सिरमौर। देवभूमि हिमाचल प्रदेश में अनेक प्रसिद्ध शक्तिपीठ स्थित हैं, जहां देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं की इसी आस्था का कई बार कुछ लोग गलत फायदा उठाते हुए उन्हें महंगे दामों पर सामान बेचते हैं। लेकिन अब इसी देवभूमि से एक सराहनीय पहल सामने आने जा रही है। जिला सिरमौर के त्रिलोकपुर में स्थित प्रसिद्ध महामाया बाला सुंदरी मंदिर में जल्द ही एक अनोखी योजना की शुरुआत होने वाली है, जिसे ‘नेकी की दुकान’ नाम दिया गया है।
व्यापार नहीं जरूरतमंदों की कर रहे मदद
बता दें कि यह दुकान किसी तरह का व्यापार नहीं करेगी, बल्कि जरूरतमंदों को सम्मान के साथ मदद पहुंचाने का काम करेगी। यहां किसी को मुफ्त में कुछ नहीं दिया जाएगा, बल्कि आत्मसम्मान बनाए रखते हुए जरूरत का सामान उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि कोई भी व्यक्ति हाथ फैलाने की बजाय सिर उठाकर अपनी जरूरत पूरी कर सके।
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मंदिर परिसर में खुलेगी ‘नेकी की दुकान’
त्रिलोकपुर मंदिर न्यास के संयुक्त सचिव और SDM नाहन राजीव सांख्यान ने बताया कि मंदिर न्यास की बैठक में इस योजना को मंजूरी दे दी गई है। उन्होंने कहा कि इस पहल का मकसद जरूरतमंद लोगों तक मदद पहुंचाना है, वो भी सम्मान के साथ। श्रद्धालुओं और आम लोगों द्वारा दान में दी गई उपयोगी वस्तुएं जरूरतमंदों को बेहद कम, प्रतीकात्मक कीमत पर उपलब्ध कराई जाएंगी। इससे समाज में सहयोग, सेवा और संवेदना की भावना को और मजबूती मिलेगी।
मांगने की जरूरत नहीं, सम्मान के साथ मिलेगी मदद
एसडीएम नाहन ने बताया कि ‘नेकी की दुकान’ खास तौर पर उन लोगों के लिए होगी, जिन्हें जरूरत तो है लेकिन वे मांगने में झिझक महसूस करते हैं। यहां दान में आए सामान,जैसे अच्छी हालत में पड़े पुराने मोबाइल फोन, कपड़े, किताबें और रोजमर्रा की जरूरत की चीजें,सिर्फ 50 रुपये की प्रतीकात्मक राशि में दी जाएंगी।
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छोटी सी मदद संवारेगी किसी का भविष्य
इसका मतलब यह होगा कि किसी घर में बेकार पड़ा मोबाइल किसी बच्चे की पढ़ाई में काम आएगा, अलमारी में रखा कपड़ा किसी गरीब परिवार के लिए सम्मान का जरिया बनेगा और धूल खा रही किताबें किसी छात्र का भविष्य संवारेंगी।
कैसे काम करेगी ‘नेकी की दुकान’
श्रद्धालु और स्थानीय लोग अपने घर में पड़ी ऐसी चीजें, जो इस्तेमाल में नहीं हैं लेकिन अच्छी हालत में हैं, मंदिर में दान कर सकेंगे। दान में आई हर वस्तु की बाकायदा एंट्री की जाएगी और फिर दुकान में सलीके से सजाया जाएगा। जरूरतमंद लोग अपनी पसंद और जरूरत के हिसाब से सामान चुन सकेंगे।
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50 रुपये की कीमत, आत्मसम्मान की पहचान
इस योजना की सबसे खास बात यह है कि यहां मदद को दया नहीं बनाया जाएगा। हर सामान 50 रुपये में मिलेगा, चाहे उसकी असली कीमत कुछ भी हो। यह रकम सिर्फ एक प्रतीक होगी, ताकि लेने वाले को यह अहसास रहे कि वह किसी पर बोझ नहीं है और अपनी जरूरत खुद पूरी कर रहा है।
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यहां शुरू होगी ‘नेकी की दुकान’
यह दुकान त्रिलोकपुर मंदिर परिसर में शिव मंदिर तालाब के पास शुरू करने की योजना है। फिलहाल वहां पशुपालन विभाग की अस्थायी व्यवस्था है। विभाग के लिए नई डिस्पेंसरी बन चुकी है और उनके शिफ्ट होते ही इसी जगह पर ‘नेकी की दुकान’ शुरू कर दी जाएगी।
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आस्था से सेवा की ओर एक कदम
नाहन से करीब 23 किलोमीटर और औद्योगिक क्षेत्र कालाअंब से 6 किलोमीटर दूर स्थित महामाया बाला सुंदरी मंदिर उत्तर भारत की प्रसिद्ध सिद्धपीठों में से एक है। नवरात्रों के दौरान यहां भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में यह स्थान सेवा और सामाजिक कार्यों के लिए बेहद उपयुक्त है। अब मंदिर की इसी आस्था को समाज सेवा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

जरूरतमंदों को मिलेगा स्थायी सहारा
SDM नाहन ने कहा कि इस पहल से गरीब परिवारों और विद्यार्थियों को सीधा लाभ मिलेगा। कम खर्च में जरूरी सामान मिलने के साथ-साथ दोबारा इस्तेमाल को बढ़ावा मिलेगा, जिससे पर्यावरण को भी फायदा होगा। श्रद्धालुओं, स्थानीय लोगों और मंदिर न्यास के सहयोग से यह पहल एक मिसाल बनेगी।
