सिरमौर। आजकल जालसाजी और चोरी की वारदातों को देखते हुए लोगों ने घरों में कैश रखना कम कर दिया है। ज्यादातर लोग अपने जीवन की जमा पूंजी बैंकों में जमा करवाते हैं। लोग बैंकों में अपना पैसा रखना सुरक्षित समझते हैं। ऐसे में अगर किसी बैंक का कर्मचारी कोई बड़ा घोटाला कर दें तो सोचिए उन लोगों पर क्या बीतती होगी- जिन्होंने अपनी रात-दिन की मेहनत की कमाई वहां भरोसा करके जमा की हो।
को-ऑपरेटिव बैंक से 4 करोड़ का गबन
ताजा मामला हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिला से सामने आया है। जहां नौहराधार में स्थित को-ऑपरेटिव बैंक की शाखा के असिस्टेंट मैनेजर पर करोड़ों रुपए के गबन के आरोप लगे हैं।
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क्या है पूरा मामला-
- को-ऑपरेटिव बैंक से 4 करोड़ का गबन
- बैंक के असिस्टेंट मैनेजर ने FD का पैसा किया गायब
- बैंक मैनेजर को मिली थी शिकायत
- बढ़ सकता है गबन राशि का आंकड़ा
- तीन साल के दस्तावेजों को खंगाला जा रहा
- ग्राहकों के अकाउंट में शो रहा ZERO बैलेंस
- बैंक का असिस्टेंट मैनेजर सस्पेंड
- ICICI बैंक मैनेजर किया था करोड़ों का घोटाला
- ग्रामीण बैंक के मैनेजर ने किया 5.1 करोड़ रुपए का गबन
जालसाजी के लिए असिस्टेंट मैनेजर सस्पेंड
शुरुआती जांच में असिस्टेंट मैनेजर द्वारा 4 करोड़ रुपए का गबन करने की बात सामने आ रही है। मगर माना जा रहा है कि जांच पूरी तरह होने के बाद गबन की राशि का यह आंकड़ा और भी बढ़ सकता है।
मामले में संज्ञान लेते हुए बैंक प्रबंधन ने असिस्टेंट मैनेजर नौहरधार ब्रांच ज्योति प्रकाश को जालसाजी करने के लिए सस्पेंड कर दिया गया है। बैंक प्रबंधन द्वारा उसे आगामी पूछताछ के लिए बैंक के हेड क्वार्टर शिमला भेज दिया गया है।
कैसे हुआ जालसाजी का खुलासा?
बताया जा रहा है कि राज्य सहकारी बैंक के जिला प्रबंधक प्रियदर्शन पांडे को बीती 3 अगस्त को इस गबन के बारे में पता चला था। इसी के चलते बैंक प्रबंधन ने पहले खुद मामले की छानबीन की और फिर 10 अगस्त को संगड़ाह पुलिस थाने में आरोपी ज्योति प्रकाश के खिलाफ मामला दर्ज करवाया।
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बढ़ सकता है राशि का आंकड़ा
बैंक प्रबंधन और पुलिस द्वारा सारे दस्तावेजों की गहनता से जांच की जा रही है। अभी तक की जांच में 4 करोड़ रुपए के गबन का मामला सामने आया है, लेकिन यह आंकड़ा अभी बढ़ भी सकता है।
असिस्टेंट मैनेजर ने कैसे किया घोटाला?
जानकारी के अनुसार, आरोपी ज्योति प्रकाश ने लोगों के नाम पर फर्जी तरीके से लिमिट बनवाई। साथ ही कई लोगों की लिमिट पर फर्जी तरीके से लोन भी लिया। इतना ही नहीं कुछ लोगों की FDR का पूरा पैसा ही गबन कर दिया और कुछ की FDR पर लोन ले लिया। कुछ लोगों के KCC अकाउंट से भी भारी राशि का गबन किया गया है।
खंगाले जा रहे पिछले 3 साल के दस्तावेज
फिलहाल, बैंक प्रबंधन और पुलिस टीम सारे दस्तावेजों को अच्छे से खंगाल रहे हैं ताकि पता चल सके कि यह घोटाला कितना बड़ा है। बैंक हेड क्वार्टर शिमला से आई टीम द्वारा पिछले तीन साल के सारे दस्तावेजों को खंगाला जा रहा है।
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गड़बड़ी के सूचना फैलते हुआ हंगामा
आपको बता दें कि जैसे ही लोगों को बैंक में गड़बड़ी होने की सूचना मिली तो लोगों को अपने जीवन भर की कमाई डूबने का डर सताने लगा। इसी के चलते बड़ी संख्या में लोग नौराधार बैंक पहुंचे और हंगामा शुरु कर दिया।
अकाउंट में शो हो रहा ZERO बैलेंस
हालांकि, बैंक अधिकारियों के समझाने के बाद यह लोग शांत हो गए। लोगों का कहना है कि असिस्टेंट मैनेजर ने FD की राशि में गड़बड़ी की है। कुछ लोगों ने बैंक में 20 से 25 लाख रुपए तक की राशि FD में जमा कर रखी है। मगर बैंक अकाउंट में जीरो बैलेंस शो कर रहा है। यह तो शुक्र है कि लोगों के पास FD के बांड पड़े हुए हैं नहीं तो उन्हें यह पैसा वापिस भी कैसे मिलना था।
गहनता से हो रही हर पहलू की जांच
मामले की पुष्टि करते हुए पुलिस थाना संगड़ाह प्रभारी बृजलाल मेहता ने बताया कि आरोपी असिस्टेंट मैनेजर के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। बैंक प्रबंधन की ओर से सारे दस्तावेज मिलते ही आगामी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। फिलहाल, मामले की जांच गहनता से की जा रही है।
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ICICI बैंक मैनेजर किया करोड़ों का घोटाला
उल्लेखनीय है कि पिछले साल ऐसा ही एक मामला हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला से सामने आया था। जहां ICICI बैंक की कसुम्पटी ब्रांच में बैंक मैनेजर अरविंद कुमार द्वारा करीब 3 करोड़ रुपए का गबन किया गया था। बैंक मैनेजर ने बैंक ग्राहकों के म्युचुअल फंड के पैसों को अपने अकाउंट में डाल दिया था।
अपने खाते में डालता था ग्राहकों का पैसा
इस जालसाजी का खुलासा तब हुआ जब एक बैंक के ग्राहक ने इसकी शिकायत बैंक के हेड ऑफिस में दी। उसने बताया कि अरविंद ने उसके म्युचूअल फंड के पैसे को उसके अकाउंट में डालने के बजाय अपने अकाउंट में डाल दिया है। इसी के चलते जब बैंक की एक कमेटी द्वारा मामले की जांच की गई तो पता चला कि अरविंद ने बैंक के नाम पर करीब 3,89,89,582 रुपए की धोखाधड़ी की है।
ग्रामीण बैंक मैनेजर ने किया 5.11 करोड़ का घोटाला
इसके अलावा साल 2019 में हिमाचल प्रदेश ग्रामीण बैंक की नालागढ़ ब्रांच के प्रबंधक राजपाल सिंह को करोड़ों रुपए का घोटाला करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। आरोपी ने नालागढ़ में साल 2011 व 2013 के दौरान इस घोटाले को अंजाम दिया था। आरोपी के फर्जी फर्मो पर बिना जांच-पड़ताल के लोन पास कर दिया था। जिसके चलते आरोपी को बैंक प्रबंधन ने साल 2016 में निलंबित कर दिया था। आरोपी ने फर्जी फर्मों के नाम पर लोन देकर 5.11 करोड़ रुपए का घोटाला किया था।