हमीरपुर। आज के दौर में जहां जमीन के टुकड़े के लिए जहां गोलियां चलाई जा रही हैं, वहीं हिमाचल के हमीरपुर जिला में लोगों ने एक बड़ी मिसाल पेश की है। लोगों ने रास्ता बनाने के लिए ना सिर्फ अपनी जमीन दान कर दी, बल्कि रास्ते में आने वाले पक्के मकानों को भी मकान मालिकों ने खुद ही तोड़ कर रास्त बनाने को जगह दे दी।
हिमाचल के किस जिला का है मामला
मामला हमीरपुर जिला के बड़ागांव पंचायत के चठयाल वास गांव का है। यहां के स्थानीय श्मशानघाट तक पहुंचने के लिए बेहद तंग पैदल चलने का ही मार्ग था। जिसे लोगों ने अब दो या तीन नहीं बल्कि पूरा 10 फीट तक चौड़ा कर दिया है। इसके लिए लोगों ने ना सिर्फ अपनी जमीन दान में दे दी। बल्कि अपने पक्के मकान पशुशालाएं और चारदीवारियों को भी तोड़ दिया।
बिना मुआवजे के तोड़ दिए पक्के मकान
लोगों ने अपने घर, पशुशालाओं को तोड़ने के लिए ना ही तो कोई मुआवजा मांगा और ना ही घर पशुशाला के हिस्से को तोड़ने के लिए किसी राशि की मांग की। यह सारा कार्य बिना प्रशासन के सहयोग के ग्रामीणों ने अपने स्तर पर किया। इस कार्य का ेअंजाम देने का श्रेय गांव के ही एक पूर्व सैनिक सुबेदार अशोक कुमार को जाता है। जिन्होंने लोगों को इसके लिए प्रेरित किया।
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ग्रामीणों ने बैठक कर लिया था फैसला
अशोक कुमार ने बताया कि गांव के श्मशानघाट तक पहुंचने के लिए पैदल चलने का रास्ता था। जिससे जब किसी की मृत्यु हो जाती थी, तो शव को श्मशानघाट तक पहुंचाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। रास्ते के दोनों ओर लोगों के मकान, पशुशालाएं और चारदीवारियां थी। ऐसे में गांव के लोगों के साथ एक बैठक बुलाई गई। इसी बैठक में निर्णय लिया गया कि सड़क निर्माण में अगर किसी की जमीन, मकान, पशुशाला या चारदीवारी बाधा बनती है तो मकान मालिक या फिर भूमि का मालिक उसे हटाने के लिए हर संभव सहयोग करेगा।
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अपने पैसों से तोड़े मकान, चारदीवारी
सड़क निर्माण के लिए अगर मकान को तोड़ना पड़ेगा, तो भी मकान मालिक मना नहीं करेगा। यही नहीं बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि सड़क बनाने पर जो भी खर्च आएगा उसे सब ग्रामीण मिल जुल कर वहन करेंगें। जिसके चलते ग्रामीणों ने आपसी सहयोग से साढ़े तीन लाख रुपए जुटा लिए और अपने स्तर पर ही सड़क का निर्माण कर दिया।
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लोगों मिलकर निकाला समस्या का हल
स्थानीय निवासी सुनील ठाकुर ने बताया कि गांववासियों ने अपने पक्के मकान सड़क बनाने के लिए बिना किसी मुआवजे के तोड़ दिए। स्थानीय महिला बबिता कुमारी, निर्जला ठाकुर, रमना कुमारी और पूजा कुमारी ने बताया कि गांव में सड़क सुविधा न होने के चलते लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। जिस पर ग्रामीणों ने मिलकर इस समस्या को हल किया।
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पूर्व सैनिक ने प्रेरित किए ग्रामीण
सड़क बनाने के लिए पूर्व सैनिक सूबेदार अशोक कुमार ने पहल की और अन्य ग्रामीणों को भी प्रेरित किया। लोगों ने सड़क बनाने के लिये अपने मकान ही नहीं तोड़ेए बल्कि स्वयं सड़क बनाने के लिये पैसों का इंतजाम भी किया।
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बता दें कि गांव से श्मशानघाट तक की दूरी डेढ़ किलोमीटर की है। जिसमें से ग्रामीणों ने अपने स्तर पर 500 मीटर का रास्ता बना लिया है। इस सड़क के निर्माण के बीच जिस किसी के मकान का जितना हिस्सा आ रहा है उसे मकान मालिक अपने स्तर पर हटाने में लगा है। कोई मकान की छत्त हटाने में लगा है और कोई अपनी चारदीवारी को हटा रहा है। किसी भी ग्रामीण के मन में कोई शिकायत नहीं है।