मंडी। अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। इस बार पड्डल मैदान में आने वाले देवी-देवताओं के बैठने के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं। पहली बार पैगोड़ा शैली के तंबुओं का उपयोग किया जा रहा है जिसमें एक ही टेंट में दो से तीन देवी-देवता विराजेंगे।
पैगोड़ा शैली के तंबू और बैठने की व्यवस्था
पड्डल मैदान की सीढ़ियों पर करीब 85 पैगोड़ा टेंट लगाए जा रहे हैं। दरअसल, कॉलेज भवन के निर्माण के कारण लगभग 60 देवी-देवताओं के लिए जगह की कमी हो गई थी। सर्व देवता सेवा समिति की मांग पर इस बार ये नई व्यवस्था की गई है। इन तंबुओं में रथ के आकार के हिसाब से स्थान तय किया जाएगा, जिसमें एक तरफ चौहारघाटी और दूसरी तरफ सराज सहित अन्य घाटियों के देवी-देवता विराजमान होंगे।
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195 देवी-देवताओं के पहुंचने की उम्मीद
16 से 22 फरवरी तक चलने वाले इस महोत्सव के लिए कुल 216 देवी-देवताओं को निमंत्रण भेजा गया है। प्रशासन को उम्मीद है कि इनमें से 190 से 195 देवी-देवता उत्सव में शामिल होंगे।
राज देवता माधोराय के साथ विराजेंगे 6 देवता
जलेब के दौरान राज देवता माधोराय के साथ चलने वाले 6 देवी-देवता पड्डल मैदान में उनके साथ बैठेंगे। शोभायात्रा जब पड्डल में प्रवेश करेगी, तो उनके साथ कुल 12 देवता होंगे। माधोराय को पड्डल चानणी में विराजमान करने के बाद ये 6 देवता वहीं उनके साथ रहेंगे।
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क्षेत्रवार देवी-देवताओं की संख्या
महोत्सव में शामिल होने वाले देवी-देवताओं का ब्यौरा इस प्रकार है:
- क्षेत्र | देवी-देवताओं की संख्या
- सदर | 62
- बालीचौकी | 31
- औट | 26
- गोहर | 25
- कटौला | 21
- बल्ह | 20
- पद्धर | 18
- थुनाग | 11
- कोटली | 02
कुल्लू के सबसे अमीर देवता 'खुड्डीजहल' भी आएंगे
जिला कुल्लू के आनी क्षेत्र के सबसे अमीर देवता कहे जाने वाले खुड्डीजहल भी इस बार महोत्सव की शोभा बढ़ाएंगे। वे 12 फरवरी को रघुपुर क्षेत्र से रवाना होंगे और छतरी, गोहर, भडयाल होते हुए 15 फरवरी को मंडी पहुंचेंगे। ये दूसरी बार है जब वे अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव में भाग लेने आ रहे हैं।
