#अपराध
March 11, 2026
हिमाचल में आ गया चिट्टे का बाप : सिरमौर की लड़की से बरामद हुआ 1 करोड़ का नशा..
एक LSD टैब की कीमत लगभग 15 से 18 हजार रुपये
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में नशे का जाल लगातार गहराता जा रहा है और सबसे चिंताजनक बात यह है कि इसमें प्रदेश के युवा भी तेजी से फंसते जा रहे हैं। इस कड़ी मे राजधानी शिमला में करीब एक करोड़ रुपये कीमत की महंगी साइकेडेलिक ड्रग LSD की बड़ी खेप बरामद की है। जिसमें प्रदेश के जिला सिरमौर की एक युवती सहित पंजाब के एक युवक को पुलिस द्वारा अरेस्ट किया गया है।
जानकारी के अनुसार, राजधानी शिमला में पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि न्यू शिमला थाना क्षेत्र के बीसीएस स्थित हिम निवास इलाके में कुछ लोग नशीले पदार्थों की तस्करी से जुड़े हुए हैं। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने मौके पर दबिश दी और तलाशी अभियान चलाया।
तलाशी के दौरान पुलिस को 562 LSD स्ट्रिप्स बरामद हुईं, जिनका कुल वजन करीब 11.5 ग्राम बताया जा रहा है। इतनी बड़ी मात्रा में महंगी ड्रग मिलने से पुलिस भी सतर्क हो गई है।
पुलिस के अनुसार, कुल 562 एलएसडी स्ट्रिप्स बरामद हुई हैं। जिनकी कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में करीब एक करोड़ रुपये आंकी गई है। LSD आमतौर पर डाक टिकट जैसे छोटे कागज़ के टुकड़ों पर लगाया जाता है, जिनका आकार करीब 5 से 6 मिलीमीटर होता है। इतनी बड़ी मात्रा हथेली जितने छोटे कागज़ में भी छिपाई जा सकती है, जिससे इसकी तस्करी आसान हो जाती है। अनुमान के मुताबिक एक LSD टैब की कीमत लगभग 15 से 18 हजार रुपये तक हो सकती है।
पुलिस कार्रवाई के दौरान दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इनमें संदीप शर्मा (40) पुत्र स्वर्गीय शिव राम शर्मा, तहसील धर्मकोट जिला मोगा, पंजाब तथा प्रिया शर्मा (26) पुत्री स्वर्गीय अनिल शर्मा ददाहू, जिला सिरमौर शामिल हैं।
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि मुख्य आरोपी संदीप शर्मा लंबे समय से इस अवैध कारोबार में सक्रिय था और करीब दस वर्षों से LSD की तस्करी से जुड़ा हुआ था, जिस पर करीब 33 मामले पहले से दर्ज हैं।
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ NDPS एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि बरामद मात्रा व्यावसायिक श्रेणी में आती है, जिसके तहत दोषी पाए जाने पर आरोपी को 20 साल तक की सजा हो सकती है। फिलहाल पुलिस इस पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी हुई है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि यह नशा कहां से लाया गया था और इसे किन-किन स्थानों पर सप्लाई किया जाना था। इसके साथ ही इस तस्करी से जुड़े अन्य लोगों की भी तलाश की जा रही है।
LSD यानी लाइसरजिक एसिड डाइएथाइलामाइड एक सिंथेटिक साइकेडेलिक ड्रग है, जो सीधे दिमाग और नर्वस सिस्टम पर असर करती है। इसे पहली बार 1938 में स्विट्ज़रलैंड के वैज्ञानिक Albert Hofmann ने विकसित किया था। आमतौर पर LSD को छोटे कागज़ के टुकड़ों (ब्लॉटिंग पेपर), माइक्रोडॉट या तरल बूंद के रूप में लिया जाता है। जो छोटे कागज़ के टुकड़े होते हैं, उन्हें LSD स्ट्रिप या टैब कहा जाता है।
इस ड्रग के सेवन के बाद व्यक्ति को भ्रम (Hallucinations) होने लगते हैं। कई बार चीजें वास्तविकता से अलग दिखाई देने लगती हैं, रंग ज्यादा चमकीले लगते हैं और आवाजों का एहसास भी अलग महसूस होता है। समय का अनुभव भी असामान्य हो सकता है। हालांकि कई बार इसका असर बेहद खतरनाक भी हो सकता है। इसे लेने वाले व्यक्ति को डर, घबराहट, मानसिक अस्थिरता और आत्मघाती विचार तक आ सकते हैं। इसी वजह से इसे बेहद खतरनाक नशीला पदार्थ माना जाता है।