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February 10, 2026
हिमाचल: DA-एरियर भूल जाएं सरकारी कर्मी ! सब्सिडी पर भी मंडराया संकट; वित्त विभाग की चेतावनी
सरकारी कर्मियों के साथ साथ आम जनता पर पड़ सकता है महंगाई का बोझ
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शिमला। हिमाचल प्रदेश की आर्थिकी वर्तमान में एक ऐसे नाजुक मोड़ पर खड़ी है, जहां विकास की रफ्तार और सरकारी खजाने के बीच गहरा असंतुलन पैदा हो गया है। केंद्र सरकार से मिलने वाले राजस्व घाटा अनुदान (RDG) के बंद होने की आहट ने राज्य की वित्तीय चूलें हिला दी हैं।
वित्त विभाग की हालिया चेतावनी के बाद अब यह डर सताने लगा है कि यदि हालात न सुधरे, तो प्रदेश में एक बड़ा आर्थिक आपातकाल जैसे हालात पैदा हो सकते हैं। वित विभाग की प्रस्तुति ने एक ऐसी तस्वीर को उजागर किया है, जिसमें आने वाले समय में राज्य सरकार के सामने न सिर्फ विकास कार्य रोकने, बल्कि कर्मचारियों को समय पर वेतन और पेंशन देने तक की चुनौती खड़ी हो सकती है। वित्त विभाग के आंतरिक आकलन और 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट पर आधारित प्रस्तुति ने साफ संकेत दे दिए हैं कि प्रदेश एक गंभीर आर्थिक संकट के दौर में प्रवेश कर चुका है।
हिमाचल प्रदेश के लिए केंद्र से मिलने वाला राजस्व घाटा अनुदान रीढ़ की हड्डी के समान था। 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट के अनुसार यदि प्रदेश को राजस्व घाटा अनुदान नहीं मिलता है तो राज्य के वार्षिक बजट का लगभग 12.7 प्रतिशत हिस्सा एक झटके में खत्म हो जाएगा। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने स्वयं स्वीकार किया है कि इस कटौती का प्रदेश की आर्थिकी पर बेहद गहरा और नकारात्मक असर पड़ेगा।
वित्त विभाग के प्रमुख सचिव देवेश कुमार द्वारा दी गई प्रस्तुति ने प्रदेश में खलबली मचा दी है। विभाग ने संकेत दिए हैं कि आर्थिक संतुलन बनाए रखने के लिए सरकार को कई सख्त और अप्रिय फैसले लेने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। इसमें पिछले दो साल से रिक्त पड़े सरकारी पदों को पूरी तरह समाप्त करना, राज्य के संस्थानों में कम से कम 30 प्रतिशत की छंटनी करना या घाटे में चल रहे संस्थानों को बंद करना शामिल है। इसके अलावा नए वेतन आयोग की सिफारिशों और किसी भी तरह के वेतन संशोधन को फिलहाल रोकने का सुझाव भी दिया गया है।
प्रदेश के लाखों सरकारी कर्मचारियों के लिए वित्त विभाग की रिपोर्ट किसी बड़े झटके से कम नहीं है। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि आने वाले समय में महंगाई भत्ते (DA) की किस्तों और एरियर के भुगतान को रोकना पड़ सकता है। स्थिति इतनी गंभीर बताई जा रही है कि कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को समय पर वेतन और पेंशन मिल जाए, वही बड़ी बात होगी। वित्त विभाग के अनुसार यदि राजस्व प्राप्ति के साधन नहीं बढ़े, तो वेतन और पेंशन का भुगतान करना भी सरकार के लिए टेढ़ी खीर साबित होने वाला है।
आर्थिक संकट की यह तपिश केवल सरकारी दफ्तरों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर भी पड़ेगा। वित्त विभाग ने संकेत दिए हैं कि सरकार द्वारा दी जा रही विभिन्न सब्सिडी को वापस लिया जा सकता है। इसमें राशन डिपुओं में मिलने वाली रियायत, बिजली और पानी के बिलों पर दी जा रही छूट, और कूड़े के बिलों पर मिलने वाली राहत शामिल है। यहां तक कि हिमाचल सड़क परिवहन निगम के माध्यम से दी जाने वाली रियायती यात्रा सुविधाओं पर भी कैंची चलने के संकेत मिले हैं, जिससे आम जनता का घरेलू बजट बिगड़ सकता है।
इन तमाम नकारात्मक संकेतों और वित्त विभाग की सिफारिशों के बीच मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने एक मजबूत राजनीतिक रुख अपनाया है। दिल्ली दौरे के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदेश में ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) किसी भी सूरत में बंद नहीं होगी, चाहे वित्त विभाग की सिफारिशें कुछ भी हों। मुख्यमंत्री ने प्रदेश की जनता और कर्मचारियों को भरोसा दिलाया कि सरकार अपने आंतरिक संसाधनों को मजबूत करने के लिए दिन-रात काम कर रही है। उन्होंने यह भी साफ किया कि आम जनता को दी जाने वाली अनिवार्य सब्सिडी जारी रहेगी और सरकार वेतन व पेंशन के भुगतान में कोई बाधा नहीं आने देगी।