#अपराध
April 13, 2026
हिमाचल में फैले चिट्टा नेटवर्क का मास्टरमाइंड चंडीगढ़ से गिरफ्तार, लखनऊ से चला रहा था ड्रग रैकेट
नशा बेचने के लिए युवाओं का करता था इस्तेमाल
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में नशे के खिलाफ पुलिस का अभियान लगातार तेज होता जा रहा है। इसी कड़ी में शिमला जिले से एक बड़ी कार्रवाई सामने आई है, जहां पुलिस ने नशे के कारोबार पर बड़ा वार करते हुए मुख्य सप्लायर को गिरफ्तार कर लिया है। इस कार्रवाई को नशा तस्करी के नेटवर्क के खिलाफ अहम सफलता माना जा रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मामला जिला शिमला के रोहड़ू का है। यहां पर बीते 15 मार्च 2026 को थाना रोहड़ू की पुलिस टीम गश्त पर थी। इसी दौरान उन्हें एक युवक संदिग्ध हालत में घूमता हुआ मिला। जब पुलिस ने उसकी तलाशी ली, तो उसके पास से करीब 9.17 ग्राम चिट्टा (हेरोइन) बरामद हुआ।
पूछताछ में उसकी पहचान सार्थक उम्र 29 साल के रूप में हुई, जो रोहड़ू के समाला गांव का रहने वाला है। पुलिस ने तुरंत उसे गिरफ्तार कर लिया और NDPS एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
इसके बाद पुलिस ने इस मामले को हल्के में नहीं लिया, बल्कि गहराई से जांच शुरू की। आरोपी के मोबाइल फोन, बैंक खाते और कॉल डिटेल्स को खंगाला गया। तकनीकी जांच में कई अहम सुराग मिले, जिससे पता चला कि यह सिर्फ एक व्यक्ति का मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक पूरा संगठित गिरोह काम कर रहा है।
जांच में सामने आया कि रोहड़ू और चिड़गांव इलाके में चिट्टा सप्लाई करने वाला एक नेटवर्क सक्रिय है, जिसे बाहर राज्य से ऑपरेट किया जा रहा है। पुलिस को डिजिटल और वित्तीय रिकॉर्ड के जरिए यह भी पता चला कि इस नेटवर्क का मुख्य सरगना अमित गुप्ता नाम का व्यक्ति है, जो मूल रूप से उत्तर प्रदेश का रहने वाला है और बाहर से पूरे नेटवर्क को चला रहा था।
बताया जा रहा है कि अमित गुप्ता खुद सीधे नशा बेचने नहीं आता था। वह स्थानीय युवकों का इस्तेमाल करता था। वह अलग-अलग जगहों पर थोड़ी-थोड़ी मात्रा में चिट्टा रखवाता था और फिर मोबाइल के जरिए लोकेशन भेजकर डिलीवरी करवाता था, ताकि किसी को शक न हो और पकड़े जाने का खतरा भी कम रहे।
पुलिस ने आरोपी को पकड़ने के लिए लखनऊ में भी छापेमारी की, लेकिन वह वहां से फरार हो गया। इसके बाद पुलिस ने उसकी लगातार निगरानी रखी और आखिरकार 11 अप्रैल को उसे चंडीगढ़ से गिरफ्तार करने में सफलता हासिल कर ली।
गिरफ्तारी के बाद आरोपी को अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे 14 अप्रैल 2026 तक पुलिस रिमांड पर भेजा गया है, ताकि उससे पूछताछ कर नेटवर्क के बाकी लोगों तक पहुंचा जा सके।
SSP गौरव सिंह ने बताया कि शिमला पुलिस नशे के खिलाफ लगातार अभियान चला रही है और इस केस में सरगना तक पहुंचना एक बड़ी कामयाबी है। उन्होंने कहा कि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भी पहचान की जा रही है और जल्द ही और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
पुलिस का यह भी कहना है कि युवाओं को नशे से बचाने के लिए अब तकनीकी और वैज्ञानिक तरीके से जांच को और मजबूत किया जा रहा है। बैंक ट्रांजैक्शन, कॉल रिकॉर्ड और डिजिटल सबूतों की मदद से ऐसे नेटवर्क को पकड़ने में काफी मदद मिल रही है।