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August 6, 2026

हिमाचल : शराब पीकर पढ़ाने आता था टीचर, परेशान बच्चों ने की शिकायत- अब गई नौकरी

विभागीय जांच में आरोप माने गए सिद्ध

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Himachal Education Department

शिमला। हिमाचल प्रदेश शिक्षा विभाग ने अनुशासनहीनता और विद्यार्थियों के प्रति अनुचित व्यवहार के एक गंभीर मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए एक सरकारी शिक्षक को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने का फैसला किया है। शिक्षा विभाग का कहना है कि एक शिक्षक से अनुशासित, जिम्मेदार और आदर्श आचरण की अपेक्षा की जाती है, इसलिए इस तरह के मामलों में सख्त कदम उठाना आवश्यक है।

स्कूल में छात्रों से दुर्व्यवहार के आरोप

जानकारी के अनुसार, विभागीय जांच में आरोपों की पुष्टि होने के बाद टीजीटी नॉन मेडिकल मोहिंदर सिंह के खिलाफ यह कार्रवाई की गई। शिक्षा निदेशालय की ओर से जारी आदेश के अनुसार संबंधित शिक्षक के खिलाफ केंद्रीय सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1965 के तहत विभागीय जांच शुरू की गई थी। जांच के दौरान कई आरोपों की पड़ताल की गई और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निर्णय लिया गया।

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विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार शिक्षक पर आरोप था कि वह कई बार शराब के नशे में विद्यालय पहुंचे। इसके अलावा उन पर बिना अनुमति ड्यूटी से अनुपस्थित रहने, सरकारी जिम्मेदारियों की अनदेखी करने और विद्यार्थियों के साथ अभद्र व्यवहार तथा मारपीट करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे। शिक्षा विभाग ने इन आरोपों को सरकारी कर्मचारी आचरण नियमों का गंभीर उल्लंघन माना।

विभागीय जांच में आरोप माने गए सिद्ध

जांच के दौरान शिक्षक ने अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों से इनकार किया। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने लंबे समय तक दुर्गम और कठिन क्षेत्रों में पूरी ईमानदारी से सेवाएं दी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वह पैंक्रियाटाइटिस और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से पीड़ित हैं, जिसके कारण उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को सही नहीं माना जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने शिकायत को दुर्भावनापूर्ण बताते हुए प्रारंभिक जांच प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए और उपलब्ध कराए गए वीडियो साक्ष्यों को कथित रूप से छेड़छाड़ किया हुआ बताया।

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विभागीय जांच अधिकारी ने गवाहों के बयान, दस्तावेजों और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों का विस्तृत परीक्षण किया। जांच रिपोर्ट में कहा गया कि शिक्षक की ओर से बीमारी का हवाला दिए जाने के बावजूद ऐसा कोई ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया, जिससे शराब के नशे में विद्यालय आने, सरकारी कार्यों की उपेक्षा करने या विद्यार्थियों के साथ दुर्व्यवहार के आरोपों से उन्हें पूरी तरह मुक्त माना जा सके। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि शिकायत को झूठा या साक्ष्यों को फर्जी साबित करने के लिए भी कोई विश्वसनीय सामग्री उपलब्ध नहीं कराई गई।

अनिवार्य सेवानिवृत्ति का फैसला

शिक्षा विभाग ने अपने आदेश में कहा कि एक सरकारी शिक्षक केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं होता, बल्कि विद्यार्थियों के लिए अनुशासन, नैतिकता और जिम्मेदारी का उदाहरण भी होता है। ऐसे में विद्यालय में अनुचित व्यवहार और कर्तव्य की उपेक्षा शिक्षा व्यवस्था की साख को प्रभावित करती है। हालांकि विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में वित्तीय अनियमितता या भ्रष्टाचार का कोई आरोप सिद्ध नहीं हुआ।

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इसी कारण सेवा से बर्खास्त करने के बजाय केंद्रीय सिविल सेवा (सीसीए) नियम, 1965 के तहत अनिवार्य सेवानिवृत्ति का दंड उचित माना गया। शिक्षा निदेशक आशीष कोहली द्वारा जारी आदेश के अनुसार टीजीटी (नॉन मेडिकल) मोहिंदर सिंह, जो राजकीय उच्च विद्यालय कंड (कॉम्प्लेक्स जीएमएसएसएस डारी), जिला कांगड़ा में कार्यरत थे, उन्हें 31 जुलाई 2026 से अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त किया गया है। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि उन्हें नियमानुसार पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभ प्रदान किए जाएंगे।

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