#अपराध

November 30, 2025

हिमाचल : रिहैब से लौटा था रोहित- दोस्तों संग फिर लिया चिट्टा, होटल में पड़ा मिला

मंडी में मंडरा रहा ‘चिट्टा’ का खतरा अभिभावकों में बढ़ी दहशत

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Himachal Drug Network

मंडी। हिमाचल प्रदेश में छोटी काशी कहे जाने वाले मंडी जिला में एक बार फिर नशे का दानव सर उठा रहा है। बीते दो दिनों के भीतर दो युवाओं की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया है। दोनों ही मामलों में यह आशंका गहरी हो गई है कि युवकों की जान चिट्टा यानी हेरोइन की वजह से गई है।

नशे के ओवरडोज़ का परिणाम

हालांकि, अंतिम पुष्टि फॉरेंसिक रिपोर्ट करेगी, लेकिन घटनास्थल से मिले संकेत और परिस्थितियाँ साफ़ इशारा दे रही हैं कि मौतें नशे के ओवरडोज़ का परिणाम हैं। इन घटनाओं ने न सिर्फ स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ाई है, बल्कि अभिभावक अपने बच्चों की सुरक्षा और भविष्य को लेकर बेहद चिंतित हैं। अचानक हुई इन मौतों ने सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या मंडी में चिट्टा नेटवर्क फिर सक्रिय हो चुका है और क्या पुलिस की एंटी-ड्रग व्यवस्था कहीं न कहीं ढीली पड़ती जा रही है।

होटल के कमरे में मिली युवक की देह

पहली मौत मंगवाईं क्षेत्र के एक होटल में हुई। घुमारवीं निवासी रोहित अपने दो दोस्तों के साथ होटल में ठहरा था। बताया जा रहा है कि रोहित कुछ समय पहले ही नशा मुक्ति केंद्र से इलाज करवाकर लौटा था, लेकिन इस बार वह चिट्टे की चपेट से निकल नहीं पाया।

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होटल स्टाफ को तब शक हुआ जब लगातार घंटों तक कमरे से कोई हलचल नहीं हुई। दरवाज़ा खोलने पर रोहित अचेत मिला और उसके दोस्त मौके से भाग चुके थे। कमरे से ऐसे सैंपल मिले हैं, जिन्हें पुलिस ने फॉरेंसिक लैब भेजा है। प्राथमिक जांच में अनुमान है कि रोहित ने चिट्टा लिया था और उसकी तबीयत बिगड़ने पर दोस्त उसे होटल में ही छोड़कर भाग गए। यह घटना स्पष्ट करती है कि नशा मुक्ति केंद्रों से बाहर आने के बाद भी कुछ युवक दोबारा उसी दलदल में उतर जाते हैं और इस बार कीमत जान देकर चुकानी पड़ती है।

दोस्त की लापरवाही भी बनी कारण

दूसरा मामला मैरमसीत क्षेत्र का है। यहाँ संजय कुमार नामक युवक अपने दोस्त शशिकांत के साथ था। प्रारंभिक पूछताछ में शशिकांत ने बताया कि दोनों ने पहले शराब पी और बाद में टीन की ढक्कन में चिट्टा घोलकर इंजेक्शन तैयार किया। दोनों ने चिट्टा इंजेक्ट किया, जिसके बाद संजय बार-बार बेहोशी में जाने लगा।

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दोस्त ने उसे कई बार उठाने की कोशिश की, लेकिन जब संजय ने प्रतिक्रिया नहीं दी, तब भी उसने न तो पड़ोसियों को बताया और न ही परिवार को सूचना दी। समय रहते मदद मिल जाती, तो संजय की जान शायद बच सकती थी। यह लापरवाही अब संजय की मौत के रूप में सामने आई है।

एंटी-ड्रग अभियान पर उठे सवाल

इन लगातार मौतों के बाद पुलिस की एंटी-ड्रग कार्रवाइयों पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। पिछले सप्ताह पांच उपमंडलों में छापेमारी हुई, लेकिन पुलिस खाली हाथ लौट आई। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब पुलिस अभियान चलाती है, उससे पहले ही तस्करों को पूरी जानकारी मिल जाती है जिससे वे माल हटाकर और खुद छिपकर बच निकलते हैं। यह भी सवाल उठ रहा है कि मंडी और सुंदरनगर के बीच नशे की सप्लाई कौन चला रहा है? ये युवक चिट्टा किससे खरीदते थे? तस्करों को जमानत मिलने के बाद वे दोबारा कैसे सक्रिय हो जाते हैं?

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ड्रग माफिया पर बड़ी कार्रवाई का भरोसा

स्थानीय सूत्र बताते हैं कि, “मोमबत्ती” नाम का कुख्यात तस्कर, जिसे लगभग आठ महीनों बाद बेल मिली थी, फिर से नशे के कारोबार में जुट गई है। इसी तरह गोली और राहुल जैसे कई नाम पुलिस रिकॉर्ड में पहले से दर्ज हैं और उनके फिर सक्रिय होने के संकेत मिल रहे हैं।

उधर, एसपी मंडी साक्षी वर्मा ने दोनों मृतक युवकों के मामलों की जांच के आदेश दे दिए हैं। उन्होंने दावा किया है कि जिला में नशा नेटवर्क को तोड़ने के लिए जल्द ही सख्त अभियान चलेगा और ड्रग माफिया के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल मंडी में दो लगातार मौतों ने एक बार फिर चिंताजनक संदेश दिया है कि चिट्टा का खतरा खत्म नहीं हुआ है।

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