शिमला। किसी ने सही कहा है कि मेहनत वो चाबी है जो सपनों के ताले खोल देती है। सोलन जिले के झरनोट गांव की होनहार शायरा अली ने यही साबित कर दिखाया। एक मध्यमवर्गीय परिवार से आने वाली शायरा ने देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक UGC-NET में सफलता हासिल कर असिस्टेंट प्रोफेसर बनने की पात्रता प्राप्त कर ली है।
शायरा की मेहनत और संघर्ष
शायरा की यह सफलता इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने अपने करियर के लिए ‘फॉरेंसिक साइंस’ जैसे कठिन और चुनौतीपूर्ण विषय का चुनाव किया। गांव की पगडंडियों से शुरू हुआ उनका सफर मनाली के DPS और चंडीगढ़ के सेंट पीटर स्कूल से होते हुए पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला तक पहुँचा, जहाँ उनकी मेहनत ने उन्हें यह सुनहरा मुकाम दिलाया।
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पिता और परिवार का योगदान
इस उपलब्धि के पीछे शायरा के पिता ईलमदीन अली का अटूट विश्वास और परिवार की लगातार मेहनत छिपी हुई है। शायरा कहती हैं कि उनकी यह सफलता उनके माता-पिता के त्याग और गुरुओं के मार्गदर्शन के बिना संभव नहीं थी।
गांव में खुशी का माहौल
आज झरनोट गांव में इस कामयाबी का जश्न है। गांव वाले गर्व से शायरा की तारीफ कर रहे हैं और उनके उज्जवल भविष्य की कामना कर रहे हैं। उनकी यह उपलब्धि केवल परिवार का मान बढ़ाने वाली नहीं, बल्कि उन सभी ग्रामीण बेटियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखती हैं।
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युवाओं के लिए प्रेरणा बनी शायरा
शायरा ने साबित कर दिया है कि अगर हौसलों में जान हो और मेहनत का साथ मिले, तो सपनों की उड़ान लंबी होती है। उन्होंने यह भी संदेश दिया है कि मेहनत और आत्मविश्वास से कोई भी मुश्किल काम आसान बन सकता है।
