#विविध
March 5, 2025
हिमाचल-पंजाब के बीच शानन पावर प्रोजेक्ट का विवाद, सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा को किया बाहर
24 अप्रैल को होने वाली सुनवाई में पंजाब की याचिका के औचित्य पर होगी बहस
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मंडी। मंडी जिले के जोगिन्दर नगर में शानन हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट के मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को साफ कर दिया कि पंजाब और हिमाचल प्रदेश के बीच के इस मामले में हरियाणा को टांग फंसाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने हरियाणा सरकार की याचिका को खारित करते हुए 24 अप्रैल को आगे की सुनवाई की तारीख तय की है, जिसमें हिमाचल सरकार द्वारा पंजाब की याचिका को रद्द करने और लीज ट्रांसफर को लेकर हिमाचल प्रदेश की दलील पर बहस होगी।
माना जा रहा है कि शानन हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट के मामले में हरियाणा को इसलिए बीच में लाया गया, क्योंकि पंजाब सरकार हिमाचल प्रदेश की दलीलों का जवाब नहीं दे पा रही है। मंडी के राजा और केंद्र सरकार के बीच लीज की अवधि खत्म होने के बाद हिमाचल सरकार ने इस प्रोजेक्ट को वापस लौटने को कहा था।
इसके खिलाफ पंजाब सरकार सुप्रीम कोर्ट चली गई और तर्क दिया है कि शानन प्रोजेक्ट पंजाब को रि-ऑर्गेनाइजेशन एक्ट के तहत मिला था, इसलिए यह सिर्फ लीज से गवर्न नहीं हो सकता। हरियाणा ने भी यही तर्क देते हुए सुप्रीम कोर्ट में आवेदन दिया था कि वह पंजाब रि-ऑर्गेनाइजेशन एक्ट का हिस्सा रहा है, इसलिए उनकी बात भी इस विवाद में सुनी जाए। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को खारिज कर दिया है।
हिमाचल प्रदेश का दावा है कि शानन पावर प्रोजेक्ट का एरिया पंजाब से ट्रांसफर हुई टेरिटरी में नहीं आता, इसलिए इस क्षेत्र में पंजाब री-ऑर्गेनाइजेशन एक्ट लागू नहीं होगा। इसी एक्ट के आधार पर पंजाब ने सुप्रीम कोर्ट में संविधान के 131वें अनुच्छेद के तहत याचिका दायर की है।
हिमाचल सरकार ने याचिका के औचित्य पर सवाल उठाते हुए कहा है कि हिमाचल ने कहा कि यह विवाद इंटर स्टेट झगड़ा नहीं है। हिमाचल ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि पंजाब इस लीज एग्रीमेंट में भी सिग्नेटरी नहीं है, इसलिए भूमि के असल मालिक के खिलाफ संविधान के अनुच्छेद का इस्तेमाल करते हुए केस नहीं किया जा सकता। अब तक पंजाब हिमाचल के तर्कों का जवाब नहीं दे पाया है।