#अव्यवस्था
November 1, 2026
हिमाचल में 16 महीने से नहीं बना स्कूल : बच्चों की पढ़ाई पर संकट, एक कमरे में लग रही पांच कक्षाएं
एक कमरे में चल रही पांच कक्षाएं
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कुल्लू। शिक्षा विभाग बच्चों को बेहतर सुविधाएं देने के बड़े-बड़े दावे तो करता है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर दिखा रही है। मामला कुल्लू जिले की सैंज घाटी से सामने आया है, जहां आपदा के 16 महीने बीत जाने के बाद भी करटाह के राजकीय प्राथमिक विद्यालय का नया भवन नहीं बन पाया है।
भवन न होने के कारण पहली से पांचवीं कक्षा तक के 40 बच्चों को एक ही कमरे में बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर बच्चों को स्कूल की बुनियादी सुविधाएं कब मिलेंगी और विभाग अपने वादे कब पूरे करेगा?
साल 2025 में आई आपदा के दौरान राजकीय प्राथमिक विद्यालय करटाह का भवन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके बाद से स्कूल के पास बच्चों को पढ़ाने के लिए पर्याप्त जगह नहीं है। मजबूरी में पहली से पांचवीं कक्षा तक के सभी 40 बच्चों को एक ही कमरे में बैठाया जा रहा है।
इससे शिक्षकों को भी सभी कक्षाओं को एक साथ पढ़ाने में परेशानी हो रही है। लंबे समय से भवन निर्माण का इंतजार किया जा रहा है, लेकिन संबंधित विभागों की ओर से अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
आपदा के बाद से क्षेत्र की सड़कें भी खराब हालत में हैं और कई सरकारी भवनों का निर्माण कार्य भी अधूरा पड़ा है। स्कूल के बच्चों के अभिभावक टिकमू देवी, हिरालाल, योगराज और गिरधारी लाल का कहना है कि वे कई बार प्रशासन और शिक्षा विभाग के अधिकारियों से स्कूल का नया भवन बनाने की मांग कर चुके हैं। विभाग की ओर से दो कमरों का नया भवन बनाने का भरोसा भी दिया गया था, लेकिन काफी समय बीत जाने के बाद भी काम शुरू नहीं हुआ है।
इस मामले में प्रारंभिक शिक्षा विभाग के उपनिदेशक ज्ञानचंद ने बताया कि राजकीय प्राथमिक विद्यालय करटाह की समस्या को लेकर निदेशालय को पत्र भेजा जा चुका है। स्कूल के नए भवन के निर्माण के लिए विभाग की ओर से प्रयास किए जा रहे हैं।
अभिभावक वेदराम का कहना है कि बच्चों की पढ़ाई के साथ किसी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए। प्रशासन और शिक्षा विभाग को जल्द स्कूल का नया भवन बनवाने का काम शुरू करना चाहिए, ताकि बच्चों को पढ़ने और बैठने के लिए उचित जगह मिल सके।
वहीं, स्कूल प्रबंधन समिति (SMC) की अध्यक्ष दुर्गा देवी ने कहा कि अभिभावकों को अब तक सिर्फ आश्वासन ही मिल रहे हैं। प्रशासन और शिक्षा विभाग को इस मामले को गंभीरता से लेना चाहिए। भवन निर्माण के लिए बजट और अन्य जरूरी औपचारिकताएं जल्द पूरी की जानी चाहिए, ताकि बच्चों को जल्द अपना स्कूल भवन मिल सके।