शिमला। हिमाचल प्रदेश में अब राजनीति का विषय सिर्फ ये नहीं रहा कि प्रदेश की आर्थिक स्थिति कैसी है, बल्कि ये हो गया है कि किस राजनेता के बाल है और किसके किस कारण से झड़ गए। जी हां, प्रदेश में बजट सत्र जारी है और इसी बीच सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर के बीच बालों को लेकर बयान बाजी देखने को मिली।

सिर पर बाल हैं तो इसका मतलब...

राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री पर ऐसा तंज कसा कि सदन में ठहाके भी लगे और माहौल भी गरमा गया। बालों को उम्र, समझ और अनुभव से जोड़ते हुए कही गई बात ने कुछ ही पलों में बहस को व्यक्तिगत कटाक्ष के स्तर तक पहुंचा दिया। जवाब भी उतना ही चुटीला आया, जिससे साफ हो गया कि आरडीजी की बहस सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं रहने वाली।

 

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दूसरे ही पल यह तंज सरकार के कामकाज और फैसलों पर सवाल में बदल गया। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सिर पर बाल होने का यह मतलब नहीं कि सरकार को बिना सोचे-समझे चलाया जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश को छात्र राजनीति के अंदाज में चलाया जा रहा है और मुख्यमंत्री किसी की सुनने को तैयार नहीं हैं। इस पर मुख्यमंत्री ने पलटवार करते हुए कहा कि अगर उनके सिर पर बाल हैं तो इसमें उनकी क्या गलती है, विपक्ष के बाल इसलिए उड़ गए क्योंकि उन्होंने कभी चिंता ही नहीं की।

 

फिजूलखर्ची नहीं रुकी तो वेतन-पेंशन पर संकट


इसके बाद बहस असली मुद्दे पर आई। आरडीजी को लेकर सरकार द्वारा लाए गए संकल्प पर बोलते हुए नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि अगर सरकार ने फिजूलखर्ची नहीं रोकी, तो आने वाले समय में कर्मचारियों के वेतन, भत्तों, पेंशन, जीपीएफ और विकास कार्यों पर संकट तय है। उन्होंने कहा कि अधिकार मांगने के साथ-साथ जिम्मेदारी निभाना भी जरूरी है।

 

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CM सुक्खू चलाए अपना ब्रह्मास्त्र


जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री के 2027 तक हिमाचल को आत्मनिर्भर और 2032 तक देश का सबसे समृद्ध राज्य बनाने के दावे पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अगर सरकार के पास कोई ठोस फार्मूला या “ब्रह्मास्त्र” है, तो उसे अभी लागू किया जाए। केवल भाषणों और बड़े दावों से आर्थिक संकट दूर नहीं होगा।

 

नियुक्तियों और खर्चों पर निशाना


नेता प्रतिपक्ष ने सरकार को सलाह दी कि मित्रों को दी गई नियुक्तियों पर तुरंत विचार किया जाए। उन्होंने पूछा कि जब पहले से पता था कि वित्तीय स्थिति ठीक नहीं है, तो सीपीएस क्यों लगाए गए और बड़ी संख्या में महाधिवक्ता व सहायक क्यों नियुक्त किए गए। उनका कहना था कि भाजपा या केंद्र को कोसने से राज्य की आर्थिकी मजबूत नहीं होगी।

 

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सरकार का पलटवार और सियासी संदेश


सीएम सुक्खू ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सरकार प्रदेश के हित में फैसले ले रही है और चिंता करना विपक्ष का काम है। दोनों नेताओं के बीच यह तकरार साफ संकेत दे गई कि आरडीजी का मुद्दा आने वाले दिनों में भी सदन की राजनीति का केंद्र बना रहेगा।

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