राजनीति

#विविध

September 21, 2026

हिमाचल में आर्थिक संकट के बीच MLA निधि जारी- इन इलाकों पर मेहरबान हुई सरकार

गांवों के छोटे विकास कार्यों में उपयोग होगा पैसा

Add

News4himachal

as a

Trusted Source on

Google

शेयर करें:

Sukhu Government MLA Fund

शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने वित्तीय दबाव के बीच विधायक क्षेत्र विकास निधि की किश्तें जारी कर दी हैं। जनजातीय क्षेत्रों के विधायकों को तीसरी किश्त उपलब्ध कराई गई है, जबकि सामान्य क्षेत्रों के विधायकों को अब तक दूसरी किश्त मिली है। सर्दियों और बर्फबारी से प्रभावित होने वाले इलाकों में विकास कार्य समय पर पूरे करने के लिहाज से यह व्यवस्था अहम मानी जा रही है।

आधी हुई विधायक निधि

वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में विधायक क्षेत्र विकास निधि को पहले के 2.20 करोड़ रुपये से घटाकर 1.10 करोड़ रुपये सालाना किया गया है।

यह भी पढ़ें- बड़ी खबर : कैबिनेट विस्तार पर CM सुक्खू बोले- जल्द होगा ऐलान, मंत्रियों के विभाग भी बदले जाएंगे

बजट में सरकार ने वित्तीय अनुशासन और उपलब्ध संसाधनों के अनुरूप खर्च को नियंत्रित करने पर जोर दिया है। इसके बावजूद निधि की किश्तें जारी रखने का फैसला यह दर्शाता है कि स्थानीय स्तर के छोटे विकास कार्यों के लिए राशि उपलब्ध कराने की व्यवस्था जारी रखी गई है।

गांवों के छोटे विकास कार्यों में उपयोग

विधायक क्षेत्र विकास निधि से आमतौर पर संपर्क मार्ग, छोटी सड़कें, पैदल पुल, पेयजल से जुड़ी लघु योजनाएं, महिला मंडलों के भवन सहित कई स्थानीय जरूरतों से जुड़े कार्य किए जाते हैं। ऐसे कामों के लिए यह निधि ग्रामीण क्षेत्रों में महत्वपूर्ण मानी जाती है।

यह भी पढ़ें : हिमाचल में घूमने निकले पांच दोस्तों के साथ दर्दनाक हाद**सा- खाई में गिरी कार, 2 ने तोड़ा दम

विधानसभा में भी उठा था मुद्दा

निधि में कटौती को लेकर विधानसभा में सत्ता और विपक्ष के विधायकों ने अलग-अलग समय पर चिंता जताई थी। भाजपा विधायक सतपाल सिंह सत्ती ने कटौती पर सवाल उठाते हुए इसे ग्रामीण विकास पर असर डालने वाला फैसला बताया था। वहीं लाहुल-स्पीति से कांग्रेस विधायक अनुराधा राणा ने भी सरकार से फैसले पर पुनर्विचार का आग्रह किया था।

यह भी पढ़ें- हिमाचल में सख्त नियम लागू : दुकान में दिखी प्लास्टिक की थैली- तो सीधे कटेगा 25 हजार चालान

आर्थिक दबाव के बीच जारी हुई राशि

हिमाचल का 2026-27 का बजट 54,928 करोड़ रुपये का है, जो पिछले साल के 58,514 करोड़ रुपये के बजट से 3,586 करोड़ रुपये कम है। सरकार ने राजस्व घाटा अनुदान बंद होने से सालाना करीब 8,105 करोड़ रुपये के प्रभाव का भी उल्लेख किया है। बजट में राजस्व घाटा 6,577 करोड़ और राजकोषीय घाटा 9,698 करोड़ रुपये अनुमानित है।

नोट : ऐसी ही तेज़, सटीक और ज़मीनी खबरों से जुड़े रहने के लिए इस लिंक पर क्लिक कर हमारे फेसबुक पेज को फॉलो करें

ट्रेंडिंग न्यूज़

LAUGH CLUB

संबंधित आलेख