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October 29, 2024

हिमाचल में जेल के कैदी कामगार बन पाल रहे परिवार, हर महीने कमा रहे 35 हजार

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शिमला। हिमाचल प्रदेश के जिला शिमला की कैंथू जेल में बंद कैदी ने अनोखा कारनामा कर दिखाया है। जिसके चलते वह जेल से ना केवल अपना बल्कि अपने परिवार को भी सहारा दे रहा है। बता दें कि जेल में बंद कैदी गुड्डू हर महीने 25 से 35 हजार रुपए की कमाई कर रहा है।

14 साल की सजा काट रहा गुड्डू

जानकारी के अनुसार गुड्डू 14 साल की सजा काट रहा है। वहीं, इस समय को ना गवांते हुए उसने जेल में ही फर्नीचर बनाने की ट्रेनिंग ली है। अब गुड्डू इस काम से अच्छे पैसे कमा रहा है। यह भी पढ़ें सुक्खू सरकार ने दिवाली से पहले अधिकारियों को दिया प्रमोशन का तोहफा, यहां देखें लिस्ट

गलती का पछतावा

गुड्डू ने अपनी गलती के लिए पछतावा जताया है, लेकिन वह हिमाचल पुलिस की 'हर हाथ को काम दो' मुहिम से खुश हैं। उन्होंने बताया कि वह लकड़ी से हर प्रकार का सामान तैयार करते हैं और उनके जैसे अन्य कैदी भी कुशल कारीगर बन चुके हैं।

प्रदर्शनी में कैदियों के उत्पाद

शिमला के रोटरी क्लब हॉल में 3 दिवसीय प्रदर्शनी का आयोजन किया गया है, जिसमें कैदियों द्वारा बनाए गए खूबसूरत फर्नीचर को प्रदर्शित किया गया है। प्रदर्शनी में बेड, सोफा, सेंटर टेबल, डाइनिंग टेबल, पूजा टेम्पल और चेयर जैसे उत्पाद शामिल हैं, जिन्हें लोगों ने जमकर खरीदा। यह भी पढ़ें हिमाचल आ रहीं प्रियंका गांधी- वायनाड में चुनाव प्रचार बीच में छोड़ा, जानिए वजह अन्य जेलों में भी प्रशिक्षण कैंथू जेल के अलावा, अन्य जेलों में भी कैदियों को फर्नीचर बनाने, बेकरी उत्पाद बनाने और ऊनी कपड़े बनाने की ट्रेनिंग दी जा रही है। इन उत्पादों की बिक्री के लिए पुलिस महकमा विभिन्न क्षेत्रों में प्रदर्शनी लगाता है, जिससे कैदियों के व्यवहार में सुधार होता है और उन्हें समाज की मुख्यधारा में शामिल किया जाता है।

सुधार और पुनर्वास द्देश्य

हिमाचल कारगर एवं सुधार सेवाएं महानिदेशक एसआर ओझा ने प्रदर्शनी का शुभारंभ करते हुए कहा कि यह पहल कैदियों के उत्थान और समाज से पुनः जोड़ने के उद्देश्य से की जा रही है। उन्होंने बताया कि यह न केवल कैदियों के पुनर्वास में मदद करता है, बल्कि उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर भी प्रदान करता है। यह भी पढ़ें : शातिर ने व्यापारी से मांगी एक करोड़ की फिरौती, पैसे नहीं देने पर दी ये धमकी

एक और कैदी अनिल की कहानी

वहीं, मर्डर मामले में उम्र कैद की सजा काट रहे अनिल कुमार ने भी बताया कि वह जेल में रहकर फर्नीचर बनाकर अपने परिवार की मदद कर रहे हैं। उनकी कहानी यह दर्शाती है कि कैसे जेल में रहकर भी कैदी अपने परिवार का सहारा बन सकते हैं। बता दें कि यह पहल न केवल कैदियों को आर्थिक सहायता देती है, बल्कि उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास भी कर रही है।

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