नई दिल्ली/कुल्लू। मंडी से सांसद और बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत वीरवार को जब संसद भवन पहुंचीं तो हर किसी की नजरें उनके पहनावे पर टिक गईं। कंगना ने कुल्लू की महिला कारीगरों द्वारा विशेष रूप से तैयार किया गया ‘हिमाचली समकालीन कोट’ पहना था। ये कोट ना केवल फैशन का हिस्सा है बल्कि हिमाचल की पारंपरिक हस्तकला को राष्ट्रीय मंच पर दी गई एक नई पहचान भी है।

2 महीने की मेहनत, 45 हजार कीमत

इस खास कोट को कुल्लू की 6 महिला कारीगरों ने मिलकर तैयार किया है। इसे बनाने में लगभग 2 महीने का समय लगा और इसकी कीमत 45 हजार रुपये बताई जा रही है। पूरी तरह हाथ से बुने गए इस कोट को पहनकर कंगना ने प्रधानमंत्री के 'वोकल फॉर लोकल' संदेश को मजबूती दी है।

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देसी ऊन और प्रकृति के रंगों का अर्थ

ये कोट पूरी तरह स्थानीय 'गद्दी ऊन' से बना है। इसे तैयार करने में किसी मशीन का नहीं बल्कि पारंपरिक हाथ की बुनाई का इस्तेमाल हुआ है। इसमें प्रयुक्त रंग भी हिमाचल की प्रकृति से प्रेरित हैं:

  • नीला रंग: आसमान और झीलों की शांति का प्रतीक।
  • हरा रंग: पहाड़ों की हरियाली और चरागाहों की झलक।
  • अखरोट रंग: बर्फीली चोटियों और मिट्टी की गरिमा।

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महिला सशक्तिकरण की मिसाल

कुल्लू के नग्गर निवासी भृगु राज आचार्य और निशा सुब्रमण्यम (कुल्वी व्हिम्स) के मार्गदर्शन में ये कोट तैयार हुआ है। उनका कहना है कि कंगना द्वारा इस परिधान को संसद जैसे मंच पर पहनना उन ग्रामीण महिलाओं के लिए गर्व की बात है जो अपनी विरासत को बचाने में जुटी हैं।

कंगना की इस पहल से ना केवल हिमाचल के हस्तशिल्प को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी बल्कि इससे स्थानीय महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी खुलेंगे।