मंडी। हिमाचल प्रदेश में सरकारी और टैम्परेरी नौकरी की तलाश कर रही महिलाओं की एक वीडियो काफी वायरल हो रही है। धर्मपुर के महाविद्यालय मैदान में आयोजित पशु मित्र भर्ती प्रक्रिया उस वक्त भावुक और प्रेरणादायक बन गई- जब 25KG वजन उठाकर दौड़ लगा रही एक बेटी लड़खड़ाकर गिर पड़ी।
25 KG की बोरी उठाकर दौड़ी लड़की
मैदान पर मौजूद हर किसी की सांसें थम गईं, लेकिन अगले ही पल उस बेटी ने खुद को संभाला, वजन फिर से उठाया और पूरी ताकत के साथ दौड़ पूरी की। यह सिर्फ एक शारीरिक परीक्षा नहीं थी, बल्कि हौसले, आत्मविश्वास और जिम्मेदारी की परीक्षा भी थी- जिसमें वह बेटी खरी उतरी।
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दसवीं में 77 प्रतिशत अंक
दसवीं कक्षा में करीब 77 प्रतिशत अंक हासिल करने वाली यह बेटी पढ़ाई में भी पीछे नहीं है। उसके पास आगे पढ़ने के सपने हैं, लेकिन फिलहाल परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी ने उसे नौकरी की राह पर ला खड़ा किया है।
जिम्मेदारी ने दिया हौसले को पंख
पशु मित्र भर्ती में हिस्सा लेने का उसका एक ही मकसद था-परिवार का सहारा बनना। मैदान में जब वह गिरी, तब भी उसके चेहरे पर हार नहीं, बल्कि जिद और संकल्प साफ झलक रहा था।
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एक मिनट में 100 मीटर की चुनौती
भर्ती प्रक्रिया के तहत अभ्यर्थियों को 25 किलो वजन उठाकर एक मिनट में 100 मीटर की दूरी तय करनी थी। यह टास्क आसान नहीं था, खासकर बेटियों के लिए, लेकिन धर्मपुर में आयोजित इस प्रक्रिया में कई बेटियों ने पूरे जोश और आत्मविश्वास के साथ भाग लिया।
बेटी की पूरे मैदान में चर्चा
कुल 147 आवेदकों में से 130 अभ्यर्थियों ने फिजिकल टेस्ट में हिस्सा लिया और हर कोई अपने सपनों को वजन के साथ कंधों पर उठाए दौड़ता नजर आया। जिस बेटी की चर्चा पूरे मैदान में रही, वह दौड़ के दौरान गिर जरूर गई, लेकिन उसने हार मानने के बजाय खुद को संभाला और लक्ष्य की ओर बढ़ती रही।
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अधिकारियों ने बजाई तालियां
अधिकारियों और मौजूद लोगों ने तालियों और शब्दों के जरिए उसका हौसला बढ़ाया। यह दृश्य सिर्फ एक चयन प्रक्रिया नहीं, बल्कि बेटियों की जिद, संघर्ष और आत्मनिर्भर बनने की चाह को बयां कर रहा था।
दस्तावेज देख अधिकारी भी हैरान
जब भर्ती प्रक्रिया के दौरान उस बेटी के शैक्षणिक दस्तावेज देखे गए, तो अधिकारी भी कुछ पल के लिए चौंक गए। अच्छे अंकों के बावजूद नौकरी के लिए इतनी कठिन शारीरिक परीक्षा देने का उसका फैसला बताता है कि आज की बेटियां परिस्थितियों से डरने वाली नहीं हैं। उनका साफ कहना था कि पढ़ाई के साथ-साथ वह काम करके परिवार की मदद करना चाहती है।
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पारदर्शिता के लिए बनी विशेष उपसमिति
पशुपालन विभाग की ओर से भर्ती प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाए रखने के लिए एक विशेष उपसमिति का गठन किया गया है। यह उपसमिति सभी अभ्यर्थियों के प्रदर्शन का गहन मूल्यांकन कर मेरिट सूची तैयार करेगी। यह सूची 14 मार्च तक उपनिदेशक, पशुपालन विभाग मंडी को भेजी जाएगी, जिसके बाद अंतिम चयन परिणाम घोषित किया जाएगा।
अधिकारियों का क्या कहना है?
वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. घनश्याम भूपल ने बताया कि पूरी भर्ती प्रक्रिया विभागीय नियमों और तय मानकों के अनुसार शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न करवाई जा रही है। हर अभ्यर्थी को समान अवसर दिया जा रहा है और चयन पूरी तरह मेरिट के आधार पर होगा।
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अस्थायी नौकरी, लेकिन बड़े सपने
चयनित पशु मित्रों को सरकार की ओर से प्रतिमाह 5000 रुपये का मानदेय दिया जाएगा। उन्हें दिन में चार घंटे कार्य करना होगा। भले ही यह नौकरी अस्थायी है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों के कई होनहार युवा और युवतियों के लिए यह आत्मनिर्भरता की ओर पहला कदम साबित हो रही है।
मुंह के बल गिरी बेटी
वहीं, वायरल वीडियो केवल एक भर्ती परीक्षा का हिस्सा भर नहीं है, बल्कि प्रदेश में बढ़ती बेरोजगारी, नौकरी के लिए मजबूरी, संघर्ष और युवाओं खासतौर पर महिलाओं व बेटियों की बेबसी को भी उजागर करता है।

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वीडियो पर सियासत भी गरमाई
वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कई यूजर्स इस प्रक्रिया को महिलाओं के सम्मान और स्वास्थ्य से जोड़कर सवाल उठा रहे हैं। विपक्ष में रहते हुए कांग्रेस द्वारा मल्टी टास्क वर्कर और अन्य भर्तियों में शारीरिक परीक्षा को लेकर उठाए गए सवाल भी अब फिर से चर्चा में हैं।
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मजबूरी की परीक्षा...
यूजर्स का कहना है कि सत्ता में आने के बाद वही कांग्रेस अब उसी तरह की भर्तियों को सही ठहरा रही है, जिनका वह पहले विरोध करती रही है। कई लोग इसे “मजबूरी की परीक्षा” बता रहे हैं, तो कुछ इसे गरीब और बेरोजगार महिलाओं के साथ अन्याय करार दे रहे हैं। सोशल मीडिया पर यह सवाल भी उठाया जा रहा है कि क्या मात्र पांच हजार रुपए के मानदेय वाली नौकरी के लिए इस तरह की कठिन शारीरिक परीक्षा जरूरी है।
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कांग्रेस का तर्क: फिटनेस जांच जरूरी
विवाद बढ़ने के बाद सरकार और विभाग की ओर से इसे फिटनेस टेस्ट करार दिया जा रहा है। सत्ता पक्ष का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के तहत हो रही है और इसमें किसी के साथ भेदभाव नहीं किया जा रहा।

पशुपालन विभाग का पक्ष
पशुपालन विभाग के डायरेक्टर संजीव कुमार धीमान ने भर्ती प्रक्रिया का बचाव करते हुए कहा कि ‘पशु मित्र’ को फील्ड में काम करना होता है। कई बार ड्यूटी के दौरान गाय-भैंस जैसे बड़े पशुओं को इलाज के लिए जमीन पर गिराना पड़ता है।
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आसान नहीं पशुओं का इलाज करना
टीकाकरण और दवाइयों के लिए करीब 25 किलो वजन वाले सिलेंडर भी उठाने पड़ते हैं। ऐसे में अभ्यर्थियों की शारीरिक क्षमता और फिटनेस की जांच करना जरूरी है। उनका कहना है कि यह परीक्षा किसी को अपमानित करने के लिए नहीं, बल्कि काम की प्रकृति को देखते हुए रखी गई है।
5000 के लिए इतनी मेहनत?
प्रदेश भर में पशुपालन विभाग द्वारा कुल 500 ‘पशु मित्रों’ की भर्ती की जा रही है। चयनित अभ्यर्थियों को प्रतिमाह मात्र 5,000 रुपए मानदेय दिया जाएगा। यही वजह है कि भर्ती प्रक्रिया और मेहनत के मुकाबले मिलने वाले मानदेय को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
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विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों का मानना है कि इतने कम मानदेय पर इतनी कठिन शारीरिक शर्तें तय करना व्यवहारिक नहीं लगता। साथ ही महिलाओं की सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर भी संवेदनशीलता बरतने की जरूरत है।
बेरोजगारी की तस्वीर या सिस्टम की सच्चाई?
धर्मपुर के मैदान में बोरी उठाकर दौड़ती महिलाएं सिर्फ भर्ती प्रक्रिया का हिस्सा नहीं, बल्कि उस सच्चाई की तस्वीर बन चुकी हैं, जहां नौकरी पाने के लिए लोग अपनी शारीरिक सीमाओं से भी आगे जाने को मजबूर हैं।
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वीडियो पर छीड़ी बहस
यह वीडियो प्रदेश में रोजगार नीति, अस्थायी नौकरियों और मानदेय व्यवस्था पर एक बड़ी बहस छेड़ चुका है। अब देखना होगा कि सरकार इस विवाद पर कोई बदलाव करती है या भर्ती प्रक्रिया इसी तरह आगे बढ़ती है।
