#हिमाचल
November 30, 2025
पूरे हिमाचल पर खतरा- भूकंप के सबसे खतरनाक जोन में शामिल हुआ, हाई रिस्क पर ये जिले
पूरा राज्य जोन VI में, वैज्ञानिकों ने जताई बड़ी आशंका
शेयर करें:

शिमला। आप जिस शहर में रह रहे हैं, वह सुरक्षित है शायद नहीं भारत के नए भूकंपीय मानचित्र ने एक ऐसा सच उजागर किया है जिसने वैज्ञानिकों से लेकर प्रशासन तक सबकी नींद उड़ा दी है।भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने 2025 के लिए देश का नया 'भूकंपीय क्षेत्रीकरण मानचित्र' (Seismic Zoning Map) जारी किया है।
इस नए नक्शे ने वैज्ञानिकों और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि अब देश का एक बड़ा हिस्सा 'हाई रिस्क' यानी भारी खतरे वाले क्षेत्र में आ गया है। पहली बार हिमालय को ‘अत्यंत खतरनाक जोन’- Zone VI- घोषित कर दिया गया है। इसका मतलब साफ है: धरती अब पहले से कहीं ज्यादा बेचैन है और आने वाला समय विनाशकारी झटकों से भरा हो सकता है।
शिमला, मंडी, कांगड़ा, कुल्लू, चंबा, किन्नौर, लाहौल-स्पीति शामिल हैं सीधे देश के सबसे खतरनाक भूकंप ज़ोन-VI में डाल दिया गया है। यानी अब वैज्ञानिक साफ़ चेतावनी दे रहे हैं कि हिमाचल वह इलाका है जहां कभी भी बड़ा झटका जान-माल को भारी नुकसान पहुंचा सकता है।
भारत ने भूकंप डिजाइन कोड (BIS-2025) के तहत पूरा देश नए सिस्मिक डेटा, फॉल्ट लाइन्स, विवर्तनिकी और ऐतिहासिक भूकंप रिकॉर्ड के आधार पर री-ज़ोनिंग किया है। पहले देश सिर्फ चार ज़ोन- II, III, IV और V में बंटा था। अब एक नया Zone-VI जोड़ा गया है जो सबसे खतरनाक माना गया है।

वैज्ञानिकों के मुताबिक, हिमालयी क्षेत्र में टेक्टोनिक प्लेट के टकराव से दबाव लगातार बढ़ रहा है। 200 साल से कोई बड़ा भूकंप न आने के कारण खतरा और ज्यादा है क्योंकि ऊर्जा लगातार जमा हो रही है।
पहले 59% भूमि भूकंप खतरों में थी, अब यह 61% हो गई। वहीं देश की 75% आबादी अब सिस्मिकली एक्टिव ज़ोन में रहती है। ज़ोन बाउंड्री अब प्रशासनिक सीमाओं से नहीं, भूवैज्ञानिक फॉल्ट लाइन्स से तय होंगी।
1. जोन II: बहुत कम खतरा (11% भूमि), दक्षिण भारत के कुछ हिस्से.
2. जोन III: मध्यम खतरा (30% भूमि), मध्य भारत.
3. जोन IV: उच्च खतरा (18% भूमि), दिल्ली, मुंबई जैसे शहर.
4. जोन V: बहुत उच्च खतरा (11% भूमि), गुजरात का कच्छ, पूर्वोत्तर.
5. जोन VI: सबसे ऊंचा खतरा (नया), पूरा हिमालय- जम्मू-कश्मीर से अरुणाचल तक.
1. उच्च जोखिम वाले इलाकों में मजबूत और सुरक्षित निर्माण को बढ़ावा मिलेगा.
2. नरम मिट्टी या सक्रिय भ्रंशों (फॉल्ट लाइन्स) के पास नई बस्तियों और इमारतों के विस्तार पर रोक लग सकेगी.
3. हिमालयी राज्यों में एक जैसे भवन सुरक्षा मानक लागू किए जा सकेंगे, जिससे नुकसान कम करने में मदद मिलेगी.
सरल शब्दों में, यह नया मानचित्र बताता है कि भारत का बड़ा हिस्सा भूकंप के खतरे में है और अब पहले से ज्यादा सावधानी और बेहतर निर्माण की जरूरत है. नया भूकंप मानचित्र साफ़ संकेत देता है कि हिमाचल आने वाले समय में बड़ी चुनौतियों का सामना करेगा। अब प्रशासन, सरकार और जनता- तीनों को बेहतर निर्माण, मजबूत स्ट्रक्चर और अवेयरनेस पर ध्यान देना होगा।