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February 20, 2026
हिमाचल: शादी-ब्याह में बिना लाइसेंस शराब परोसना पड़ेगा महंगा, 1 लाख तक लगेगा जुर्माना
2026-27 आबकारी नीति लागू, जुर्माना और लाइसेंस शर्तें कड़ी
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शिमला। अब शादी-ब्याह में चुपचाप शराब परोसना आसान नहीं रहेगा। हिमाचल प्रदेश सरकार ने 2026-27 की नई आबकारी नीति में ऐसे आयोजनों और व्यावसायिक परिसरों पर सख्त नकेल कस दी है, जहां बिना लाइसेंस शराब परोसी जाती है। नई व्यवस्था साफ कहती हैकि पहली बार गलती पर जुर्माना, दूसरी बार और ज्यादा, और तीसरी बार जेब पर सीधा एक लाख तक का वार।
सरकार का तर्क है कि अवैध परोसने की प्रवृत्ति से राजस्व को नुकसान और अवैध कारोबार को बढ़ावा मिलता है। इसी को रोकने के लिए नीति में जुर्माने और लाइसेंस शर्तों को कड़ा किया गया है।
नई नीति के तहत शादी समारोह, बैंक्वेट हॉल, मैरिज पैलेस, धर्मशाला या अन्य व्यावसायिक परिसरों में बिना अनुमति शराब परोसते पाए जाने पर-
• पहली बार 50 हजार रुपये जुर्माना
• दूसरी बार 75 हजार रुपये
• तीसरी बार 1 लाख रुपये तक जुर्माना
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यदि अधिकृत लाइसेंसी भी अनधिकृत तरीके से शराब परोसते पकड़ा गया तो-
• पहली बार 20 हजार रुपये
• दूसरी बार अधिक दंड
• तीसरी बार 50 हजार रुपये तक जुर्माना
• चौथी बार लाइसेंस रद्द
यदि कोई रिटेल ठेका निर्धारित न्यूनतम खुदरा मूल्य से ज्यादा वसूली या कम दाम पर बिक्री करते पकड़ा गया, तो पहली बार एक दिन और दूसरी बार दो दिन के लिए ठेका सील किया जाएगा। यह कार्रवाई अन्य कानूनी दंड के अतिरिक्त होगी।
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होलसेल लाइसेंस (एल-1 और एल-13) की फीस 40 लाख से बढ़ाकर 50 लाख रुपये सालाना कर दी गई है। होटलों और बार लाइसेंस शुल्क में भी श्रेणी अनुसार 10 से 30 हजार रुपये तक बढ़ोतरी की गई है।
बिना परमिट या तय सीमा से अधिक ईएनए या बोतलबंद शराब मंगाने पर-
• पहली बार 1 लाख
• दूसरी बार 2 लाख
• तीसरी बार 3 लाख रुपये जुर्माना
साथ ही संबंधित स्टॉक और कंटेनर जब्त किए जाएंगे।
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नई नीति में व्यक्तिगत और पारिवारिक सीमा भी तय की गई है-
• 750 एमएल की 6 बोतलें या 1000 एमएल की 5 बोतलें
• बीयर की 24 बोतलें (650 एमएल)
• 5 लीटर के 3 कैन तक
• सामाजिक आयोजनों के लिए परमिट धारक 72 ब्लेंडेड स्पिरिट/देसी शराब और 78 बीयर ले जा सकेंगे
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जहां अवैध शराब के तीन या अधिक मामले दर्ज हैं, वहां स्थानीय निकाय की अनुमति के बिना भी ठेका खोला जा सकेगा। आबकारी आयुक्त को राजस्व हित में नियमों में संशोधन का अधिकार दिया गया है।
सरकार इसे राजस्व बढ़ाने और अवैध कारोबार पर रोक लगाने की दिशा में बड़ा कदम बता रही है। लेकिन सवाल यह भी रहेगा कि क्या सख्ती से अवैध धंधे पर पूरी तरह लगाम लग पाएगी, या फिर यह बहस आने वाले समय में और तेज होगी।