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January 28, 2025
हिमाचल में हांफी हिमकेयर योजना, मुफ्त इलाज पर संकट, 200 करोड़ की पेमेंट पेंडिंग
प्राइवेट अस्पतालों में सर्जरी बंद, सरकारी अस्पतालों पर प्रेशर
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शिमला। हिमाचल प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में हिमकेयर योजना के तहत इलाज करने वाले मरीजों की स्थिति अब गंभीर होती जा रही है। राज्य के सबसे बड़े अस्पताल IGMC सहित अन्य सरकारी अस्पतालों में एंजियोग्राफी से लेकर अधिकांश सर्जरी रुक चुकी हैं।
बता दें कि इन अस्पतालों का बकाया करीब 200 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है, जिसके कारण मरीजों को इलाज में कठिनाई हो रही है। इसके अलावा, प्राइवेट अस्पतालों में सर्जरी बंद होने के कारण मरीजों का दबाव सरकारी अस्पतालों पर बढ़ गया है।
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IGMC के अधिकारियों के अनुसार, पहले जहां कार्डियोलॉजी विभाग में स्टंट डालने के लिए 40 से 47 ऑपरेशन महीने में होते थे, अब उनकी संख्या बढ़कर 100 के पार हो गई है। हालांकि, बकाए के कारण वेंडर अब आवश्यक सामग्री की आपूर्ति नहीं कर रहे, जिससे सर्जरी प्रभावित हो रही है। इस मुद्दे की जानकारी स्वास्थ्य सचिव को दी जा चुकी है।
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स्वास्थ्य विभाग ने इस समस्या का समाधान निकालने के लिए वित्त विभाग से 170 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बजट मांगा है। यह फाइल वर्तमान में प्लानिंग विभाग को भेजी गई है, जहां से रिकमेंडेशन का इंतजार किया जा रहा है। हालांकि, इतनी बड़ी राशि एक साथ मंजूर करना वित्त विभाग के लिए मुश्किल हो सकता है। यदि यह बजट जल्दी जारी नहीं किया गया, तो अस्पतालों में बकाया राशि और बढ़ सकती है, जिससे स्थिति और खराब हो सकती है।
हिमकेयर योजना, जो एक स्वास्थ्य बीमा योजना के रूप में कार्य करती है, में कई खामियां सामने आई हैं। इस योजना के तहत एक परिवार को पांच लाख रुपये तक का नि:शुल्क इलाज मिलता है। हालांकि, सरकार ने पाया कि सरकारी कर्मचारी भी इस योजना का लाभ ले रहे थे और निजी अस्पतालों में सिलेक्टिव सर्जरी की जा रही थी। इसके परिणामस्वरूप, सरकार को यह निर्णय लेना पड़ा कि प्राइवेट अस्पतालों में केवल डायलिसिस ही किया जाएगा, जबकि बाकी सर्जरी सरकारी अस्पतालों में ही होंगी।
CM सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इस मामले की समीक्षा के बाद इसे कैबिनेट सब-कमेटी को भेजा था, लेकिन अभी तक इस समिति की कोई बैठक नहीं हो पाई है और न ही कोई अंतिम निर्णय लिया गया है। इसके परिणामस्वरूप हिमकेयर योजना में सुधार नहीं हो पा रहा है और बकाया राशि लगातार बढ़ती जा रही है।