#अपराध
June 22, 2026
हिमाचल: इस क्षेत्र से कुछ दिनों में गायब हो गई कई लड़कियां, 18 से भी कम है उम्र; चिंता में परिजन
सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव को ठहराया जा रहा दोषी, परेशानी में अभिभावक
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बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिला के घुमारवीं क्षेत्र से एक बेहद चौंकाने वाली और डराने वाली खबर सामने आई है। इस शांत माने जाने वाले इलाके से पिछले कुछ दिनों के भीतर कई नाबालिग लड़कियां अचानक लापता हो गई हैं या अपने घरों से भाग गई हैं। एक ही क्षेत्र से लगातार सामने आ रहे इन गंभीर मामलों ने न सिर्फ पुलिस प्रशासन के होश उड़ा दिए हैं, बल्कि क्षेत्र के अभिभावकों की रातों की नींद और दिन का चैन भी छीन लिया है। गायब होने वाली इन बेटियों में से अधिकतर लड़कियां नाबालिग बताई जा रही हैं, जिसके कारण इस घटना को सीधे तौर पर सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव और इसके मायाजाल से जोड़कर देखा जा रहा है।
जानकारी के मुताबिक अकेले घुमारवीं क्षेत्र से हाल ही के दिनों में नाबालिग लड़कियों के गायब होने के सात से अधिक सनसनीखेज मामले दर्ज हो चुके हैं। घरों से अचानक लापता होने वाली इन किशोरियों में कुछ स्थानीय मूल निवासी परिवारों की बेटियां हैं] तो कुछ यहां रोजी-रोटी कमाने आए प्रवासी परिवारों से ताल्लुक रखती हैं। जिस तेजी से एक ही सब-डिवीजन से एक के बाद एक लड़कियां गायब हो रही हैं] उसने पूरे बिलासपुर जिले की सामाजिक और पारिवारिक सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
घुमारवीं क्षेत्र में सामने आए मामलों के बाद पुलिस भी पूरी तरह सक्रिय हो गई है। कई मामलों में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए लापता लड़कियों का पता लगाने में सफलता हासिल की है। जानकारी के अनुसार, एक नाबालिग लड़की को पश्चिम बंगाल के कोलकाता से सुरक्षित बरामद किया गया, जबकि दो अन्य लड़कियों को चंडीगढ़ से खोज निकाला गया। पुलिस की इस कार्रवाई से कुछ परिवारों को राहत जरूर मिली है, लेकिन लगातार नए मामलों के सामने आने से चिंता बरकरार है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर ऐसी क्या परिस्थितियां बन रही हैं कि कम उम्र की लड़कियां घर छोड़ने जैसे कदम उठा रही हैं। समाज में इस विषय को लेकर गंभीर चर्चा शुरू हो गई है। कई लोग इसके पीछे सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव को एक कारण मान रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मोबाइल फोन और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए होने वाली अनजान लोगों से बातचीत कई बार बच्चों को गलत दिशा में ले जा सकती है। हालांकि हर मामले में कारण अलग हो सकते हैं और जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
लगातार सामने आ रही घटनाओं के बाद क्षेत्र के अभिभावकों में डर और असुरक्षा की भावना बढ़ गई है। माता-पिता अब अपने बच्चों की गतिविधियों पर पहले से अधिक नजर रखने का प्रयास कर रहे हैं। विशेषकर उन परिवारों की चिंता अधिक बढ़ गई है, जहां माता-पिता रोजी-रोटी कमाने के लिए सुबह घर से निकल जाते हैं और दिनभर बच्चे घर पर रहते हैं। ऐसे परिवारों के सामने बच्चों की निगरानी और सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है।
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इन घटनाओं ने केवल कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि सामाजिक और पारिवारिक माहौल का भी मुद्दा खड़ा कर दिया है। लोग यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या बच्चों और अभिभावकों के बीच संवाद की कमी, गलत संगति, मानसिक दबाव या सोशल मीडिया का बढ़ता प्रभाव इन घटनाओं के पीछे भूमिका निभा रहा है। समाज के विभिन्न वर्गों का मानना है कि बच्चों को समय देना, उनकी समस्याओं को समझना और डिजिटल गतिविधियों पर संतुलित निगरानी रखना आज पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गया है।
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विशेषज्ञों का मानना है कि केवल पुलिस कार्रवाई से इस समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। इसके लिए परिवार, स्कूल, समाज और प्रशासन सभी को मिलकर काम करना होगा। बच्चों को ऑनलाइन सुरक्षा, सही संगति और संभावित खतरों के बारे में जागरूक करना समय की जरूरत बन चुका है। घुमारवीं में सामने आए लगातार मामलों ने एक गंभीर चेतावनी दी है कि बदलते सामाजिक और डिजिटल माहौल में बच्चों की सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। फिलहाल पुलिस सभी मामलों की जांच में जुटी हुई है और अभिभावकों से भी अपने बच्चों पर नजर रखने की अपील की जा रही है।