मंडी। हिमाचल प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन की रीढ़ माने जाने वाले हिमाचल प्रदेश परिवहन निगम की कार्यप्रणाली एक बार फिर कटघरे में आ गई है। खटारा बसें, जर्जर कर्मशालाएं और कर्मचारियों की भारी कमी, इन हालातों के बीच निगम किसी तरह अपनी सेवाएं चला रहा है। अब इन समस्याओं के खिलाफ निगम के कर्मचारी संगठनों ने खुलकर मोर्चा खोल दिया है और सरकार को चेतावनी दी है कि अगर हालात नहीं सुधरे, तो आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा।
मंडी में कर्मचारियों का फूटा गुस्सा
मंडी में आयोजित हिमाचल परिवहन मजदूर संघ के राज्य स्तरीय कार्यक्रम में कर्मचारियों का गुस्सा साफ झलका। संघ के प्रदेशाध्यक्ष प्यार सिंह ठाकुर ने कहा कि निगम की अधिकतर कर्मशालाओं की हालत बेहद खराब है। बसों की मरम्मत के लिए न तो जरूरी स्पेयर पार्ट्स समय पर मिलते हैं और न ही कर्मचारियों को बुनियादी टूलकिट उपलब्ध कराई जा रही है।
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अंतिम दौर में चल रही बसें
कर्मचारियों का आरोप है कि HRTC की कई बसें अपनी तकनीकी आयु पूरी कर चुकी हैं। कुछ बसें 16 लाख किलोमीटर से अधिक चल चुकी हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें सड़कों पर उतारा जा रहा है। कई बार तो बसें 10 किलोमीटर भी नहीं चल पातीं और रास्ते में ही जवाब दे देती हैं। कर्मचारियों का कहना है कि उनकी मेहनत से ही इन खटारा बसों को किसी तरह चलाया जा रहा है, जिससे यात्रियों और स्टाफ दोनों की सुरक्षा खतरे में पड़ रही है।
नई बसें आईं, लेकिन हालात नहीं बदले
संघ ने यह भी आरोप लगाया कि निगम में नई बसें तो लाई जा रही हैं, लेकिन उनके रखरखाव के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। इससे तकनीकी कर्मचारियों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ रहा है। कर्मचारियों ने परिवहन विभाग देख रहे उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री से सीधे हस्तक्षेप की मांग की है।
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पीस मील वर्करों के भविष्य पर सवाल
परिवहन मजदूर संघ ने लंबे समय से सेवाएं दे रहे पीस मील वर्करों के नियमितीकरण की मांग दोहराई। संघ का कहना है कि पूर्व सरकारों में ऐसे कर्मचारियों को नियमित किया जाता रहा है, लेकिन मौजूदा समय में इस दिशा में कोई ठोस फैसला नहीं लिया जा रहा।
निजीकरण के खिलाफ तकनीकी कर्मचारियों का मोर्चा
उधर शिमला में HRTC तकनीकी कर्मचारी संगठन ने निगम की वर्कशॉप के निजीकरण के फैसले का विरोध किया। संगठन के अनुसार रामपुर, नालागढ़, पठानकोट और शिमला यूनिट-3 की वर्कशॉप को निजी हाथों में सौंपने का निर्णय लिया गया है। कर्मचारियों का कहना है कि इससे उनके भविष्य पर संकट खड़ा हो जाएगा।
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स्टाफ की भारी कमी, आउटसोर्स पर निर्भरता
तकनीकी कर्मचारी संगठन के मुताबिक निगम में 2267 पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनमें से करीब आधे पद खाली हैं। इस कमी को आउटसोर्स कर्मचारियों से पूरा किया जा रहा है, जिससे न सिर्फ रोजगार पर असर पड़ेगा बल्कि काम की गुणवत्ता भी प्रभावित होगी।
हादसों की बढ़ती आशंका
कर्मचारियों ने HRTC बसों की बढ़ती दुर्घटनाओं पर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि समय पर अच्छे स्पेयर पार्ट्स न मिलने के कारण बसें बीच रास्ते खराब हो जाती हैं, जिससे हादसों का खतरा बढ़ जाता है।
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आंदोलन की चेतावनी
कर्मचारी संगठनों ने साफ किया है कि अगर सरकार ने जल्द समाधान नहीं निकाला और निगम को मजबूत करने की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए, तो प्रदेशव्यापी आंदोलन किया जाएगा।
