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May 5, 2026
हिमाचल में होगा अब तक का सबसे बड़ा फेरबदल, सुक्खू सरकार 10 हजार शिक्षकों के करेगी तबादले
सीबीएसई स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति के चलते होगा बड़ा फेरबदल
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में चुनावी सरगर्मियों के बीच सुक्खू सरकार शिक्षा विभाग में अब तक के सबसे बड़े फेरबदल की पटकथा लिख चुकी है। विभाग में बड़े स्तर पर शिक्षकों के तबादलों की तैयारी पूरी कर ली गई है] जिसे लेकर शिक्षकों के बीच हड़कंप मचा हुआ है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली सरकार शिक्षा विभाग के ढांचे को नया स्वरूप देने के लिए शिक्षकों को ताश के पत्तों की तरह फेंटने को तैयार है।
इस बड़े फेरबदल की मुख्य वजह केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) से संबद्ध किए गए 151 सरकारी स्कूल हैं। इन स्कूलों में नई व्यवस्था के तहत शिक्षकों की नियुक्ति अनिवार्य हो गई है। मंगलवार से इन स्कूलों में शिक्षकों को सब कैडर में शामिल करने के लिए काउंसलिंग की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जैसे ही विभाग इन शिक्षकों को स्टेशन अलॉट कर देगा, उसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग से अनुमति मांगी जाएगी और फिर तबादलों का सिलसिला शुरू होगा।
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सूत्रों के मुताबिक, इस पूरी प्रक्रिया के दौरान प्रदेश भर में करीब 8 से 10 हजार शिक्षकों का इधर-उधर होना तय माना जा रहा है। इसमें किसी एक श्रेणी को नहीं, बल्कि प्रधानाचार्य, प्रवक्ता, टीजीटी, सीएंडवी, जेबीटी, पीइटी और डीपीई सहित लगभग सभी श्रेणियों के शिक्षकों को शामिल किया गया है। गौर करने वाली बात यह है कि विभाग ने इस साल 1 अप्रैल से सामान्य तबादलों पर से प्रतिबंध नहीं हटाया था, क्योंकि सरकार पहले ही सीबीएसई स्कूलों की नियुक्तियों और इस बड़े फेरबदल की रणनीति बना चुकी थी।
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इस नई नीति का सबसे ज्यादा असर उन शिक्षकों पर पड़ेगा जो वर्षों से राजधानी शिमला और अन्य शहरी क्षेत्रों के पसंदीदा स्कूलों में कुंडली मारकर बैठे हैं। विभाग ने साफ कर दिया है कि जिन शिक्षकों ने स्क्रीनिंग टेस्ट नहीं दिया है या जो सीबीएसई संबद्ध स्कूलों के मानकों पर खरे नहीं उतर रहे, उन्हें अब उन दुर्गम या ग्रामीण क्षेत्रों में भेजा जाएगा जहां शिक्षकों की भारी कमी है। इससे शिक्षा विभाग में लंबे समय से चले आ रहे 'शहर प्रेम' के संतुलन को ठीक करने की कोशिश की जाएगी।
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विभागीय अधिकारियों का तर्क है कि इस सर्जरी से प्रदेश की शैक्षणिक गुणवत्ता में बड़ा सुधार आएगा। जहां एक तरफ सीबीएसई स्कूलों को आधुनिक मानकों के शिक्षक मिलेंगे, वहीं दूसरी तरफ अतिरिक्त और स्क्रीनिंग से बाहर रहे शिक्षकों को उन स्कूलों में समायोजित किया जाएगा जहां पद खाली चल रहे हैं। हालांकि, विभाग के पास तबादलों के लिए पहले से ही सिफारिशी डीओ (DO) नोट्स का अंबार लगा हुआ है, लेकिन प्राथमिकता सीबीएसई स्कूलों की प्रक्रिया को पूरी करने की दी जा रही है। अब देखना यह होगा कि चुनावी मौसम में सरकार का यह 'शिक्षक फेरबदल' राजनीतिक गलियारों में कितनी गर्माहट पैदा करता है।