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November 24, 2025

हिमाचल के हवलदार ने पास की कठिन परीक्षा, अब भारतीय सेना में बनेगा बड़ा अफसर

IMA में ट्रेनिंग करेंगे हवलदार विवेक सिंह

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Indian Army Havaldar Vivek Singh

सिरमौर। कहते हैं कि मेहनत की राहों पर जो चलता है, वो मुश्किलों को भी हर कदम पर बदलता है, जुनून अगर दिल में सुलगता रहे तो- एक दिन वही नाम आसमान पर चमकता है। यह शब्द बखूबी चरितार्थ करते हैं सिरमौर जिले के बेटे विवके सिंह के जीवन को।

हवलदार ने पास की कठिन परीक्षा

पंचायत बाडथल मधाना के गांव जंगलोट से ताल्लुक रखने वाले और भारतीय सेना में हवलदार के पद पर सेवारत विवेक सिंह ने अपनी कड़ी मेहनत, अनुशासन और समर्पण के दम पर प्रतिष्ठित सर्विस सिलेक्शन बोर्ड (SSB) परीक्षा उत्तीर्ण कर ली है।

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अब बनेगा बड़ा अफसर

इस परीक्षा को पास करने के बाद उन्होंने भारतीय सेना की सर्वोच्च प्रशिक्षण संस्था इंडियन मिलिट्री एकेडमी (IMA), देहरादून में प्रवेश पाने का दुर्लभ और गौरवमयी अवसर हासिल किया है। यानी उन्हेंने सेना में अधिकारी बनने का सफर शुरू कर दिया है।

आसान नहीं था सफर

विवेक सिंह ने सर्विस एंट्री स्कीम के तहत यह कठिन परीक्षा पास की है। यह वही मार्ग है जो पहले से सेना में कार्यरत जवानों को अधिकारी बनने का अवसर प्रदान करता है।

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IMA देहरादून में करेंगे ट्रेनिंग

जनवरी 2026 से वे एक वर्ष का कठोर, अनुशासित और उच्च स्तर का सैन्य प्रशिक्षण IMA में प्राप्त करेंगे। प्रशिक्षण पूरा होते ही विवेक सिंह भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के पद पर नियुक्त होंगे। उनकी यह उपलब्धि सिर्फ पदोन्नति नहीं, बल्कि वह विश्वास है जो साबित करता है कि निरंतर मेहनत और धैर्य से हर लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।

2014 में सिपाही, 2025 में अधिकारी...

विवेक का सैन्य सफर 2014 में एक सिपाही के रूप में शुरू हुआ था। कठिन परिस्थितियों, सीमांत क्षेत्रों की चुनौतियों और निरंतर प्रशिक्षण के बीच उन्होंने खुद को निखारा और समय के साथ अपनी क्षमता सिद्ध करते हुए हवलदार के पद तक पहुंचे।

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11 साल पहले पहनी थी वर्दी

सैनिक की वर्दी पहने हुए अपने 11 वर्षों के अनुभव ने उनके आत्मविश्वास को और मजबूत बनाया। उनकी यह कामयाबी उन हजारों सैनिकों के लिए प्रेरणा है जो वर्दी पहने हुए एक दिन कंधों पर सितारे सजाने का सपना देखते हैं।

गांव के सरकारी स्कूल से की पढ़ाई

विवेक सिंह ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गाँव जंगलोट और बाडथल मधाना के सरकारी स्कूलों में, जबकि उच्च शिक्षा कोलर के सरकारी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में हिंदी माध्यम से प्राप्त की। ग्रामीण पृष्ठभूमि, सीमित संसाधन और साधारण परिवेश के बावजूद उनका दृढ़ निश्चय कभी डगमगाया नहीं। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, परिवार, शिक्षकों और मार्गदर्शकों को दिया है, जिन्होंने हर कठिन चरण में उनका मनोबल बढ़ाया।

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परिवार में सेवा की परंपरा

विवेक सिंह के परिवार में सैन्य परंपरा पहले से मौजूद है। उनके बड़े भाई नवीन ठाकुर वर्ष 2008 से भारतीय सेना में हवलदार के रूप में सेवा दे रहे हैं। वहीं उनके चाचा प्रेमपाल हाल ही में हवलदार पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। उनके परिवार की यह सामूहिक सेवा भावना क्षेत्र में एक मिसाल के रूप में देखी जाती है।

पूरे क्षेत्र में जश्न जैसा माहौल

विवेक की सफलता की खबर जैसे ही क्षेत्र में पहुँची, गाँव जंगलोट और आसपास के इलाकों में खुशी की लहर दौड़ गई। ग्रामवासी, पंचायत प्रतिनिधि और युवा वर्ग इसे क्षेत्र के सम्मान की उपलब्धि बता रहे हैं। स्थानीय लोग कहते हैं कि विवेक ने न केवल परिवार, बल्कि पूरे धारटीधार को गौरवान्वित किया है।

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