कांगड़ा। देवभूमि हिमाचल को वीरभूमि के नाम से भी जाना जाता है। सूबे के कई वीर जवान अपनी जान की परवाह किए बिना सरहद पर अपना कर्तव्य निभा रहे हैं। प्रदेश के ना जाने कितने वीरों ने देश सेवा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए हैं।
शहीदों के परिजनों को खानी पड़ती हैं ठोकरें
सरहदों पर देश की रक्षा के लिए डटे वीर जवानों का हक बनता है कि उनके परिजनों को देश के हर कोने में मान-सम्मान व सुरक्षा मिले। मगर ऐसा नहीं होता है, बहुत बार ऐसे मामले सामने आते हैं जब शहीदों के परिजनों को दर-दर की ठोकरें खानी पड़ती हैं। ऐसा ही एक मामला हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले से सामने आया है।
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टांडा में कारगिल शहीद की मां का दुखद निधन
दरअसल, डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज टांडा में कारिगल शहीर बिजेंद्र सिंह की मां संतोष कुमारी (73) का दुखद निधन हो गया है। परिजनों ने चिकित्सकों पर उपचार में कोताही के आरोप लगाए हैं।
संतोष कुमारी के बेटे विजय कुमार ने बताया कि शुक्रवार रात को संतोष कुमारी की तबीयत अचानक बिगड़ गई। जिसके बाद परिजनों द्वारा उन्हें उपचार के लिए देहरा ले जाया गया। जहां से डॉक्टर ने रात को ही उन्हें TMC रेफर कर दिया।
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6 घंटे तक नहीं आया कोई डॉक्टर
विजय ने बताया कि वह सुबह करीब 3 बजे गंभीर अवस्था में अपनी मां को लेकर TMC पहुंचे। जबकि, यहां 6 घंटे तक कोई डॉक्टर उन्हें देखने तक नहीं आया। विजय कुमार ने एमरजेंसी में तैनात चिकित्सकों पर इलाज में कोताही बरतने का आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी मां को एमरजेंसी में कोई उपचार नहीं दिया गया।
बेहद नाजुक हो गई थी हालत
उन्होंने कहा कि मां की हालत बेहद नाजुक हो गई थी, बावजूद इसके डॉक्टरों ने ना तो उन्हें वेंटीलेटर पर रखा और ना ही ICU केयर दी। इतना ही नहीं मां की देखरेख के लिए किसी ने कंसलटेंट तक को नहीं बुलाया गया। एमरजेंसी की हालत में भी उन्हें रिपोर्ट के लिए लाइन में लगाया गया।
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डॉक्टर 9 बजे उन्हें चेक करने आया और फिर उसने इमरजेंसी से संतोष को ICU में रेफर कर दिया। मगर ICU में शिफ्ट करने से पहले ही उनकी मौत हो चुकी थी।
समय से इलाज मिलता तो बच जाती जान
विजय ने कहा TMC की इमरजेंसी में डॉक्टर को अमर शहीद बिजेंद्र सिंह की माता होने का रेफरेंस देने के बावजूद किसी ने गंभीर नहीं समझा। उन्होंने मां की मौत के लिए TMC में समय पर उपचार ना मिलने के लिए ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर को जिम्मेदार ठहराया है। विजय सिंह ने CM सुक्खू और अस्पताल प्रशासन से एमरजेंसी में तैनात डॉक्टर पर उपचार में कोताही बरतने पर हुई मौत पर संज्ञान लेने की गुहार लगाई है।