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June 4, 2025

हिमाचल से होगा चाइना ऑक्यूपाईड तिब्बत का दीदार: पहली बार खुलेगा ये दर्रा

पर्यटन के साथ सैन्य चेतना और आस्था के केंद्र बन सकता है किन्नौर का यह दर्रा

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shipkila pass open

रिकांगपिओ। भारत-चीन सीमा पर स्थित शिपकी ला  अब आम नागरिकों के लिए खोल दिया जाएगा। यह निर्णय आज़ादी के बाद पहली बार हुआ है, जब टूरिस्ट भी इस संवेदनशील बॉर्डर पॉइंट तक पहुंच सकेंगे। जिसके बाद पर्यटक वहां से चीन और तिब्बत के कई गांव का दीदार भी कर पाएंगे।

10 जून को खुलेगा शिपकी ला 

बताते चलें कि सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू 10 जून को शिपकी ला टॉप पर मौजूद रहेंगे और पर्यटकों के स्वागत में शामिल होंगे। एक दिन पहले यानी 9 जून को सीएम कल्पा में रात्रि प्रवास करेंगे।

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आजादी के बाद पहली बार खुल रहा दर्रा

राजस्व एवं बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने मीडिया से बातचीत में इस फैसले को ऐतिहासिक और अभूतपूर्व बताया। उन्होंने कहा कि इस दर्रे को आज़ादी के बाद से बंद कर दिया गया था, लेकिन अब यह आम पर्यटकों के लिए भी खोल दिया जा रहा है। इससे न सिर्फ पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि लोगों को भारत की सीमा के उस छोर तक पहुंचने का अवसर मिलेगा, जहां से अब तक केवल सैनिक ही गुजरते थे।

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बॉर्डर विज़िट के लिए आधार कार्ड की जरूरत

शिपकिला टॉप पर आम नागरिकों के लिए पहुंचने की प्रक्रिया को आसान बनाया गया है। अब केवल आधार कार्ड के जरिए एंट्री मिलेगी और किसी भारी-भरकम अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी। आर्मी की ओर से सुरक्षा और गाइडलाइन के तहत यात्रियों को सीमा क्षेत्र में ले जाया जाएगा।

कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए किन्नौर रूट खोलने की मांग

मंत्री जगत सिंह नेगी ने केंद्र सरकार से अनुरोध किया है कि कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए किन्नौर से भी मार्ग खोला जाए, जिससे उत्तराखंड की तुलना में अधिक संख्या में श्रद्धालु इस आस्था की यात्रा में सम्मिलित हो सकें। उन्होंने यह भी कहा कि किन्नौर रूट तुलनात्मक रूप से सुरक्षित और प्राचीन है।

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पहले के जमाने में ट्रेड के लिए होता था रास्ता इस्तेमाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि आजादी से पहले खच्चर मार्ग के जरिए किन्नौर होते हुए चीन का सामान देश में पहुंचता था। ट्रेडिंग के लिए उस समय शिलपी ला मार्ग का ही इस्तेमाल किया जाता था। एक बाद फिर इस दर्रे के खुलने से पर्यटन को नया आयाम मिलेगा। वहीं, लोग चीन के क्षेत्र का भी दीदार कर पाएंगे। किन्नौर के कई लोगों का कहना है कि इससे पर्यटकों की आमद भी बढ़ेगी और स्थानीय लोगों को भी फायदा होगा। 

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