चंबा। हिमाचल प्रदेश की कला-संस्कृति को विश्व पटल पर एक नई पहचान दिलाने वाले पद्मश्री और राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित मशहूर पौन माता वादक मुसाफिर राम भारद्वाज का 94 वर्ष की आयु में निधन हो गया।
मुसाफिर राम मूल रूप से के भरमौर के सचुईं गांव के निवासी और त्रिलोचन महादेव के वंशज थे। मुसाफिर राम का जीवन कला, संस्कृति और परंपराओं के प्रति गहरी आस्था और सेवा में व्यतीत हुआ।
राजकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार
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यूं तो मुसाफिर राम बीते कई दिनों से अस्वस्थ चल रहे थे और गत शुक्रवार को पंजाब के दुनेरा स्थित अपने आवास पर उन्होंने अंतिम सांस ली। उनका अंतिम संस्कार आज दुनेरा में राजकीय सम्मान के साथ किया गया। जिसमें स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने सम्मान स्वरूप सलामी दी।
स्थानीय लोग 101 वर्ष बताते हैं उनकी उम्र
मुसाफिर राम भारद्वाज का जन्म 1930 में चंबा जिले के भरमौर के संचुई गांव में दीवाना राम के घर हुआ था। गांव के लोगों का मानना है कि उन्होंने अपने जीवन का शतक पूरा किया था और उनकी आयु लगभग 101 वर्ष थी। मुसाफिर भारद्वाज की औपचारिक शिक्षा नहीं हुई थी, लेकिन उन्होंने 13 वर्ष की आयु में पौण माता बजाने की कला सीख ली थी। उनके 4 पुत्र और 2 पुत्रियां हैं।
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अपने बुजुर्गों से सीखी थी कला
मुसाफिर भारद्वाज के बेटे कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के मुख्य लाइब्रेरियन विनोद भारद्वाज ने बताया कि उनके पिता बचपन से ही पौन माता बजाने में निपुण थे। पौन माता जो एक दुर्लभ और पारंपरिक वाद्य यंत्र है, को उन्होंने अपनी विरासत और सांस्कृतिक धरोहर के रूप में अपनाया। यह कला उन्होंने अपने बुजुर्गों से सीखी थी जो धीरे-धीरे उनकी पहचान और पहचान का प्रतीक बन गई।
साल 2002 व 2014 में हुए थे सम्मानित
दिल्ली, पंजाब और हरियाणा सहित देशभर के विभिन्न सांस्कृतिक आयोजनों में उन्हें पौन माता बजाने का अवसर मिला। वर्ष 2010 के कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान भी उन्होंने अपनी इस अनोखी कला का प्रदर्शन कर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्धि प्राप्त की।
उनकी कला और समर्पण को मान्यता देते हुए उन्हें 2002 में राष्ट्रपति पुरस्कार से और 2014 में पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इन सम्मानित उपाधियों ने उनकी कला को एक विशेष स्थान दिलाया और देशभर में उन्हें एक आदर्श कलाकार के रूप में मान्यता मिली।
मणिमहेश यात्रा के रहे थे मुख्य शिव गुर
भरमौर के सचुईं गांव में जन्मे मुसाफिर भारद्वाज श्री मणिमहेश यात्रा के मुख्य शिव गुर भी रहे, जो उनके धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को दर्शाता है। वे जीवनभर अपनी परंपराओं और संस्कृति को संजोए रखने के लिए प्रयासरत रहे।
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आज शनिवार को दुनेरा में हुए उनके अंतिम संस्कार के समय पंजाब पुलिस के नायब तहसीलदार अश्विनी शर्मा, पुलिस उपनिरीक्षक जगदीश चंद और पठानकोट पुलिस टीम की उपस्थिति में उन्हें राजकीय सम्मान दिया गया।
भरमौर के गणमान्यों ने किया शोक व्यक्त
मुसाफिर राम भारद्वाज के निधन पर भरमौर के विधायक डॉ. जनक राज, पूर्व मंत्री ठाकुर सिंह भरमौरी, पूर्व विधायक जिया लाल कपूर, ब्रह्मानंद, सुरजीत भरमौरी, इंद्र ठाकुर और ललित ठाकुर सहित क्षेत्र के कई गणमान्य व्यक्तियों ने शोक व्यक्त किया। मुसाफिर राम भारद्वाज की जीवन यात्रा उनकी कला और समर्पण ने भारतीय सांस्कृतिक धरोहर में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और उनकी अनुपस्थिति को हमेशा महसूस किया जाएगा।