कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश की अंतरराष्ट्रीय पर्यटन नगरी धर्मशाला में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां मैक्लोडगंज में एक विदेशी चीनी नागरिक के लंबे समय तक बिना वैध भारतीय वीजा के ठहरे रहने का खुलासा हुआ है।
बिना विजा के रह रहा था चाइनीज
हैरानी की बात यह है कि यह व्यक्ति करीब 130 दिनों, यानी लगभग पांच महीने तक, अत्यंत संवेदनशील माने जाने वाले क्षेत्र मैक्लोडगंज में रहा, लेकिन इस दौरान किसी भी स्तर पर उसकी वैधता की जांच नहीं हो सकी।
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टूरिस्ट वीजा लेकर आया था नेपाल
जानकारी के अनुसार, यह चीनी नागरिक नेपाल सरकार द्वारा जारी 90 दिनों का टूरिस्ट वीजा लेकर नेपाल पहुंचा था। इसके बाद वह बिना किसी वैध भारतीय वीजा या अनुमति के भारत में प्रवेश कर गया और सीधे मैक्लोडगंज पहुंच गया।
दलाई लामा के मंदिर तक पहुंचा
मैक्लोडगंज न केवल एक प्रमुख पर्यटन स्थल है, बल्कि यह तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा का निवास स्थान और निर्वासित तिब्बत सरकार का मुख्यालय भी है। चीन-तिब्बत विवाद के चलते यह इलाका पहले से ही सुरक्षा एजेंसियों के लिए अत्यंत संवेदनशील माना जाता है।
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अलर्ट पर सुरक्षा एजेंसियां
इस मामले के सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर आ गई हैं। दलाई लामा की सुरक्षा से जुड़े दृष्टिकोण से इसे एक बड़ी चूक के रूप में देखा जा रहा है। पुलिस के साथ-साथ खुफिया एजेंसियां भी यह पता लगाने में जुट गई हैं कि उक्त चीनी नागरिक किन परिस्थितियों में भारत पहुंचा, उसने किन-किन स्थानों पर समय बिताया और इस दौरान उसके संपर्क किन लोगों से रहे।
चीनी भाषा में कर रहा था बात
कांगड़ा जिले के ASP बीर बहादुर सिंह ने बताया कि सोमवार को धर्मशाला स्थित एसपी कार्यालय की सुरक्षा शाखा को एक संदिग्ध विदेशी नागरिक की जानकारी मिली। बताया गया कि यह व्यक्ति चीनी भाषा में बात कर रहा था और न तो हिंदी समझ पा रहा था और न ही अंग्रेजी।
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नहीं मिले वैध दस्तावेज
सूचना मिलते ही मैक्लोडगंज थाना पुलिस को अवगत कराया गया और एक जांच अधिकारी को मौके पर भेजा गया। प्रारंभिक जांच में उसके पास कोई वैध भारतीय दस्तावेज नहीं पाए गए।
चीन पुलिस में दे चुका है सेवाएं
पुलिस की पूछताछ के दौरान उस व्यक्ति ने अपना पासपोर्ट प्रस्तुत किया, जिससे उसकी पहचान लू वेननियन के रूप में हुई। वह चीन के सिचुआन प्रांत का निवासी है और उसका पासपोर्ट युन्नान प्रांत से जारी हुआ पाया गया। जांच में ये भी पाया गया कि व्यक्ति चीन पुलिस में अपनी सेवाएं भी दे चुका है।
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130 दिन तक मैक्लोडगंज में रहा
आगे की जांच में सामने आया कि उसके पास नेपाल सरकार द्वारा जारी टूरिस्ट वीजा था, जो 29 जून 2025 से 26 सितंबर 2025 तक वैध था। इसके बाद 26 सितंबर 2025 से लेकर 2 फरवरी 2026 तक वह लगभग 130 दिनों तक मैक्लोडगंज में बिना किसी वैध भारतीय वीजा के ठहरा रहा।
क्या था चाइनीज का मकसद?
पुलिस के अनुसार यह कृत्य विदेशी अधिनियम, 1946 की धारा 14 के तहत दंडनीय अपराध है। इसी आधार पर मैक्लोडगंज थाना में एफआईआर संख्या 06/2026 दिनांक 2 फरवरी 2026 को दर्ज कर ली गई है। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि इस दौरान उसे स्थानीय स्तर पर किसी तरह की मदद मिली या नहीं और उसकी गतिविधियों का मकसद क्या था।
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जांच में जुटी पुलिस
फिलहाल, आरोपी चीनी नागरिक को पुलिस हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच को बहु-एजेंसी स्तर पर आगे बढ़ाया जा सकता है। प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह मामला एक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है, ताकि भविष्य में ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों में विदेशी नागरिकों की आवाजाही और दस्तावेजों की जांच को और सख्त किया जा सके।
