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March 21, 2026
हिमाचल बजट: मंत्रियों-विधायकों-अफसरशाही का कटेगा वेतन! विधायक निधि कर दी आधी
हिमाचल में सीएम मंत्री, विधायक और अफसरों की सैलरी होगी डेफर
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शिमला। आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहे हिमाचल प्रदेश में बड़ा और सख्त फैसला लेते हुए सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बजट भाषण में सरकार के खर्चों में कटौती की दिशा में अहम कदम उठाए हैं। राज्य की वित्तीय स्थिति को संभालने के लिए मुख्यमंत्री, मंत्रियों, विधायकों और वरिष्ठ अधिकारियों मुख्य सचिव से लेकर ए व बी श्रेणी कर्मचारियों-अधिकारियों के वेतन छह महीने के लिए अस्थायी कटौती (डेफरमेंट) का ऐलान किया गया है। इसके अलावा सीएम सुक्खू ने अपने बजट भाषण में राज्य के लगभग 70 हजार अस्थाई कर्मचारियों के मानदेय में 300 से 1000 रुपए बढ़ौतरी का ऐलान किया।
सीएम ने कहा कि चीफ सेक्रेटरी, एसीएस, सेक्रेटरी, डीजीपी, एडीजी, एसपी रेंक के अफसरों के अलावा न्यायिक अधिकारियों और क्लास-वन श्रेणी अधिकारियों की सैलरी भी डेफर की जाएगी। क्लास-वन और क्लास-टू श्रेणी कर्मचारियों की 3 प्रतिशत सैलरी डेफर होगी। उन्होंने कहा कि जब आर्थिक स्थिति ठीक होगी तब यह राशि लौटा दी जाएगी।
सरकार ने अगले छह महीनों के लिए जनप्रतिनिधियों के वेतन में कटौती लागू करने का निर्णय लिया है:
यह कदम सीधे तौर पर सरकारी खर्च को कम करने और वित्तीय संतुलन बनाने की दिशा में उठाया गया है। पेंशन में कोई कटौती नहीं होगी। न्यायपालिका से भी किया अनुरोध कि जजों और अन्य श्रेणी के वेतन को ऐसे ही डेफर करें।
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केवल जनप्रतिनिधि ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक ढांचे के शीर्ष अधिकारी भी इस फैसले के दायरे में आए हैं। चीफ सेक्रेटरी, एसीएस, सेक्रेटरी, डीजीपी, एडीजी और एसपी स्तर तक के अधिकारियों के वेतन में भी छह महीने के लिए कटौती (डेफर) की जाएगी। हालांकि, सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि ग्रुप C और ग्रुप D कर्मचारियों के वेतन में कोई कटौती नहीं की जाएगी, ताकि निचले स्तर के कर्मचारियों पर आर्थिक दबाव न पड़े।
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राज्य की वित्तीय स्थिति को देखते हुए विधायक क्षेत्र विकास निधि में भी बड़ी कटौती की गई है।
सीएम सुक्खू ने अपने बजट भाषण में सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के अंदर एक उम्मीद जगा दी है। सीएम सुक्खू ने पेंशनरों को वकाया राशि का भुगतान वित्त वर्ष 2026.27 में करने का ऐलान किया है। इसाी तरह से कर्मियों की ग्रेच्युटी का भुगतान भी इसी साल किया जाएगा। अनुबंध कर्मचारियों को नियमित किया जाएगा। अब साल में दो बार अनुबंध कर्मचारियों को नियमित करने का फैसला लिया गया है।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने दैनिक वेतन भोगी की दिहाड़ी 25 रुपये बढ़ी। दिहाड़ी को 750 रुपये करने की घोषणा की। इसके साथ ही आउटसोर्स कर्मियों के वेतन में भी बढ़ोतरी की गई। आउटसोर्स कर्मियों को अब 13,750 मिलेंगे। इसी तरह से इन्हें
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जहां एक ओर सरकार खर्च घटा रही है, वहीं सामाजिक क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों को राहत भी दी गई है।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के मानदेय में 1000 रुपये की बढ़ोतरी
मिड-डे मील वर्कर्स को अब 5500 रुपये मानदेय मिलेगा
यह कदम जमीनी स्तर पर काम करने वाली महिला कार्यकर्ताओं को आर्थिक मजबूती देने के लिए अहम माना जा रहा है।
सरकारी कर्मचारियों के लिए एक सकारात्मक घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अब स्टडी लीव के दौरान उन्हें पूरा वेतन मिलेगा। इससे कर्मचारी अपनी शिक्षा और कौशल को बेहतर बना सकेंगे, बिना आर्थिक चिंता के। इससे साफ है कि सरकार विकास कार्यों में भी प्राथमिकताओं के आधार पर खर्च करने की रणनीति अपना रही है।
यह पूरा फैसला इस बात का संकेत है कि हिमाचल प्रदेश सरकार आर्थिक अनुशासन लागू करने के लिए गंभीर है। जहां एक ओर सरकार ने खुद के खर्चों में कटौती की है, वहीं गरीबों और जमीनी स्तर के कर्मचारियों को राहत देने का संतुलन भी बनाए रखा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कदम अल्पकालिक तौर पर कठिन जरूर है, लेकिन लंबे समय में राज्य की वित्तीय स्थिति को स्थिर करने में मदद कर सकता है।
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