सोलन। हिमाचल के पहाड़ों में सपने आसानी से पूरे नहीं होते। यहां हर नौकरी के पीछे सालों की मेहनत, परिवार का अटूट भरोसा और अनगिनत त्याग छिपे होते हैं। माता-पिता उम्मीद करते हैं कि उनका बेटा पढ़-लिखकर कुछ बने, परिवार का नाम रोशन करे और जब वही बेटा वर्दी पहनकर घर लौटता है, तो उस खुशी की कोई कीमत नहीं होती। नालागढ़ के महेश्वर सिंह की कहानी भी ऐसी ही है , जिन्होंने असिस्टेंट कमांडेंट बन पूरे परिवार का नाम रोशन किया है।
एक साल की ट्रेनिंग पूरी कर घर लौटे महेश्वर
सोलन जिले के नालागढ़ उपमंडल के गोल जमाल पंचायत के निचला नंगल गांव के रहने वाले 26 वर्षीय महेश्वर सिंह ने सीमा सुरक्षा बल में असिस्टेंट कमांडेंट के रूप में चयन पाकर एक साल की कठिन ट्रेनिंग पूरी की है। सोमवार को जब वे वर्दी में अपने गांव पहुंचे, तो ढोल-नगाड़ों और फूल-मालाओं के साथ उनका भव्य स्वागत किया गया। गांव, रिश्तेदार और स्थानीय लोग इस पल के साक्षी बने।
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यूपीएससी से वर्दी तक का सफर
महेश्वर सिंह ने संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास कर यह उपलब्धि हासिल की। प्रारंभिक शिक्षा नालागढ़ के एक निजी स्कूल से पूरी करने के बाद उन्होंने शिमला में उच्च शिक्षा ली और सोलन स्थित नौणी विश्वविद्यालय से डिग्री प्राप्त की। लगातार मेहनत और अनुशासन के साथ सिविल सेवाओं की तैयारी करते हुए उन्होंने यह मुकाम हासिल किया।
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परिवार की शिक्षा-परंपरा बना सहारा
महेश्वर के पिता प्रकाश चंद शिमला में हिमाचल प्रदेश पुलिस में इंस्पेक्टर के पद पर तैनात हैं। पिता की सीख साफ थी कि जितना पढ़ोगे, उतना आगे बढ़ोगे। परिवार की यह सोच ही महेश्वर की ताकत बनी। उनकी बड़ी बहन हाईकोर्ट में वकील हैं और दूसरी बहन पीजीआई चंडीगढ़ में नर्सिंग ऑफिसर के रूप में सेवाएं दे रही हैं।
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मां बोली- मेरे बच्चों ने हमें गर्वित महसूस करवाया
वहीं मीडिया से बातचीत में महेश्वर की माता जी ने कहा कि वे हमेशा से चाहती थी कि उनके बच्चे कुछ बन जाए। उन्हें दिन-रात बस यही चिंता सताती थी। लेकिन उनके तीनों ही बच्चों ने नाम कमाया है। वहीं महेश्वर की कामयाबी के बारे में बात करते हुए उनकी मां भावुक हुई और कहा कि उनके जीवन का ये सबसे बेहतरीन दिन है।
