#अव्यवस्था
June 12, 2025
विक्रमादित्य सिंह के विभाग का रेस्ट हाउस अटैच: अफसरों की गाडियां भी गईं!
सरकार ने फिर मांगा कोर्ट से समय
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में मुआवजे को लेकर न्यायपालिका ने सरकार की लापरवाही पर सख्त रुख अख्तियार किया है। 27 साल पुराने मामले में जमीन अधिग्रहण के बावजूद मुआवजा न देने पर शिमला जिला न्यायालय ने लोक निर्माण विभाग के सचिव और भू-अर्जन अधिकारी की सरकारी संपत्तियों को अटैच करने के आदेश दिए हैं।
जिला न्यायाधीश (वन) अजय मेहता की अदालत ने स्पष्ट किया कि निष्पादन याचिका 2020 से लंबित है, लेकिन अब तक प्रतिवादियों ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। आदेश में तारादेवी PWD रेस्ट हाउस, विभागीय कंप्यूटर, टेबल-कुर्सी, हीटर और यहां तक कि मुख्यालय के दो वाहन भी जब्त करने को कहा गया है।
राज्य सरकार की ओर से अब कोर्ट से 4 महीने की अतिरिक्त मोहलत मांगी गई है ताकि 2.50 करोड़ रुपये की देनदारी पूरी की जा सके। लेकिन कोर्ट अब समय देने के मूड में नहीं दिख रही। इसी कारण कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए आदेश दिए है कि अब ये रेस्टहाउस अटैच होगा।
यह मामला रोहड़ू के बैधार-टिक्कर मार्ग से जुड़ा है, जहां वर्ष 1998 में करीब 15 बीघा भूमि अधिग्रहीत की गई थी। भूमि पर लगे सेब के पौधों का मूल्य पहले 6,252 रुपये तय किया गया था, लेकिन टिक्कर गांव के दीवान चंद, भजन दास, इंद्र सिंह, नरैण चंद समेत अन्य किसानों ने 2012 में कोर्ट में चुनौती दी। 2017 में अदालत ने किसानों के हक में फैसला सुनाया और 26,575 रुपये प्रति पौधा मुआवजा देने को कहा। लेकिन आज तक सरकार ने वह रकम नहीं दी।
अब इस मामले की सुनवाई 18 जून को होगी, लेकिन उससे पहले सरकार को 2.50 करोड़ रुपये की रकम अदालत में जमा करनी होगी, वरना सचिवालय स्तर की संपत्तियों की कुर्की तय है।