के बाद भी उनके लिए परिवार और माता-पिता का स्थान सबसे ऊपर है। जिस परिवार ने आर्थिक तंगी के बावजूद उनकी प्रतिभा पर भरोसा किया, अब उसी परिवार की खुशियों के लिए भावना अपने इनाम का इस्तेमाल करना चाहती हैं। उनकी यह कहानी उन तमाम बेटियों और युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। भावना ने साबित कर दिया है कि हालात चाहे कितने भी कठिन क्यों न हों, मेहनत और परिवार का साथ मिल जाए तो सपनों को हकीकत में बदला जा सकता है।
इस समारोह में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश का नाम चमकाने वाले 51 खिलाड़ियों को 13 करोड़ 55 लाख रुपये की पुरस्कार राशि दी गई, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 368 खिलाड़ियों को 4 करोड़ 30 लाख रुपये से सम्मानित किया गया। सरकार का उद्देश्य खिलाड़ियों को आर्थिक प्रोत्साहन देने के साथ-साथ प्रदेश में खेल संस्कृति को बढ़ावा देना और नई प्रतिभाओं को आगे लाना है। इस सम्मान समारोह में कई ऐसे खिलाड़ियों को करोड़ों रुपये के पुरस्कार मिले, जिनकी सफलता के पीछे वर्षों का कठिन परिश्रम और संघर्ष छिपा है।
समारोह में मैराथन में रजत पदक जीतने वाले हिमाचली धावक सावन बरवाल को सबसे अधिक 2 करोड़ 64 लाख रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की गई। उनकी अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि को देखते हुए सरकार ने उन्हें यह बड़ी सम्मान राशि दी है। वहीं भारतीय महिला क्रिकेट टीम की तेज गेंदबाज और विश्व कप विजेता टीम की सदस्य रेणुका सिंह ठाकुर को 2 करोड़ 20 लाख रुपये का पुरस्कार दिया गया। उनकी अनुपस्थिति में उनकी मां ने यह सम्मान प्राप्त किया।
भावना ठाकुर की कहानी सिर्फ एक करोड़ रुपये के इनाम या एशियाई खेलों में जीते गए स्वर्ण पदक तक सीमित नहीं है। यह उस बेटी की कहानी है, जिसने अपने माता-पिता को खेतों में मेहनत करते और परिवार की जरूरतों के लिए संघर्ष करते देखा है। आज वही बेटी अपनी मेहनत से मिली सफलता के जरिए उनके जीवन में खुशियां लाना चाहती है। कबड्डी के मैदान में देश के लिए गोल्ड जीतने वाली भावना अब अपने माता-पिता को उनके सपनों का घर देने की तैयारी में हैं। यही उनकी सबसे बड़ी जीत और उनके संघर्ष की सबसे खूबसूरत तस्वीर है।
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने समारोह में कहा कि सरकार खिलाड़ियों की मेहनत और उपलब्धियों को उचित सम्मान देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि पहले एशियाई खेलों में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को करीब 50 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि मिलती थी, जिसे मौजूदा सरकार ने बढ़ाकर 10 गुना तक कर दिया है। सरकार की ओर से खिलाड़ियों को आर्थिक पुरस्कार देने के साथ रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाने पर भी जोर दिया जा रहा है। प्रदेश में सरकारी नौकरियों में खिलाड़ियों के लिए तीन प्रतिशत खेल कोटे का प्रावधान है।