#विविध
November 30, 2025
हिमाचल में कुत्तों का कहर : 3 लाख से ज्यादा लोग नोचे, 11 को हुआ रेबीज- नहीं बच पाए बेचारे
जगह-जगह घूम रहे कुत्तों के झुंड- लोगो में डर का माहौल
शेयर करें:

शिमला। हिमाचल प्रदेश जैसे छोटे पहाड़ी राज्य में आवारा कुत्तों की समस्या अब गंभीर रूप ले चुकी है। पिछले कुछ वर्षों में इनकी संख्या इतनी तेजी से बढ़ी है कि अब लगभग हर शहर, कस्बे, यहां तक कि गांवों में भी कुत्तों के झुंड बन गए हैं।
सुबह ऑफिस जाने वाले लोग हों या देर शाम दुकानें बंद कर लौटते स्थानीय निवासी-हर कोई कुत्तों के झुंडों से परेशान है। राज्य के कई जिलों में ऐसी घटनाएं सामने आई हैं जहां आवारा कुत्तों के हमले से लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
कई मामलों में बच्चे और बुजुर्ग ज्यादा निशाना बन रहे हैं क्योंकि वे खुद को बचाने में सक्षम नहीं होते। अस्पतालों में रोज़ाना डॉग बाइट के कई केस पहुंच रहे हैं। कई बार हालत इतनी गंभीर हो जाती है कि मरीजों को लंबा इलाज करवाना पड़ता है।
कुछ जगहों पर तो हालात इतने बिगड़ गए हैं कि कुत्तों के झुंड लोगों का पीछा करने लगते हैं, बाइक सवारों को गिरा देते हैं और रास्तों पर भय का माहौल बनाते हैं। कई मामलों में कुत्तों द्वारा काटने के बाद संक्रमण के चलते गंभीर जटिलताएं पैदा हुई हैं और दुर्भाग्यवश कुछ लोगों की मौतें भी सामने आई हैं।
हाल ही में हिमाचल प्रदेश में कुत्तों के काटने से जान गंवाने वाले और अस्पताल पहुंचे लोगों का पिछले तीन साल का आंकड़ा सामने आया है। इसमें पाया गया कि पिछले तीन साल से लेकर 31 अक्टूबर तक प्रदेश में कुत्तों ने 3 लाख से ज्यादा लोगों को काटा है।
कुत्तों के काटने के कारण 3,26,170 लोग अस्पताल पहुंचे हैं। ये बेहद चिंताजनक बात है कि इस लाइलाज रेबीज के कारण 11 लोगों की मौत भी हुई है। ये आंकड़ा सामने आने के बाद हिमाचल के लोगों में डर और चिंता का माहौल है।
आपको बता दें कि हिमाचल विधानसभा सत्र में गगरेट के कांग्रेस विधायक राकेश कालिया ने राज्य में तीन साल की अवधि में रेबीज से हुई लोगों की मौत कात्री ब्यौरा पूछा था। जिसका जवाब स्वास्थ मंत्री ने दिया- जिससे अब ये आंकड़े सामने आए हैं।
कुत्तों के हमले से सबसे ज्यादा मामले कांगड़ा जिले से सामने आया है। यहां देखें किस जिले से कितने केस सामने आए हैं-
आपको बता दें कि हिमाचल प्रदेश के महामारी विशेषज्ञ डॉ. ओमेश भारती ने रेबीज की रोकथाम का एक आसान और सस्ता हल निकाला है- रेबीज का टीका। रेबीज की रोकथाम को लगाए जाने वाला टीका निशुल्क लगाया जाता है। उनके इस उपाय को पद्माश्री अवार्ड से भी सम्मानित किया गया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि आखिर आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रित क्यों नहीं हो पा रही। कई नगर परिषदें और पंचायतें नसबंदी अभियान चलाने का दावा तो करती हैं, लेकिन जमीन पर इसकी रफ्तार बेहद धीमी है। पर्यटक क्षेत्रों में भी यह समस्या तेजी से बढ़ रही है-जहां कुत्तों के झुंड होटलों, ढाबों और बाज़ारों में खाने की तलाश में घूमते रहते हैं और कई बार आक्रामक भी हो जाते हैं।
विद्यालयों के आसपास भी अभिभावकों में डर का माहौल है। सुबह के समय बच्चे स्कूल जा रहे हों, और रास्ते में 8–10 कुत्तों का झुंड अचानक भौंकता हुआ सामने आ जाए-यह दृश्य अब हिमाचल में आम हो चुका है। इससे बच्चों के मन में डर बैठ रहा है, और कई जगह स्कूलों ने बच्चों को समूह में चलने की सलाह तक दी है।
लोगों की मांग है कि सरकार और स्थानीय निकाय जल्द प्रभावी कदम उठाएं- नसबंदी अभियान का विस्तार किया जाए, कुत्तों को शेल्टर में शिफ्ट किया जाए और रात के समय गश्त बढ़ाकर हमलों पर अंकुश लगाया जाए। अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में यह समस्या और विकराल रूप ले सकती है।