#अपराध
November 25, 2025
हिमाचल में ED की बड़ी कार्रवाई : सरकारी अधिकारी की 1.84 करोड़ की संपति कुर्क, जानें मामला
सरकारी अधिकारी ने अपने पद का किया दुरुपयोग
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सिरमौर। प्रवर्तन निदेशालय ED की शिमला इकाई ने एक बड़ी कार्रवाई की है। पेंशन घोटाले के मामले में ED ने एक पूर्व सरकारी अधिकारी की 1.84 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति को कुर्क कर लिया है।
ED ने ये कार्रवाई उस पुलिस FIR से जुड़े मानिटरिंग के बाद की, जो कुछ समय पहले नाहन थाना परिसर में दर्ज की गई थी। ED ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत अहम कदम उठाते हुए ये बड़ी कार्रवाई की।
ED के अनुसार, कुर्क की गई संपत्ति पंजाब के मोहाली जिले के खरड़ स्थित सनी एन्क्लेव में है। लगभग 200 वर्ग गज क्षेत्रफल में फैली यह संपत्ति न केवल एक आवासीय प्लॉट है, बल्कि उस पर निर्माण भी किया गया है।
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि यह पूरी संपत्ति उन पैसों से खरीदी गई, जो कथित तौर पर भ्रष्टाचार और अन्य अवैध माध्यमों से हासिल किए गए थे। पुलिस FIR में नाहन के पूर्व जिला कोषागार अधिकारी DTO सतीश कुमार पर भारतीय दंड संहिता (IPC) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की कई धाराओं के तहत गंभीर आरोप लगाए गए थे।
जांच के बाद 31 मई 2023 को इस मामले में आरोप पत्र दायर किया गया था, जिसमें सरकारी धन के गबन, फर्जीवाड़े और अनियमित वित्तीय लेन-देन से जुड़ी विस्तृत जानकारी शामिल थी। अदालत ने बीते महीनों में सुनवाई पूरी करते हुए सतीश कुमार को दोषी भी करार दे दिया है।
ED के सूत्रों के अनुसार जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि सतीश कुमार ने अपने पद का दुरुपयोग कर अवैध रूप से धन अर्जित किया और बाद में इस रकम को मोहाली में संपत्ति खरीद कर ‘लीगल’ दिखाने की कोशिश की। उन्होंने प्लॉट के साथ-साथ उस पर किए गए निर्माण में भी वही रकम लगाई, ताकि यह निवेश वैध आय से किया गया प्रतीत हो।
ED ने संपत्ति का वर्तमान बाजार मूल्य 1,84,91,651 रुपये आंका है, जिसे अब धन शोधन रोकथाम अधिनियम की धारा 5 के तहत कुर्क कर लिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई सिर्फ शुरुआती कदम है और आगे भी बैंक खातों, संभावित अन्य निवेशों और वित्तीय लेन-देन की जांच जारी रहेगी।
ED की इस कार्रवाई के बाद हिमाचल के वित्त विभाग से जुड़े कई अन्य पुराने मामलों की भी फाइलें दोबारा खंगाली जा रही हैं। एजेंसी यह जांच करने में जुटी है कि कहीं इसी तरह की और संपत्तियां तो नहीं खड़ी की गईं, या किसी और के नाम पर निवेश करके धन शोधन करने की कोशिश की गई हो। मामले में आगामी कार्रवाई अदालत के निर्देशों और आगे की जांच रिपोर्टों के आधार पर जारी रहेगी।