#अपराध
September 22, 2026
हिमाचल: Facebook पर मिला ऑफर, झांसे में आया रिटायर्ड अफसर- लगा 1.23 करोड़ का चूना
सोशल मीडिया से शुरू हुआ पूरा खेल
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कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में साइबर ठगी का एक बड़ा मामला सामने आया है। पालमपुर निवासी एक सेवानिवृत्त अधिकारी कथित ऑनलाइन निवेश घोटाले में 1 करोड़ 23 लाख 25 हजार रुपये गंवा बैठे। ठगों ने करीब डेढ़ महीने के दौरान अलग-अलग खातों में 70 से अधिक बार रकम ट्रांसफर करवाई। इस दौरान पीड़ित के साथ-साथ उसके रिश्तेदारों से भी निवेश के नाम पर पैसे लगवाए गए।
मामले की शिकायत मिलने के बाद धर्मशाला स्थित साइबर क्राइम पुलिस थाने में संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। शिकायत के अनुसार, पीड़ित से संपर्क सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक के माध्यम से किया गया।
आरोपियों ने उन्हें एक ऑनलाइन निवेश व्यवस्था से जुड़ने का प्रस्ताव दिया और कम समय में निवेश की रकम को कई गुना बढ़ाने का दावा किया। इसके बाद पीड़ित को एक ऑनलाइन ग्रुप में शामिल किया गया। इस ग्रुप में लगातार निवेश से होने वाले कथित मुनाफे के स्क्रीनशॉट और संदेश साझा किए जाते थे। इससे ऐसा माहौल बनाया गया कि कई अन्य लोग भी उसी प्लेटफॉर्म से कमाई कर रहे हैं।
साइबर ठगों ने शुरुआत में अपेक्षाकृत छोटी रकम निवेश करवाकर पीड़ित का भरोसा हासिल किया। फर्जी निवेश पोर्टल पर रकम के साथ कुछ हजार रुपये का मुनाफा भी दिखाया गया। शिकायत के मुताबिक शुरुआती स्तर पर निकासी की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई। यही प्रक्रिया आगे बड़ी रकम निवेश कराने का आधार बनी। भरोसा बढ़ने के बाद पीड़ित से अलग-अलग चरणों में ज्यादा रकम जमा करवाई जाने लगी।
जब निवेश की रकम काफी बढ़ गई तो ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर पीड़ित के खाते में कथित मुनाफा भी करोड़ों रुपये तक दिखाया जाने लगा। इससे उन्हें लगा कि निवेश योजना से वास्तव में बड़ा रिटर्न मिल रहा है। इसके बाद जब उन्होंने अपनी रकम और मुनाफा निकालने का प्रयास किया तो निकासी की प्रक्रिया रोक दी गई। आरोपियों ने पैसे निकालने के लिए अलग-अलग कारण बताते हुए अतिरिक्त रकम जमा करने को कहा।
शिकायत के अनुसार, ठगों ने पीड़ित को इतना भरोसा दिला दिया था कि उन्होंने इस निवेश में अपने रिश्तेदारों का पैसा भी लगवा दिया। करीब डेढ़ महीने के भीतर अलग-अलग बैंक खातों में 70 से ज्यादा लेनदेन करवाए गए और कुल रकम 1.23 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गई।
बाद में निकासी नहीं होने और लगातार नई रकम जमा करने के दबाव के बीच पीड़ित को कथित धोखाधड़ी का संदेह हुआ। इसके बाद उन्होंने साइबर पुलिस से शिकायत की। पुलिस अब बैंक खातों, लेनदेन, सोशल मीडिया संपर्क, ऑनलाइन ग्रुप और फर्जी निवेश प्लेटफॉर्म से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड की जांच कर रही है। आरोपियों की पहचान और रकम की आगे की ट्रेल का पता लगाने के लिए जांच जारी है।