शिमला। सेब पर इम्पोर्ट ड्यूटी घटाए जाने के फैसले के बाद पहाड़ी राज्यों के बागवानों की चिंताएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। इसी कड़ी में हिमाचल प्रदेश के CM सुखविंदर सिंह सुक्खू आज श्रीनगर दौरे पर जा रहे हैं, जहां वे जम्मू-कश्मीर के CM उमर अब्दुल्ला के साथ सेब उद्योग से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा करेंगे।

FTA के बाद बढ़ा विदेशी सेब का दबाव

केंद्र सरकार द्वारा न्यूजीलैंड, यूरोपीय संघ और अमेरिका के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) किए जाने के बाद सेब पर इम्पोर्ट ड्यूटी में बड़ी कटौती की गई है। अमेरिका और न्यूजीलैंड से आने वाले सेब पर ड्यूटी 50 प्रतिशत से घटाकर 25 प्रतिशत कर दी गई है, जबकि European Union के देशों के लिए यह दर 20 प्रतिशत तय की गई है। इस फैसले के बाद भारतीय बाजारों में विदेशी सेब की आमद बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

 

यह भी पढ़ें: हिमाचल राज्यसभा चुनाव : बाहरी बनाम लोकल फिर बना मुद्दा, कांग्रेस के सामने चुनौती- BJP भी...

हिमाचल समेत तीन राज्यों पर संकट

इम्पोर्ट ड्यूटी घटने का सीधा असर हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड के सेब उद्योग पर पड़ सकता है। हिमाचल में सेब कारोबार 5500 करोड़ रुपये से अधिक का है और करीब ढाई लाख परिवारों की आजीविका इसी पर निर्भर है। जम्मू-कश्मीर में सेब उत्पादन हिमाचल से भी अधिक है, ऐसे में दोनों राज्यों के बागवान इस फैसले को लेकर चिंतित हैं। बीते महीने हिमाचल के बागवान शिमला में सचिवालय का घेराव कर अपना विरोध भी दर्ज करा चुके हैं।

 

यह भी पढ़ें: हिमाचल की सेब मंडियों में बड़ा खेल! 8 करोड़ की ठगी कर फरार हुए आढ़ती - APMC पर सवाल

RDG और विशेष ग्रांट का मुद्दा भी एजेंडे में

CM सुक्खू इस दौरे के दौरान जम्मू-कश्मीर के साथ मिलकर सेब से जुड़े मुद्दे को केंद्र सरकार के समक्ष उठाने की रणनीति बनाएंगे। इसके अलावा रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट (RDG) बंद किए जाने और पहाड़ी राज्यों के लिए विशेष ग्रांट की मांग पर भी चर्चा प्रस्तावित है। श्रीनगर में बैठक के बाद CM सुक्खू जम्मू-कश्मीर के कांग्रेस नेताओं से मुलाकात करेंगे और देर शाम दिल्ली लौटेंगे।

FTA से क्यों चिंतित हैं बागवान

बीते 15 वर्षों में भारत में विदेशी सेब का आयात तेजी से बढ़ा है, जिससे घरेलू बागवानों को नुकसान हुआ है। हिमाचल में प्रति हेक्टेयर सेब उत्पादन 7 से 8 मीट्रिक टन है, जबकि न्यूजीलैंड जैसे देशों में यह 60 से 70 मीट्रिक टन तक पहुंच जाता है।

 

यह भी पढ़ें:  हिमाचल में फीकी पड़ी सर्दी : अगले 4 दिन तक नहीं होगी बारिश-बर्फबारी, किसान-बागवान निराश

 

हिमाचल में एक किलो सेब तैयार करने की लागत करीब 27 रुपये आती है और बागवानों को लाभ तभी होता है जब सेब 50 से 60 रुपये प्रति किलो बिके। ऐसे में कम ड्यूटी पर आयात होने वाला विदेशी सेब बाजार में प्रतिस्पर्धा को और कठिन बना देता है।

घरेलू सेब उद्योग पर मंडराता खतरा

बागवानों का कहना है कि यदि अधिक उत्पादन वाले देशों से कम इम्पोर्ट ड्यूटी पर सेब आता रहा, तो हिमाचल, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड का सेब उद्योग गंभीर संकट में आ सकता है। यही वजह है कि अब राज्य सरकारें मिलकर केंद्र सरकार से इस नीति पर पुनर्विचार की मांग करने की तैयारी में हैं।

नोट : ऐसी ही तेज़, सटीक और ज़मीनी खबरों से जुड़े रहने के लिए इस लिंक पर क्लिक कर हमारे फेसबुक पेज को फॉलो करें