बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में एक दिल छू लेने वाली घटना ने पूरे क्षेत्र को स्तब्ध कर दिया है। 11 साल पहले अपने इकलौते बेटे को खोने वाले रणजीत कुमार और बबली देवी की जिंदगी में एक नवजात शिशु की किलकारी ने फिर से रोशनी भर दी है। सोमवार को अपने बेटे का श्राद्ध मनाने के बाद, दंपत्ति को एक लावारिस नवजात की आवाज सुनाई दी, जिसने उन्हें अतीत की यादों में डुबो दिया।
श्राद्ध के बाद का मोड़
रणजीत और बबली अपने बेटे के श्राद्ध के लिए तैयार हो रहे थे, तभी अचानक उन्हें बच्चे की रोने की आवाज सुनाई दी। यह आवाज उन्हें अपने घर के पास से आई। जब वे दौड़कर उस दिशा में पहुंचे, तो वहां एक नवजात लड़का लावारिस पड़ा मिला।
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दंपत्ति की भावनाएं
उस नवजात को देखकर रणजीत और बबली की आंखों में आंसू आ गए। बबली ने कहा, "मुझे लगा जैसे यह मेरा खोया हुआ बेटा है, जिसे कुदरत ने हमें वापस लौटा दिया है।" उन्होंने तुरंत बच्चे को गोद में उठा लिया और उसे अस्पताल ले जाने का निर्णय लिया।
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नवजात की देखभाल
फिलहाल, नवजात को क्षेत्रीय अस्पताल बिलासपुर में उपचाराधीन रखा गया है। दंपत्ति पिछले दो दिनों से उसकी देखभाल कर रहे हैं और उसे अपना मानने लगे हैं। वहीं. दंपति उस बच्चे को गोद भी लेना चाहते हैं।
गोद लेने की अपील
रणजीत और बबली ने प्रशासन और सरकार से अपील की है कि उन्हें इस नवजात का अभिभावक बनाया जाए। उन्होंने बताया कि वे इस बच्चे को अपने बेटे की तरह प्यार देंगे।
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समाज की प्रतिक्रिया
इस घटना ने समाज में दया और मानवता की भावना को फिर से जीवित किया है। कई अन्य परिवार भी इस नवजात को गोद लेने के लिए आगे आए हैं, जो यह दर्शाता है कि इंसानियत आज भी जिंदा है। स्थानीय समुदाय में यह घटना चर्चा का विषय बन गई है। लोगों का मानना है कि यह एक न केवल व्यक्तिगत बल्कि सामूहिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण घटना है।
कानूनी जटिलताएं
नवजात को गोद लेने की प्रक्रिया जटिल है। प्रशासन ने बताया कि इस मामले में कई अन्य परिवार भी रुचि दिखा रहे हैं। पुलिस इस मामले की जांच कर रही है कि यह नवजात कहां से आया और इसके पीछे की असल कहानी क्या है। डीएसपी मदन धीमान ने कहा कि नवजात को शिशु निकेतन शिमला भेजा जाएगा, जहां उसकी देखभाल की जाएगी।
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वहीं, दूसरी ओर यह घटना एक गहन संदेश देती है कि ममता और ममता का त्याग एक ही समय पर कैसे विरोधाभास पैदा कर सकते हैं। रणजीत और बबली की कहानी हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि कुदरत का चमत्कार कभी-कभी इंसानी सोच और समझ से परे होता है। इस नन्हे मेहमान ने न केवल इस दंपत्ति के जीवन को फिर से रोशन किया, बल्कि समाज को भी मानवता और दया की नई परिभाषा दी है।