भाई दूज का पर्व सनातन धर्म में विशेष महत्व रखता है। इस दिन बहनें यमराज की पूजा करती हैं, ताकि उनके भाई को जीवन में सफलता मिले और उनकी उम्र लंबी हो। साथ ही, इस शुभ अवसर पर बहनें भाई का तिलक करती हैं, जबकि भाई उन्हें उपहार देते हैं। भाई दूज का पर्व भाई-बहन के रिश्ते को और मजबूत बनाने का प्रतीक है।
भाई दूज 2024 कब है?
भाई दूज का पर्व इस वर्ष 3 नवंबर 2024 (रविवार) को मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार, कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि 2 नवंबर को रात 08:21 मिनट पर शुरू होगी और 3 नवंबर को समाप्त होगी।
शुभ मुहूर्त:
- अपराह्न समय: 01:10 PM से 03:22 PM
- ब्रह्म मुहूर्त: 04:51 AM से 05:43 AM
- विजय मुहूर्त: 01:54 PM से 02:38 PM
- गोधूलि मुहूर्त: 05:34 PM से 06:00 PM
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भूलकर भी न करें ये गलतियां
भाई दूज के दिन कुछ विशेष गलतियों से बचना बेहद जरूरी है, ताकि भाई-बहन के रिश्ते में खटास न आए। यहाँ कुछ महत्वपूर्ण सावधानियाँ दी गई हैं:
झगड़ा न करें: भाई दूज के दिन भाई-बहन को आपस में झगड़ा नहीं करना चाहिए। यह पर्व प्रेम और एकता का प्रतीक है, और झगड़ा रिश्ते को खराब कर सकता है।
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तामसिक चीजों का सेवन: इस दिन तामसिक चीजों का सेवन भूलकर भी न करें। यह पर्व पवित्रता और शुभता का पर्व है, इसलिए स्वास्थ्यवर्धक और सात्विक भोजन करना चाहिए।
उपहार का निरादर: भाई द्वारा दिया गया उपहार कभी भी नकारना नहीं चाहिए। इसका निरादर रिश्ते में तनाव पैदा कर सकता है।
तिलक से पहले अन्न का सेवन: भाई का तिलक करने से पहले बहन को अन्न का सेवन नहीं करना चाहिए। तिलक न करने तक बहन को व्रत रखना चाहिए। इससे भाई-बहन के रिश्ते में मजबूती आती है।
दिशा का ध्यान रखें: तिलक करते समय दिशा का ध्यान रखना भी महत्वपूर्ण है। भाई का मुख उत्तर या उत्तर पश्चिम की दिशा में होना चाहिए, जबकि बहनें पूर्व या उत्तर पूर्व की दिशा में बैठें।
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क्यों मनाते है भाई दूज
भाई दूज भाई-बहन के रिश्ते को मनाने का पर्व है, जिसे हर साल कार्तिक मास की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। इस दिन बहनें यमराज की पूजा करती हैं ताकि उनके भाई की उम्र लंबी हो और वे जीवन में सफलता प्राप्त करें। बहनें भाई का तिलक करती हैं, जबकि भाई उपहार देते हैं। यह पर्व प्रेम, सुरक्षा और स्नेह का प्रतीक है, जो भाई-बहन के बीच की बंधन को मजबूत करता है।