शिमला। हिमाचल विधानसभा का बजट सत्र शुरू होते ही सियासी तापमान चढ़ गया। पहले ही दिन मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर के बीच राजस्व घाटा अनुदान को लेकर तीखी नोकझोंक देखने को मिली। आरोप.प्रत्यारोप, वित्तीय कुप्रबंधन के दावे और केंद्र बनाम राज्य की बहस के बीच सदन में महत्वपूर्ण विधेयक भी पारित हुए। दरअसल हिमाचल प्रदेश विधान सभा में बजट सत्र का पहला दिन राजनीतिक तल्खी से भरा रहा। जैसे ही राजस्व घाटा अनुदान का मुद्दा उठा, सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बहस तेज हो गई।

आरडीजी पर सीधी टक्कर

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह आरडीजी बंद होने के मुद्दे पर दोहरा रवैया अपना रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के हकों की लड़ाई सरकार मजबूती से लड़ेगी और आरडीजी राज्य का अधिकार है। सीएम ने पूर्व भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि 54 हजार करोड़ रुपये का राजस्व घाटा अनुदान मिलने के बावजूद कर्मचारियों की देनदारियां नहीं चुकाई गईं और प्रदेश पर 86 हजार करोड़ रुपये का कर्ज छोड़ दिया गया। उन्होंने संसाधनों के दुरुपयोग का भी आरोप लगाया।

 

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जयराम ठाकुर ने लगाए वित्तीय कुप्रबंधन के आरोप

जवाब में नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कांग्रेस सरकार पर वित्तीय कुप्रबंधन का आरोप लगाया। उनका कहना था कि आरडीजी 17 राज्यों में बंद हुई है और वित्त आयोग पहले ही संकेत दे चुका था। राज्य सरकार को समय रहते वैकल्पिक रणनीति बनानी चाहिए थी। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश का कर्ज अब 1ण्10 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। जयराम ठाकुर ने एडवोकेट जनरल, अतिरिक्त एजी, डिप्टी एजी और सीपीएस की नियुक्तियों पर भी सवाल उठाते हुए इसे अनावश्यक वित्तीय बोझ बताया।

राज्यपाल के अभिभाषण पर भी सियासत

सत्र की शुरुआत राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला के अभिभाषण से हुई, लेकिन राज्यपाल ने लगभग दो मिनट में ही अपना संबोधन समाप्त कर दिया। उन्होंने कहा कि अभिभाषण के कुछ पैराग्राफ में संवैधानिक संस्थाओं पर टिप्पणी है, इसलिए वे पूरा पाठ नहीं पढ़ेंगे। इस पर विपक्ष ने परंपरा के अनुसार राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा की मांग की, जबकि संसदीय कार्य मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने आरडीजी पर चर्चा का प्रस्ताव रखा। सीएम सुक्खू ने यहां तक कहा कि यदि विपक्ष प्रधानमंत्री के समक्ष आरडीजी का मुद्दा उठाने को तैयार है तो सरकार चर्चा टालने को भी तैयार है। इसके बाद सदन में आरडीजी पर औपचारिक बहस शुरू हुई।

 

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दो अहम विधेयक पारित

राजनीतिक गरमाहट के बीच सदन ने दो महत्वपूर्ण विधेयक पारित किए।

  • पहला, हिमाचल प्रदेश नगर निगम (द्वितीय संशोधन) विधेयक 2025, जिसके तहत महापौर और उपमहापौर का कार्यकाल पांच वर्ष करने का प्रावधान किया गया है।
  • दूसरा, भू-संपदा (विनियमन और विकास) संशोधन विधेयक 2025, जिसे तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने पेश किया। इसमें रेरा अध्यक्ष चयन पैनल की संरचना में बदलाव का प्रस्ताव है। दोनों विधेयक अब राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजे जाएंगे।

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दो चरणों में होगा बजट सत्र

प्रदेश के इतिहास में पहली बार बजट सत्र दो चरणों में आयोजित किया जा रहा है। पहले चरण में तीन दिन की बैठकें होंगी, जबकि शेष सत्र बाद में आयोजित किया जाएगा। बजट की तिथि और कुल बैठकों की संख्या को लेकर अभी अंतिम निर्णय होना बाकी है। पहले दिन की तीखी बहस ने संकेत दे दिया है कि आगामी दिनों में सदन के भीतर आरडीजी और वित्तीय प्रबंधन को लेकर सियासी संग्राम और तेज होगा। हिमाचल की राजनीति फिलहाल वित्तीय अधिकारों और जवाबदेही के मुद्दे पर केंद्रित होती नजर आ रही है।

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