शिमला। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने रिटायर IAS और पूर्व मुख्य सचिव राम सुभग सिंह का सेवाकाल दो साल के लिए बढ़ा दिया है। 31 जुलाई 2023 को रिटायर हुए राम सुभग सिंह को तीसरी बार सेवा विस्तार दिया गया है। मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना ने इस सेवा विस्तार के संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है।
प्रिंसिपल एडवाइजरी टू सीएम के रूप में सेवाएं
बता दें कि राम सुभग सिंह रिटायरमेंट के बाद से प्रिंसिपल एडवाइजरी टू सीएम के रूप में कार्यरत हैं। उनको प्रतिमाह 1,50,000 रुपए का वेतन दिया जाएगा। साथ ही, सेवानिवृत्त होने पर मिलने वाले टीए/डीए के भी वह हकदार होंगे। राम सुभग सिंह को रिटायरमेंट के बाद भी मेडिकल और सरकारी आवास की सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी।
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मेडिकल और आवास सुविधाओं का लाभ
राम सुभग सिंह को रिटायरमेंट पर मिलने वाली मेडिकल और सरकारी आवास की सुविधाएं भी उपलब्ध रहेंगी। प्रदेश सरकार उनके लंबे प्रशासनिक अनुभव का लाभ उठाने की कोशिश कर रही है, जिसके तहत उनकी सेवाएं मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार पद पर ली जा रही हैं।
1987 बैच के अधिकारी हैं राम सुभग
1987 बैच के IAS अधिकारी राम सुभग सिंह को ऊर्जा, पर्यटन और कई अन्य क्षेत्रों में महत्वपूर्ण कार्य करने का अनुभव है, जिससे वह राज्य के विकास में अहम भूमिका निभा सकते हैं। बता दें कि राम सुभग सिंह ने कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है।
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विवादित रहा है कार्यकाल
राम सुभग सिंह हिमाचल प्रदेश में तत्कालीन जयराम ठाकुर सरकार में पर्यटन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव थे। उस समय वे विवादों में घिरे । एक इन्वेस्टर मीट के लिए तैयार किए गए पोर्टल पर विवादित डॉक्यूमेंट अपलोड होने से यह मामला सुर्खियों में आया।
भारमुक्त किए जा चुके हैं राम सुभग
इस विवाद की जानकारी तत्कालीन मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को नहीं थी। उन्होंने सदन में इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया और तत्कालीन मुख्य सचिव बीके अग्रवाल से इस मामले में तीन दिन में रिपोर्ट तलब की। इस घटना के बाद राम सुभग सिंह को भारमुक्त कर दिया गया और उन्हें आयुष विभाग की जिम्मेदारी दी गई, जो कि पांच दिन बाद वापस ले ली गई।
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टायर्ड और रिटायर्ड कर्मचारियों का विरोध
हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस और बीजेपी दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों ने हमेशा से टायर्ड और रिटायर्ड कर्मचारियों का विरोध किया है। विपक्ष में रहते हुए, हर पार्टी का तर्क होता है कि कर्मचारियों और अधिकारियों को सेवा विस्तार नहीं दिया जाना चाहिए। लेकिन सत्ता में आने पर, वे खुद उसी तरह के अधिकारियों को सेवा विस्तार देने लगते हैं।
इससे राज्य के बेरोजगार युवाओं में असंतोष बढ़ता है। हाल ही में राज्य के शिक्षित बेरोजगारों ने रिटायर्ड अधिकारियों को एक्सटेंशन देने के खिलाफ जोरदार आवाज उठाई थी।
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