#अव्यवस्था
June 18, 2026
हिमाचल : सरकारी स्कूल जर्जर- तपती गर्मी में तिरपाल के नीचे पढ़ रहे बच्चे, धरने पर बैठे परिजन
प्रशासन की अनदेखी के कारण लोगों की बढ़ी नाराजगी
शेयर करें:

मंडी। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में शिक्षा व्यवस्था और बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। करसोग उपमंडल की बेलरधार पंचायत के अंतर्गत आने वाली प्राथमिक पाठशाला खडून में बच्चे इन दिनों जून की भीषण गर्मी के बीच तिरपाल के नीचे बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
स्कूल भवन की जर्जर हालत को देखते हुए अभिभावकों ने अपने बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए विरोध का रास्ता अपनाया है। अभिभावक स्कूल परिसर में धरने पर बैठ गए हैं।
अभिभावकों का कहना है कि स्कूल भवन की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। भवन की छत से प्लास्टर और अन्य हिस्से गिर रहे हैं, जबकि कई स्थानों पर पिलरों और बीमों में गहरी दरारें पड़ चुकी हैं।
ऐसे में भवन के भीतर बच्चों को बैठाना उनकी जान जोखिम में डालने के समान है। इसी कारण अभिभावकों ने फैसला लिया है कि जब तक भवन को सुरक्षित घोषित नहीं किया जाता या बच्चों के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की जाती- तब तक किसी भी छात्र को स्कूल भवन के अंदर नहीं भेजा जाएगा।
स्थिति ऐसी बन गई है कि बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह प्रभावित न हो, इसके लिए शिक्षकों और अभिभावकों की सहमति से स्कूल परिसर में तिरपाल लगाकर अस्थायी कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। हालांकि गर्मी और मौसम की मार के बीच यह व्यवस्था भी लंबे समय तक व्यवहारिक नहीं मानी जा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि कई बार संबंधित विभाग और प्रशासन को स्कूल भवन की खराब स्थिति से अवगत करवाया जा चुका है, लेकिन अभी तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। लोगों का आरोप है कि भवन की हालत दिन-प्रतिदिन खराब होती जा रही है और यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए तो कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
अभिभावकों का कहना है कि वे बच्चों की पढ़ाई बंद नहीं करना चाहते, बल्कि चाहते हैं कि उन्हें सुरक्षित वातावरण में शिक्षा मिले। इसी उद्देश्य से बच्चों को भवन के बाहर बैठाकर पढ़ाया जा रहा है ताकि उनकी पढ़ाई भी जारी रहे और सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सके।
वीरवार को कॉम्प्लेक्स स्कूल शोरशन के प्रधानाचार्य भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने स्कूल भवन का निरीक्षण किया और अभिभावकों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं। हालांकि अभिभावकों का कहना है कि अभी तक शिक्षा विभाग या जिला प्रशासन का कोई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा है। इसे लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी देखी जा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि मामला सार्वजनिक होने और मीडिया में उठने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। उनका मानना है कि किसी संभावित दुर्घटना के बाद कार्रवाई करने के बजाय पहले से सुरक्षा उपाय किए जाने चाहिए।
अभिभावकों और ग्रामीणों ने प्रशासन के समक्ष कई मांगें रखी हैं। इनमें स्कूल भवन का तत्काल तकनीकी निरीक्षण करवाना, भवन को सुरक्षित अथवा असुरक्षित घोषित करने संबंधी रिपोर्ट सार्वजनिक करना, बच्चों के लिए वैकल्पिक भवन की व्यवस्था करना तथा जर्जर भवन की मरम्मत या नए भवन निर्माण की प्रक्रिया शुरू करना शामिल है। इसके अलावा उन्होंने संबंधित अधिकारियों से स्वयं मौके पर पहुंचकर समस्या का स्थायी समाधान सुनिश्चित करने की मांग भी की है।
अभिभावकों ने साफ शब्दों में कहा है कि बच्चों की सुरक्षा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उनका कहना है कि यदि प्रशासन और शिक्षा विभाग ने जल्द सकारात्मक कदम नहीं उठाए तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर धरना-प्रदर्शन, चक्का जाम और व्यापक जनआंदोलन का रास्ता भी अपनाया जा सकता है।
ग्रामीणों का कहना है कि उनका संघर्ष किसी व्यक्तिगत मांग के लिए नहीं, बल्कि क्षेत्र के बच्चों के सुरक्षित भविष्य के लिए है। अब सभी की नजर प्रशासन और शिक्षा विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।